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ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर कड़े प्रतिबंध
Ratna Netam
9 Oct 2026 9:50 PM IST

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वॉशिंगटन। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की पूर्व न्यायाधीश नवनेथम 'नवी' पिल्लै को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के खिलाफ व्यापक प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अमेरिकी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा का हवाला देते हुए यह कदम उठाया। इस फैसले से अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्था के बीच लंबे समय से जारी विवाद एक बार फिर सामने आ गया है।अमेरिकी विदेश विभाग ने प्रतिबंधों से संबंधित जानकारी जारी करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय से उत्पन्न कथित खतरों के खिलाफ अतिरिक्त कदम उठा रहा है। प्रशासन ने अपने फैसले को अमेरिकी नागरिकों और राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा से जोड़ा है।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रतिबंधों की घोषणा की। दूसरी ओर, आईसीसी ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया है।
नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद अमेरिकी फैसला
शुक्रवार को नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने नवी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की।समिति ने अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकार और न्याय के क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मानित करने का निर्णय लिया।नवी पिल्लै दक्षिण अफ्रीका में जन्मी भारतीय मूल की न्यायविद हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा वह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं।नोबेल समिति ने कहा कि पिल्लै ने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार जैसे गंभीर मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।इसी दिन अमेरिका की ओर से आईसीसी पर नए प्रतिबंधों की घोषणा होने के कारण अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं की भूमिका और अधिकारों पर चर्चा तेज हो गई है।
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संप्रभुता का दिया हवाला
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी जानकारी में कहा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय से पैदा होने वाले कथित खतरे के खिलाफ कदम उठाए हैं।अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि आईसीसी उन देशों के नागरिकों के खिलाफ भी अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने का प्रयास करता है, जिन्होंने न्यायालय की स्थापना से संबंधित रोम संविधि को स्वीकार नहीं किया है।
अमेरिका स्वयं रोम संविधि का पक्षकार नहीं है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि किसी अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्था को अमेरिकी नागरिकों और अधिकारियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होना चाहिए, जिसके लिए अमेरिका ने सहमति नहीं दी है।हालांकि, आईसीसी का अधिकार क्षेत्र केवल संबंधित व्यक्ति की नागरिकता पर निर्भर नहीं करता। कुछ परिस्थितियों में उस क्षेत्र के आधार पर भी अधिकार क्षेत्र स्थापित हो सकता है, जहां कथित अपराध हुआ हो।
ICC की संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन पर प्रतिबंध
अमेरिका ने नए प्रतिबंधों के तहत आईसीसी की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों को प्रतिबंधित करने की घोषणा की है।इसके अलावा अमेरिकी संस्थाओं को न्यायालय के साथ कारोबारी संबंध समाप्त करने के लिए छह महीने की अवधि दी गई है।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि प्रशासन आईसीसी की उन गतिविधियों का विरोध करता है, जिन्हें वह अमेरिकी संप्रभुता के खिलाफ मानता है।इन प्रतिबंधों से न्यायालय के वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, इनके वास्तविक प्रभाव का आकलन आगे की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
क्या है अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय?
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की स्थापना वर्ष 2002 में रोम संविधि के आधार पर हुई थी। इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग में स्थित है।आईसीसी का उद्देश्य नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और आक्रामकता के अपराध जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए व्यक्तिगत आपराधिक जवाबदेही तय करना है।यह न्यायालय राष्ट्रीय अदालतों का पूर्ण विकल्प नहीं है। इसकी व्यवस्था इस सिद्धांत पर आधारित है कि प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित देशों की न्यायिक संस्थाओं की होती है।जब राष्ट्रीय स्तर पर वास्तविक जांच या अभियोजन नहीं हो पाता और अन्य कानूनी शर्तें पूरी होती हैं, तब आईसीसी की भूमिका सामने आ सकती है।
अमेरिका और ICC के बीच पुराना विवाद
अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं।अमेरिकी सरकार का कहना है कि आईसीसी को ऐसे अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ अधिकार क्षेत्र नहीं जताना चाहिए, जिनके देश ने रोम संविधि की पुष्टि नहीं की है।जुलाई 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग ने भी आईसीसी के अधिकार क्षेत्र को लेकर अपनी आपत्ति दोहराई थी।विभाग ने कहा था कि अमेरिका आईसीसी की उन जांच और कानूनी प्रक्रियाओं में सहयोग नहीं करेगा, जिन्हें वह अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ अनुचित मानता है।ट्रंप प्रशासन पहले भी आईसीसी के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा चुका है।इजरायली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भी विवाद की वजहअमेरिका और आईसीसी के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण इजरायली अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की कार्रवाई भी रही है।आईसीसी ने नवंबर 2024 में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।इन वारंटों का संबंध गाजा में कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों से था।इजरायल ने आरोपों और न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विरोध किया है। अमेरिका ने भी आईसीसी की इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।ट्रंप प्रशासन ने आईसीसी पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगाए हैं। हालांकि, न्यायालय इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और अपने काम को कानूनी दायित्वों के अनुरूप बताता है।
अमेरिकी प्रतिबंधों पर ICC की प्रतिक्रिया
अमेरिका की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने प्रतिबंधों की आलोचना की है।आईसीसी ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय व्यवस्था पर हमला बताया।न्यायालय की अध्यक्ष तोमोको अकाने ने कहा कि संस्था अपना काम निष्पक्षता के साथ जारी रखेगी।नीदरलैंड ने भी आईसीसी के समर्थन में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। डच विदेश मंत्री टॉम बेरेंडसेन ने प्रतिबंधों को लेकर संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।
नवी पिल्लै के सम्मान से अंतरराष्ट्रीय न्याय पर चर्चा
नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने से अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गई है।पिल्लै ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ कानूनी संघर्ष से अपना करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने रवांडा के लिए स्थापित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण और आईसीसी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।वह वर्ष 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रहीं।नोबेल समिति ने उनके लंबे न्यायिक और मानवाधिकार संबंधी कार्यों को सम्मानित किया है।
अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के सामने नई चुनौती
शुक्रवार की दोनों घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता के बीच मौजूद मतभेदों को फिर सामने ला दिया है।एक ओर नोबेल समिति ने अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में नवी पिल्लै के योगदान को सम्मानित किया है। दूसरी ओर अमेरिका ने उसी दिन आईसीसी के खिलाफ व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
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