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इजरायल में सरकार–सुप्रीम कोर्ट टकराव बढ़ा, कैबिनेट ने आदेश मानने से किया इनकार

Shantanu Roy
5 July 2026 11:36 PM IST
इजरायल में सरकार–सुप्रीम कोर्ट टकराव बढ़ा, कैबिनेट ने आदेश मानने से किया इनकार
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New Delhi. नई दिल्ली। इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच टकराव अब गंभीर राजनीतिक संकट का रूप लेता दिख रहा है। रविवार को इजरायली कैबिनेट ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को लागू नहीं करेगी, जिसमें देश के कमर्शियल मीडिया रेगुलेटर सेकेंड अथॉरिटी फॉर टेलीविजन एंड रेडियो (SATR) को अपना काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी। इस फैसले के बाद देश की न्यायिक और कार्यपालिका व्यवस्था के बीच सीधा टकराव सामने आ गया है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने इस स्थिति को “जंगल राज की आहट” बताते हुए गंभीर चिंता जताई है।

मामला उस समय शुरू हुआ जब इजरायल के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसके तहत मीडिया रेगुलेटर की नई परिषद गठित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अदालत ने आदेश दिया था कि मौजूदा परिषद ही अपने कार्य जारी रखे, क्योंकि कुछ सदस्यों के इस्तीफे राजनीतिक दबाव में दिए जाने की आशंका थी। हालांकि, नेतन्याहू सरकार ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। संचार मंत्री श्लोमो कारही और न्याय मंत्री यारिव लेविन ने संयुक्त बयान में कहा कि अदालत को कानून को बदलने या रौंदने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई फैसला कानून के विपरीत होगा, तो उसे सरकार स्वीकार नहीं करेगी और उसके आधार पर लिए गए सभी निर्णय अमान्य माने जाएंगे। कैबिनेट ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में मीडिया रेगुलेटर परिषद द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय को सरकार वैध नहीं मानेगी। सरकार का तर्क है कि वर्तमान परिषद के पास आवश्यक सदस्य संख्या नहीं है, इसलिए उसके निर्णय कानूनी रूप से प्रभावी नहीं हैं। सरकार के इस रुख की विपक्षी दलों और कानूनी विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की है। डिप्टी अटॉर्नी जनरल गिल लिमोन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार अपने अनुसार अदालत के आदेशों को चुनिंदा तरीके से मानती है, तो यह कानून के शासन को कमजोर करने की शुरुआत होगी।

पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने कहा कि अदालत के आदेश की अवहेलना देश में अराजकता पैदा कर सकती है और इजरायल की लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं डेमोक्रेट्स पार्टी के नेता यायर गोलान ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू सरकार चुनाव से पहले न्यायपालिका की शक्ति को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, ताकि भविष्य में किसी भी असहज फैसले को चुनौती दी जा सके। इस पूरे विवाद पर पत्रकार संगठनों और लोकतंत्र समर्थक समूहों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह मामला केवल मीडिया रेगुलेटर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इजरायल में लोकतंत्र, प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के शासन पर सीधा प्रभाव डालने वाला मुद्दा बन गया है। वर्तमान हालात में इजरायल की राजनीति में तनाव बढ़ गया है और सरकार तथा न्यायपालिका के बीच यह टकराव आगे और गहरा सकता है।
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