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भारत-EU की ऐतिहासिक पहल, वैज्ञानिक अनुसंधान को मिलेगी नई रफ्तार
Ratna Netam
6 Nov 2026 9:10 PM IST

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नई दिल्ली/ब्रसेल्स। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। दोनों पक्षों ने यूरोपीय संघ के महत्वाकांक्षी 'होराइजन यूरोप' (Horizon Europe) कार्यक्रम में भारत की भागीदारी को लेकर बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह कार्यक्रम 93.5 अरब यूरो के बजट वाला यूरोपीय संघ का प्रमुख अनुसंधान एवं नवाचार कार्यक्रम है। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को सामने आई इस उपलब्धि को भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।यूरोपीय आयोग के अनुसार, बातचीत पूरी होने से भारतीय वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के नए अवसर खुलेंगे। समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भारतीय संस्थान यूरोपीय अनुसंधान परियोजनाओं में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। भारत की भागीदारी जनवरी 2027 से प्रभावी होने की संभावना है।
भारतीय वैज्ञानिकों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
होराइजन यूरोप कार्यक्रम में भारत की भागीदारी से भारतीय वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को यूरोपीय संस्थानों के साथ संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने का अवसर मिलेगा। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।समझौता लागू होने के बाद भारतीय अनुसंधान संस्थान कार्यक्रम के दूसरे स्तंभ 'ग्लोबल चैलेंजेज एंड यूरोपियन इंडस्ट्रियल कॉम्पिटिटिवनेस' के तहत सीधे वित्तीय सहायता प्राप्त करने और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान परियोजनाओं का नेतृत्व करने के पात्र होंगे।यह कार्यक्रम का सबसे बड़ा सहयोगात्मक अनुसंधान क्षेत्र है। इसके अंतर्गत स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, उद्योग, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और जैव-अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
93.5 अरब यूरो का है विशाल बजट
होराइजन यूरोप यूरोपीय संघ का प्रमुख अनुसंधान एवं नवाचार वित्तपोषण कार्यक्रम है, जिसे वर्ष 2021 से 2027 की अवधि के लिए संचालित किया जा रहा है। इसका कुल बजट 93.5 अरब यूरो है।इस कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को बढ़ावा देना, नई तकनीकों का विकास करना और सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का समाधान खोजना है।हालांकि, 93.5 अरब यूरो पूरे कार्यक्रम का बजट है। यह राशि केवल भारत के लिए निर्धारित नहीं की गई है। भारतीय संस्थानों को उपलब्ध होने वाला वित्तपोषण संबंधित परियोजनाओं, पात्रता शर्तों और स्वीकृत प्रस्तावों पर निर्भर करेगा।कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न देशों के वैज्ञानिक और अनुसंधान संगठन मिलकर ऐसी तकनीक विकसित कर सकते हैं, जिनका उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ ऊर्जा, औद्योगिक उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण में किया जा सके।
जनवरी 2027 से शुरू हो सकती है भागीदारी
यूरोपीय आयोग के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच बातचीत पूरी होने के बाद अब समझौते पर हस्ताक्षर और आवश्यक अनुमोदन की प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं।इन प्रक्रियाओं के सफलतापूर्वक पूरा होने पर भारत की औपचारिक भागीदारी जनवरी 2027 से शुरू होने की संभावना है।यूरोपीय संघ अपने सदस्य देशों के अलावा अन्य देशों को भी होराइजन यूरोप से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। इस व्यवस्था के अंतर्गत संबंधित देशों के अनुसंधान संगठन निर्धारित क्षेत्रों में यूरोपीय संस्थानों के समान शर्तों पर भागीदारी कर सकते हैं। इसके बदले संबद्ध देशों को कार्यक्रम के बजट में वित्तीय योगदान देना होता है।
यूरोपीय आयुक्त ने समझौते का किया स्वागत
यूरोपीय संघ की स्टार्टअप, अनुसंधान एवं नवाचार आयुक्त एकातेरिना जहरिएवा ने भारत के साथ बातचीत पूरी होने का स्वागत किया है।उन्होंने कहा कि इस पहल से दोनों पक्षों के व्यवसायों, वैज्ञानिकों और नवाचार से जुड़े संगठनों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। भारत और यूरोप के शोधकर्ता मिलकर भविष्य की तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।यूरोपीय आयोग का मानना है कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और यूरोप के अनुसंधान संसाधनों का संयुक्त उपयोग वैश्विक स्तर पर तकनीकी विकास को गति दे सकता है।
फरवरी में शुरू हुई थी बातचीत
भारत और यूरोपीय संघ के बीच होराइजन यूरोप कार्यक्रम में भागीदारी को लेकर प्रारंभिक चर्चा 6 फरवरी 2026 को शुरू हुई थी। इसके बाद 17 जुलाई 2026 को औपचारिक बातचीत की शुरुआत की गई।दोनों पक्षों के बीच वैज्ञानिक सहयोग का आधार वर्ष 2001 में हुआ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग समझौता है, जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ाया गया है।भारत और यूरोपीय संघ ने जनवरी 2026 में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान अनुसंधान और नवाचार को अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया था।इस सहयोग को भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद के माध्यम से भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर पर जोर
भारत और यूरोपीय संघ के बीच तकनीकी सहयोग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग और अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।इसके अलावा 6जी संचार तकनीक, डिजिटल कौशल और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं।होराइजन यूरोप में भागीदारी से भारतीय स्टार्टअप और अनुसंधान आधारित कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिल सकता है। इससे नई तकनीकों को विकसित करने और उन्हें व्यावसायिक उपयोग तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत-यूरोप संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक, व्यापारिक और तकनीकी संबंध लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ऐसे समय में अनुसंधान कार्यक्रम पर बातचीत पूरी होना दोनों पक्षों के दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।इस पहल से भारतीय विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिक संस्थानों और तकनीकी कंपनियों के लिए यूरोपीय शोध नेटवर्क से जुड़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग से वैज्ञानिक प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिलते हैं और बड़े स्तर की तकनीकी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है।अब दोनों पक्षों की नजर समझौते की औपचारिक प्रक्रियाओं को पूरा करने पर रहेगी। इसके बाद भारतीय शोधकर्ताओं के लिए यूरोप के प्रमुख अनुसंधान कार्यक्रम में भागीदारी का नया अध्याय शुरू हो सकता है।
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