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समुद्री सुरक्षा के लिए भारत की बड़ी पहल, सात देश मिलकर करेंगे संयुक्त अभ्यास

Ratna Netam
31 Oct 2026 2:44 PM IST
समुद्री सुरक्षा के लिए भारत की बड़ी पहल, सात देश मिलकर करेंगे संयुक्त अभ्यास
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श्री विजयपुरम। बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारत ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारत 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक पहले BIMSTEC मैरीटाइम सिक्योरिटी एक्सरसाइज की मेजबानी कर रहा है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी श्री विजयपुरम (पूर्व नाम पोर्ट ब्लेयर) में आयोजित इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में बंगाल की खाड़ी से जुड़े सात देश हिस्सा ले रहे हैं।इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाना, सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करना और समुद्र में किसी भी आपात स्थिति या सुरक्षा चुनौती से मिलकर निपटने की क्षमता विकसित करना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह पहल BIMSTEC नेताओं के साझा दृष्टिकोण को जमीनी कार्रवाई में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे बंगाल की खाड़ी में सुरक्षित, स्थिर और शांतिपूर्ण समुद्री वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।
सात देश एक साथ करेंगे समुद्री सुरक्षा अभ्यास
इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में BIMSTEC के सभी सात सदस्य देश भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। इन देशों की नौसेनाओं और तटरक्षक बलों के प्रतिनिधि अभ्यास में भाग ले रहे हैं। समुद्री क्षेत्र में सक्रिय देशों के अलावा भूटान और नेपाल जैसे स्थलरुद्ध देशों की भागीदारी भी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी उनके व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क के लिए महत्वपूर्ण है।श्रीलंका ने अपने नौसैनिक जहाज SLNS गजबहु को इस अभ्यास में शामिल होने के लिए भारत भेजा है। यह जहाज 29 अक्टूबर को श्री विजयपुरम पहुंचा, जहां भारतीय नौसेना ने नौसैनिक परंपराओं के अनुसार उसका स्वागत किया।अभ्यास के उद्घाटन समारोह का आयोजन 30 अक्टूबर को किया गया। अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी ने इसका उद्घाटन किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता के साथ विभिन्न सदस्य देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
दो चरणों में आयोजित हो रही है यह अहम पहल
BIMSTEC मैरीटाइम सिक्योरिटी एक्सरसाइज को इस तरह तैयार किया गया है कि सदस्य देशों के बीच पहले आपसी समझ और योजना बनाने की क्षमता विकसित हो तथा इसके बाद समुद्री परिस्थितियों में बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके।अभ्यास के शुरुआती हिस्से में टेबलटॉप एक्सरसाइज के माध्यम से समुद्री सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों, आपात स्थितियों और संयुक्त कार्रवाई की रणनीतियों पर चर्चा की जा रही है। इसके बाद हार्बर फेज में नौसैनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच पेशेवर बातचीत, अनुभव साझा करने और परिचालन योजनाओं पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। समुद्री स्तर पर समन्वय और अंतर-संचालन क्षमता को परखने के लिए व्यावहारिक गतिविधियां भी इस पहल का हिस्सा हैं।इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संकट के समय अलग-अलग देशों की नौसेनाएं और सुरक्षा एजेंसियां एक-दूसरे के साथ प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
समुद्री आतंकवाद और तस्करी से निपटने पर रहेगा फोकस
बंगाल की खाड़ी का क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस समुद्री क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही लगातार होती रहती है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।इस अभ्यास में समुद्री आतंकवाद, सीमा पार अपराध, अवैध तस्करी और समुद्री गतिविधियों की निगरानी जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा समुद्री क्षेत्र की निगरानी यानी मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA) को बेहतर बनाना भी प्रमुख लक्ष्य है।इसका अर्थ है कि सदस्य देश समुद्र में संदिग्ध जहाजों, असामान्य गतिविधियों और संभावित सुरक्षा खतरों की जानकारी एक-दूसरे के साथ साझा कर सकें। इससे किसी भी खतरे की पहचान समय रहते करने और जरूरत पड़ने पर संयुक्त कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।अभ्यास में समुद्री कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच समन्वय और सूचनाओं के आदान-प्रदान को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
प्राकृतिक आपदा और तेल रिसाव से निपटने की भी तैयारी
BIMSTEC का यह अभ्यास केवल सैन्य या सुरक्षा गतिविधियों तक सीमित नहीं है। इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समुद्री आपदाओं के दौरान सदस्य देशों की संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना भी है।बंगाल की खाड़ी का क्षेत्र चक्रवात, सुनामी, समुद्री बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील है। ऐसी परिस्थितियों में किसी देश के समुद्री क्षेत्र में संकट आने पर पड़ोसी देश भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर सकते हैं।अभ्यास के माध्यम से मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) से जुड़े सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा समुद्र में तेल या खतरनाक रसायनों के रिसाव जैसी घटनाओं से निपटने की तैयारियों को भी क्षेत्रीय सहयोग का हिस्सा बनाया गया है।समुद्री प्रदूषण की घटनाएं पर्यावरण, मछली पालन और समुद्री व्यापार को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए सदस्य देशों के बीच समय पर सूचना साझा करना और संयुक्त प्रतिक्रिया विकसित करना बेहद जरूरी है।
मोदी की पहल से आगे बढ़ा क्षेत्रीय सहयोग
इस अभ्यास को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से छठे BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित प्रमुख पहलों में शामिल किया गया था। यह शिखर सम्मेलन 2025 में थाईलैंड में आयोजित हुआ था। इसके बाद सदस्य देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर चर्चा और तैयारियां की गईं।नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित BIMSTEC समुद्री सुरक्षा सहयोग विशेषज्ञ समूह की चौथी बैठक में समुद्र में समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच संपर्क और समन्वय के लिए दिशा-निर्देशों तथा बंगाल की खाड़ी में तेल रिसाव से निपटने के लिए समन्वित प्रतिक्रिया संबंधी मसौदों को अंतिम रूप दिया गया था।इसके बाद 2026 में आयोजित इस पहले बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा अभ्यास के जरिए इन साझा प्रतिबद्धताओं को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में कदम उठाया गया है।
भारत की समुद्री रणनीति के लिए क्यों अहम है यह अभ्यास?
भारत के लिए हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का क्षेत्र आर्थिक, व्यापारिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता का सीधा संबंध भारत के हितों से है।BIMSTEC के माध्यम से भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। इस अभ्यास से सदस्य देशों की नौसेनाओं और तटरक्षक बलों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली समझने, तकनीकी अनुभव साझा करने और आपात स्थितियों में बेहतर तालमेल बनाने का अवसर मिलेगा।भारत की मेजबानी में आयोजित यह पहला BIMSTEC समुद्री सुरक्षा अभ्यास क्षेत्रीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 3 नवंबर तक चलने वाली इस पहल से मिलने वाले अनुभव भविष्य में संयुक्त समुद्री अभियानों और सुरक्षा संबंधी योजनाओं को बेहतर बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।कुल मिलाकर, BIMSTEC मैरीटाइम सिक्योरिटी एक्सरसाइज का संदेश स्पष्ट है—बंगाल की खाड़ी की सुरक्षा किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा जिम्मेदारी है।
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