
x
Cape Town केप टाउन: दक्षिणी अफ्रीका साइबर अपराधियों के मुख्य लक्ष्यों में से एक बनकर उभरा है। पूरे महाद्वीप में रैनसमवेयर, फिशिंग और बिजनेस ईमेल से जुड़ी धोखाधड़ी के ज्यादातर मामले यहीं सामने आए हैं। इंटरपोल की हालिया रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। बुधवार को स्थानीय मीडिया ने अफ्रीका में साइबर अपराध पर इंटरपोल की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। सोमवार को जारी इंटरपोल की 40 पन्नों की 'अफ्रीकन साइबरथ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट 2026' में दक्षिणी अफ्रीका को 'महाद्वीप का सबसे अधिक डिजिटल रूप से विकसित और सबसे ज्यादा निशाना बनाया जाने वाला क्षेत्र' बताया गया है। यह रिपोर्ट 36 अफ्रीकी देशों से जुटाई गई जानकारी पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई प्रमुख साइबर हमलों की श्रेणियों में दक्षिण अफ्रीका का सबसे बड़ा हिस्सा रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, 'ट्रेंडएआई' की ओर से दर्ज किए गए अफ्रीका के कुल रैनसमवेयर मामलों में से 92 प्रतिशत दक्षिण अफ्रीका में पाए गए। इसके अलावा, देश में 2,13,523 डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस (डीडीओएस) हमले दर्ज किए गए, जिनमें एक हमले की गति 312 गीगाबिट प्रति सेकंड तक पहुंच गई थी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, साइबर सुरक्षा कंपनी 'एसओसीरडार' की ओर से दर्ज अफ्रीका के कुल फिशिंग मामलों में लगभग 40 प्रतिशत दक्षिण अफ्रीका में पाए गए। वहीं, 'ट्रेंडएआई' के 2025 के आंकड़ों के आधार पर बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज के 70 प्रतिशत मामले भी दक्षिण अफ्रीका से जुड़े थे।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पूरे अफ्रीका में साइबर अपराध अब छोटे-मोटे अपराधों तक सीमित नहीं रहे। यह एक 'संगठित और सीमाओं से परे फैला हुआ नेटवर्क' बन चुका है, जिसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और स्वचालित तकनीकों का बढ़ता उपयोग और ताकत दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका में साइबर अपराध से होने वाला आर्थिक नुकसान 2024 के बाद से दोगुने से भी ज्यादा बढ़ गया है। यह 19.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 48.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
2025 में ऑनलाइन ठगी और धोखाधड़ी अफ्रीका में सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाने वाले साइबर अपराध रहे। अपराधी मोबाइल मनी प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और एआई तकनीक का इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बना रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे में शामिल 72 प्रतिशत अफ्रीकी देशों ने बताया कि उनके यहां ऑनलाइन ठगी से जुड़े संगठित स्कैम सेंटर मौजूद हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या दक्षिणी और पश्चिमी अफ्रीका में पाई गई। इंटरपोल की साइबर अपराध इकाई के निदेशक नील जेटन ने कहा, "साइबर अपराध इस क्षेत्र के लिए सबसे गंभीर आपराधिक खतरों में से एक बन चुका है।
उन्होंने कहा, "एआई साइबर हमले के हर चरण को ऑटोमेट कर रहा है, चाहे वह जानकारी जुटाना हो, फिशिंग करना हो, पैसे की वसूली करना हो या सुरक्षा से बच निकलना हो। हालांकि उन्होंने कहा कि जब देश मिलकर काम करते हैं, तो साइबर अपराधियों के नेटवर्क की पहचान की जा सकती है, उन्हें बाधित किया जा सकता है और पूरी तरह खत्म भी किया जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही दक्षिणी अफ्रीका के देशों के पास महाद्वीप की कुछ सबसे मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं, फिर भी एआई की मदद से होने वाले तेज और बड़े साइबर हमलों के सामने वे अभी भी काफी हद तक असुरक्षित बने हुए हैं।
Tagsजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





