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पाकिस्तान में गवर्नर शासन के खिलाफ बड़ा विरोध

Ratna Netam
29 Oct 2026 6:15 PM IST
पाकिस्तान में गवर्नर शासन के खिलाफ बड़ा विरोध
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मीरान शाह। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में लागू गवर्नर शासन और आपातकाल को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। नेशनल डेमोक्रेटिक मूवमेंट (NDM) ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को उत्तरी वजीरिस्तान के मीरान शाह में सर्वदलीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन के लिए निर्धारित हॉल सील किए जाने की खबर के बीच कार्यक्रम को हॉल के बाहर आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान में प्रांतीय स्वायत्तता, लोकतांत्रिक अधिकारों और केंद्र सरकार की शक्तियों को लेकर जारी विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।एनडीएम ने सम्मेलन के माध्यम से खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन और आपातकाल समाप्त करने की मांग उठाई है। पार्टी का कहना है कि किसी भी प्रांत के लोगों को अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन चलाने का अधिकार मिलना चाहिए। संगठन ने 11 अक्टूबर को लागू किए गए आपातकाल और प्रांत के 12 जिलों से संबंधित प्रशासनिक बदलावों का भी विरोध किया है।
एनडीएम की ओर से 27 अक्टूबर को जारी सूचना में बताया गया था कि 29 अक्टूबर को मीरान शाह के दरपा खेल इलाके में सर्वदलीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें गवर्नर शासन, आपातकाल और 12 जिलों को प्रांतीय प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से अलग करने के मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित थी। हालांकि, हॉल को किस प्रशासनिक आदेश के तहत सील किया गया, इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है।पाकिस्तान में यह राजनीतिक विवाद 11 अक्टूबर 2026 को उस समय बढ़ा, जब राष्ट्रपति की घोषणा के माध्यम से खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू किया गया। इस फैसले के बाद प्रांतीय सरकार की शक्तियों, विधानसभा की भूमिका और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर सवाल उठने लगे। विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया, जबकि केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा परिस्थितियों और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया गया।
एनडीएम अध्यक्ष मोहसिन दावर और पार्टी नेता बुशरा गोहर पहले ही इस निर्णय को कानूनी चुनौती दे चुके हैं। दोनों नेताओं ने 15 अक्टूबर को पेशावर हाईकोर्ट में संवैधानिक याचिका दायर कर राष्ट्रपति की घोषणा को निरस्त करने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि आपातकाल लागू करने के दौरान आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और प्रांतीय अधिकारों को अनुचित तरीके से सीमित किया गया।पार्टी नेताओं का तर्क है कि पाकिस्तान का संघीय ढांचा प्रांतों को विशेष अधिकार प्रदान करता है। ऐसे में किसी निर्वाचित प्रांतीय सरकार की शक्तियां सीमित करने के लिए संविधान में निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी है। एनडीएम का कहना है कि सुरक्षा चुनौतियों का समाधान लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के बजाय राजनीतिक संवाद और संवैधानिक व्यवस्था के माध्यम से खोजा जाना चाहिए।
खैबर पख्तूनख्वा में लंबे समय से सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। अफगानिस्तान की सीमा से लगे क्षेत्रों में आतंकवादी हिंसा, सुरक्षा अभियानों और विस्थापन जैसी समस्याओं ने स्थानीय आबादी को प्रभावित किया है। उत्तरी वजीरिस्तान भी इन परिस्थितियों से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। ऐसे में मीरान शाह में आयोजित राजनीतिक सम्मेलन का महत्व बढ़ जाता है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर सुरक्षा के साथ प्रशासनिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता का सवाल भी प्रमुखता से उठ रहा है।एनडीएम और अन्य विरोधी राजनीतिक संगठनों का कहना है कि आतंकवाद से निपटने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन इसके लिए नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों में अनावश्यक कटौती नहीं की जानी चाहिए। विपक्षी नेताओं ने प्रांत के राजनीतिक प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदायों को सुरक्षा संबंधी फैसलों में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
इस बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने भी गवर्नर शासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है। पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान ने पेशावर हाईकोर्ट में याचिका दायर करके केंद्र सरकार के कदम को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचित सरकार के अधिकारों को समाप्त करना जनता के जनादेश के खिलाफ है।पेशावर हाईकोर्ट ने 20 अक्टूबर को आपातकाल और गवर्नर शासन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए थे। अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को निर्धारित की गई है। न्यायालय के समक्ष मुख्य सवाल यह है कि आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 की आवश्यक शर्तें पूरी की गई थीं या
उधर, गवर्नर शासन के विरोध में दूसरे विपक्षी नेताओं ने भी संयुक्त राजनीतिक संघर्ष का समर्थन किया है। नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता महमूद खान अचकजई सहित कई नेताओं ने संवैधानिक अधिकारों और प्रांतीय स्वायत्तता की बहाली का मुद्दा उठाया है। विपक्ष का कहना है कि मौजूदा संकट का समाधान राजनीतिक बातचीत के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।पाकिस्तान के संविधान में विशेष परिस्थितियों के दौरान आपातकाल तथा गवर्नर शासन लागू करने के प्रावधान मौजूद हैं। हालांकि, इन शक्तियों के प्रयोग के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं और संसदीय निगरानी की व्यवस्था भी है। यही कारण है कि वर्तमान विवाद केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक बहस का विषय भी बन गया है।मीरान शाह में सर्वदलीय सम्मेलन के आयोजन से स्पष्ट है कि गवर्नर शासन के खिलाफ राजनीतिक विरोध जारी है। अब इस मामले में केंद्र सरकार का रुख, विपक्ष की आगामी रणनीति और पेशावर हाईकोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। प्रांत में सामान्य लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली और प्रशासनिक अधिकारों का भविष्य इन घटनाक्रमों से प्रभावित हो सकता है।
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