
इजरायल: आगामी आम चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले शुक्रवार को संसद नीसेट को भंग कर दिया गया। देश में 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने हैं, जिसके लिए राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। संसद भंग होने के बाद बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे। हालांकि चुनाव तक उनकी सरकार कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले पाएगी।
इजरायली संसद नीसेट का ग्रीष्मावकाश खत्म होने के बाद शुक्रवार को अधिवेशन शुरू हुआ था। कुछ घंटे की कार्यवाही के बाद संसद को भंग करने का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे मंजूरी दे दी गई। इससे मौजूदा सरकार का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त हो गया और अब देश नई सरकार के गठन की प्रक्रिया की ओर बढ़ गया है।
संसद भंग होने के बाद अब 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में जनता नए प्रतिनिधियों का चुनाव करेगी। चुनाव परिणाम आने के बाद निर्वाचित सदस्यों से नई संसद का गठन किया जाएगा। तब तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर सरकार का संचालन करते रहेंगे।
हालांकि कार्यवाहक सरकार की शक्तियां सीमित रहेंगी। चुनावी अवधि के दौरान सरकार आमतौर पर ऐसे बड़े फैसले नहीं ले सकती, जिनका लंबे समय तक देश की नीतियों पर प्रभाव पड़े। इसका मतलब है कि नेतन्याहू सरकार रोजमर्रा के प्रशासनिक कामों को संभालेगी, लेकिन बड़े नीतिगत बदलाव या महत्वपूर्ण फैसले नई सरकार बनने के बाद ही लिए जाएंगे।
इजरायल के लिए यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब देश कई गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से गुजर रहा है। गाजा में जारी संघर्ष, लेबनान सीमा पर तनाव और ईरान से संभावित खतरे के बीच राजनीतिक अस्थिरता सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इजरायल पिछले कुछ वर्षों से लगातार सुरक्षा संकटों और युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है।
गाजा संघर्ष के बाद नेतन्याहू सरकार की नीतियों को लेकर देश के अंदर भी मतभेद सामने आए हैं। विपक्ष लगातार सरकार की रणनीति और युद्ध प्रबंधन को लेकर सवाल उठाता रहा है। वहीं नेतन्याहू का कहना है कि देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
आगामी चुनाव में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन के सामने विपक्षी दलों की कड़ी चुनौती होगी। पूर्व प्रधानमंत्री और मध्यमार्गी नेता नाफ्ताली बेनेट के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन चुनाव में नेतन्याहू को टक्कर देने की तैयारी कर रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार का चुनाव केवल सरकार बदलने का नहीं बल्कि देश की सुरक्षा नीति और भविष्य की दिशा तय करने वाला भी हो सकता है।
नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हैं। उनके समर्थक उन्हें मजबूत सुरक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की स्थिति मजबूत करने वाला नेता मानते हैं। वहीं आलोचक उन पर राजनीतिक विभाजन बढ़ाने और युद्ध से जुड़े फैसलों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
अब चुनाव अभियान के दौरान देश की सुरक्षा, गाजा युद्ध, आर्थिक स्थिति और सरकार की कार्यशैली जैसे मुद्दे प्रमुख रहने की संभावना है। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि इजरायल में नेतन्याहू की सत्ता बरकरार रहती है या विपक्ष नया राजनीतिक समीकरण बनाने में सफल होता है।
फिलहाल संसद भंग होने के बाद इजरायल की राजनीति चुनावी मोड में प्रवेश कर चुकी है। आने वाले तीन महीने देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि एक तरफ सुरक्षा चुनौतियां बनी रहेंगी और दूसरी ओर जनता नई सरकार चुनने की तैयारी करेगी।





