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विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा 3 नवंबर से स्पेन दौरे पर, जानें पूरा कार्यक्रम

Ratna Netam
1 Nov 2026 5:25 PM IST
विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा 3 नवंबर से स्पेन दौरे पर, जानें पूरा कार्यक्रम
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नई दिल्ली : 1 नवंबर 2026। भारत और स्पेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल होने जा रही है। विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा 3 से 5 नवंबर 2026 तक स्पेन की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस दौरे को दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद, व्यापारिक सहयोग, निवेश, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अन्य क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और स्पेन के बीच पिछले कुछ वर्षों में आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग का विस्तार हुआ है। ऐसे में विदेश राज्य मंत्री की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने का अवसर प्रदान कर सकती है।भारत और स्पेन के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों, बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद को महत्व देते हैं। यूरोपीय संघ के महत्वपूर्ण सदस्य देश के रूप में स्पेन भारत के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दृष्टि से उपयोगी साझेदार है। वहीं, भारत का विशाल बाजार, तेजी से विकसित होता बुनियादी ढांचा और तकनीकी क्षेत्र स्पेन की कंपनियों के लिए निवेश के अवसर उपलब्ध कराता है।
विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा की प्रस्तावित यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत यूरोपीय देशों के साथ व्यापार, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। स्पेन के साथ संबंधों में भी इन क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय यात्राएं और नियमित राजनयिक संपर्क आपसी विश्वास को मजबूत करने में सहायक रहे हैं।विदेश मंत्रालय की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, मार्गेरिटा स्पेन में आयोजित 30वें इबेरो-अमेरिकी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में भारत एसोसिएट ऑब्जर्वर के रूप में भाग लेगा। इबेरो-अमेरिकी मंच में लैटिन अमेरिका और यूरोप के कुल 22 सदस्य देश शामिल हैं। इनमें लैटिन अमेरिका के 19 तथा यूरोप के स्पेन, पुर्तगाल और अंडोरा शामिल हैं। सम्मेलन में सदस्य देशों के अतिरिक्त अन्य पर्यवेक्षक प्रतिनिधिमंडल भी भाग लेंगे।
यह सम्मेलन भारत के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसके माध्यम से लैटिन अमेरिकी देशों के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलेगा। भारत पिछले कुछ वर्षों से लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के देशों के साथ व्यापार, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और विकास साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। ऐसे में इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय प्रतिनिधित्व से क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।स्पेन यात्रा के दौरान विदेश राज्य मंत्री के विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी योजना है। इन बैठकों में आपसी हितों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त वह मैड्रिड में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे। प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद विदेश यात्राओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि इससे विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की समस्याओं, उपलब्धियों और भारत के साथ उनके संबंधों को समझने का अवसर मिलता है।
भारत और स्पेन के राजनयिक संबंधों के लिए वर्ष 2026 विशेष महत्व रखता है। दोनों देशों ने वर्ष 1956 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और इस वर्ष इनके 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर को ध्यान में रखते हुए भारत और स्पेन ने 2026 को संस्कृति, पर्यटन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संयुक्त वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों, संस्थानों, उद्योगों और शैक्षणिक संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाना है।भारत और स्पेन के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क भी लगातार बढ़े हैं। जनवरी 2026 में स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की थी। दोनों नेताओं ने संस्कृति, पर्यटन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संयुक्त वर्ष का आधिकारिक लोगो भी जारी किया था।
इसके बाद फरवरी 2026 में स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज भारत आए थे। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। इन उच्चस्तरीय संपर्कों ने भारत-स्पेन संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।आर्थिक दृष्टि से भी स्पेन भारत का महत्वपूर्ण यूरोपीय साझेदार है। दोनों देशों के बीच मशीनरी, रसायन, वस्त्र, औद्योगिक उत्पाद, ऑटोमोबाइल उपकरण और अन्य वस्तुओं का व्यापार होता है। स्पेन की अनेक कंपनियां भारत में विनिर्माण, परिवहन, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में सक्रिय हैं। वहीं, भारतीय कंपनियां भी स्पेन और यूरोपीय बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के अवसर तलाश रही हैं।रक्षा क्षेत्र में भारत और स्पेन का सहयोग भी उल्लेखनीय है। विमान निर्माण, रक्षा उपकरण, नौसैनिक प्रौद्योगिकी और आधुनिक सैन्य प्रणालियों से संबंधित परियोजनाओं में दोनों देशों के बीच साझेदारी की संभावनाएं बढ़ी हैं। भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन नीति के संदर्भ में यूरोपीय देशों के साथ तकनीकी सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसके अलावा पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों देशों को करीब लाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय योग, संगीत, सिनेमा और पारंपरिक संस्कृति के प्रति स्पेन में रुचि देखी जाती है। दूसरी ओर, स्पेन की कला, वास्तुकला और पर्यटन स्थल भारतीय पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। शैक्षणिक संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों के बीच बढ़ते संपर्क आपसी समझ को मजबूत कर रहे हैं।स्पेन में भारतीय समुदाय भी दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारतीय मूल के लोग व्यापार, सेवा क्षेत्र और अन्य व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। विदेश राज्य मंत्री की प्रस्तावित मुलाकात प्रवासी भारतीयों के साथ सरकार के संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर होगी।पवित्र मार्गेरिटा की 3 से 5 नवंबर तक प्रस्तावित स्पेन यात्रा भारत की व्यापक विदेश नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरे के माध्यम से भारत न केवल स्पेन के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का प्रयास करेगा, बल्कि इबेरो-अमेरिकी देशों के साथ संवाद और सहयोग के नए अवसर भी तलाशेगा। यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों और चर्चाओं के परिणाम दोनों देशों के भविष्य के सहयोग की दिशा तय करने में सहायक हो सकते हैं।
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