विश्व

ट्रंप के मीडिया बैन पर कानूनी लड़ाई तेज DOJ ने राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला

Ratna Netam
23 Sept 2026 9:25 PM IST
ट्रंप के मीडिया बैन पर कानूनी लड़ाई तेज DOJ ने राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया हवाला
x
वॉशिंगटन।अमेरिका में व्हाइट हाउस की प्रेस कवरेज को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और तीन प्रमुख समाचार संस्थानों के बीच कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने अदालत में ट्रंप प्रशासन के उस फैसले का बचाव किया है, जिसके तहत CNN, MS NOW और POLITICO के पत्रकारों की व्हाइट हाउस परिसर में एंट्री रोक दी गई है। न्याय विभाग का कहना है कि व्हाइट हाउस तक पहुंच पत्रकारों का स्वतः प्राप्त अधिकार नहीं बल्कि एक विशेषाधिकार है।
मंगलवार को अदालत में दाखिल दस्तावेज में न्याय विभाग के वकीलों ने तीनों समाचार संस्थानों की ओर से मांगी गई अस्थायी राहत का विरोध किया। CNN, MS NOW और POLITICO ने अपने पत्रकारों के व्हाइट हाउस प्रेस क्रेडेंशियल रद्द किए जाने के खिलाफ संघीय अदालत का रुख किया है। उनका कहना है कि प्रशासन का फैसला अमेरिकी संविधान के First Amendment के तहत प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन करता है।
DOJ ने अदालत के सामने दलील दी कि व्हाइट हाउस अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास और कार्यस्थल होने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील जगह है। ऐसे में राष्ट्रपति और प्रशासन का परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों के लिए पेशेवर व्यवहार और सुरक्षा मानक तय करने में महत्वपूर्ण हित है।
न्याय विभाग ने दावा किया कि CNN, MS NOW और POLITICO के पत्रकारों की कुछ रिपोर्टिंग ने प्रशासन की नजर में पेशेवर व्यवहार और शिष्टाचार के अपेक्षित मानकों को पूरा नहीं किया। DOJ ने संवेदनशील या गोपनीय जानकारी से संबंधित रिपोर्टिंग का भी हवाला दिया है। हालांकि ये ट्रंप प्रशासन और न्याय विभाग के आरोप हैं और अदालत ने अभी इनके आधार पर प्रेस प्रतिबंध की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।
तीनों मीडिया संस्थान प्रशासन की इस दलील से असहमत हैं। उन्होंने 21 सितंबर को वॉशिंगटन की संघीय अदालत में मुकदमा दायर कर व्हाइट हाउस तक अपने पत्रकारों की पहुंच बहाल करने की मांग की। उनका आरोप है कि प्रशासन ने उनकी रिपोर्टिंग से असहमति के कारण प्रेस क्रेडेंशियल वापस लिए और यह कार्रवाई First Amendment के साथ Fifth Amendment के तहत उचित प्रक्रिया से जुड़े अधिकारों का भी उल्लंघन करती है।
विवाद तब बढ़ा जब राष्ट्रपति ट्रंप ने तीनों समाचार संस्थानों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित करने की घोषणा की। इसके बाद CNN की बेट्सी क्लेन, MS NOW की अकायला गार्डनर और POLITICO की चेयेन हैसलेट को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया और उनके प्रेस पास निष्क्रिय कर दिए गए।
ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग की आलोचना करते हुए उन्हें कथित तौर पर गलत खबरें प्रकाशित करने वाला बताया है। तीनों संस्थानों ने इस आधार को चुनौती देते हुए कहा है कि सरकार को किसी समाचार संस्थान को उसकी कवरेज या दृष्टिकोण के कारण दंडित करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
DOJ की ओर से अदालत में पेश जवाब में राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुख आधार बनाया गया। विभाग ने CNN, MS NOW और POLITICO की कुछ रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ऐसी रिपोर्टिंग से संवेदनशील सरकारी या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी प्रभावित हुई। इनमें ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी गोला-बारूद की स्थिति से संबंधित रिपोर्टिंग जैसे विषय भी शामिल बताए गए हैं। यह प्रशासन का कानूनी पक्ष है, जिसे मीडिया संस्थानों ने चुनौती दी है।
मीडिया संस्थानों का कहना है कि पत्रकारों की व्हाइट हाउस तक पहुंच का सवाल केवल उनकी व्यक्तिगत सुविधा का मामला नहीं है। उनके मुताबिक स्वतंत्र प्रेस को राष्ट्रपति और प्रशासन की गतिविधियों की प्रत्यक्ष कवरेज करने का अवसर मिलना जनता तक स्वतंत्र जानकारी पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है।
CNN, MS NOW और POLITICO ने संयुक्त रूप से कहा है कि उन्होंने अपने First Amendment अधिकारों की रक्षा और इस सिद्धांत को कायम रखने के लिए मुकदमा किया है कि सरकार यह तय नहीं कर सकती कि प्रेस क्या प्रकाशित करे। उन्होंने अपने पत्रकारों की पहुंच तत्काल बहाल करने के लिए अस्थायी राहत मांगी है।
इस विवाद का असर व्हाइट हाउस की नियमित मीडिया कवरेज पर भी पड़ा है। अन्य प्रमुख अमेरिकी टेलीविजन नेटवर्क ने प्रतिबंधित संस्थानों के समर्थन में कुछ पूल कवरेज से दूरी बनाई। रिपोर्टों के अनुसार ABC News, CBS News, CNN, Fox News और NBC News ने संयुक्त रूप से स्वतंत्र मीडिया पहुंच के महत्व पर जोर दिया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि व्हाइट हाउस प्रेस एक्सेस को लेकर अमेरिकी अदालतें पहले भी सुनवाई कर चुकी हैं। मौजूदा मामले में DOJ का रुख है कि व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश को संवैधानिक अधिकार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दूसरी तरफ मीडिया संस्थानों का तर्क है कि किसी पत्रकार या संस्थान को उसकी रिपोर्टिंग के आधार पर चुनिंदा तरीके से बाहर करना संवैधानिक सुरक्षा के खिलाफ है। अदालत को इन्हीं परस्पर विरोधी दलीलों पर विचार करना है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कानूनी लड़ाई के बीच मंगलवार को कहा कि अगर अदालत प्रशासन के खिलाफ फैसला देती है तो वह प्रतिबंधित समाचार संस्थानों को संभवतः व्हाइट हाउस में दोबारा प्रवेश करने देंगे। हालांकि उन्होंने अपने फैसले और संबंधित मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग को लेकर अपनी आलोचना दोहराई।
फिलहाल अदालत ने इस विवाद के मूल संवैधानिक सवाल पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। इसलिए DOJ की राष्ट्रीय सुरक्षा और पेशेवर मानकों से जुड़ी दलीलों तथा मीडिया संस्थानों के प्रेस स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया से जुड़े दावों को पक्षकारों के कानूनी तर्क के रूप में ही देखा जा रहा है।
अदालत का आगामी फैसला यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि व्हाइट हाउस प्रशासन पत्रकारों के प्रेस क्रेडेंशियल और परिसर तक पहुंच तय करते समय किस सीमा तक विवेकाधिकार इस्तेमाल कर सकता है और उस अधिकार पर First Amendment तथा उचित प्रक्रिया संबंधी संवैधानिक सुरक्षा किस तरह लागू होती है।
Next Story