विश्व

शुभांशु शुक्ला की तारीफ में पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री ने कही बड़ी बात

Ratna Netam
22 Oct 2026 9:02 PM IST
शुभांशु शुक्ला की तारीफ में पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री ने कही बड़ी बात
x
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर ऐतिहासिक एक्सिओम मिशन-4 (Ax-4) का हिस्सा रहे पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री स्लावोस उज्नांस्की-विस्निव्स्की ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की जमकर तारीफ की है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को उन्होंने शुभांशु को अपना बेहद अच्छा दोस्त बताते हुए कहा कि अंतरिक्ष मिशन के दौरान दोनों के बीच गहरी मित्रता विकसित हुई। उन्होंने भारत और यूरोप के बीच अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों और औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
शुभांशु शुक्ला को बताया अपना अच्छा दोस्त
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री स्लावोस उज्नांस्की-विस्निव्स्की ने एक्सिओम-4 मिशन के अनुभव साझा किएउन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताया गया समय उनके जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक रहा।पोलिश अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि शुभांशु शुक्ला, जिन्हें मिशन के साथी प्यार से 'शुक्स' कहते हैं, उनके बहुत अच्छे दोस्त बन गए हैं।उन्होंने बताया कि मिशन की तैयारी से लेकर अंतरिक्ष स्टेशन पर काम करने तक सभी अंतरिक्ष यात्रियों के बीच परिवार जैसा रिश्ता बन गया था।
शुभांशु की काबिलियत के हुए मुरीद
उज्नांस्की-विस्निव्स्की ने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की पेशेवर क्षमता और तकनीकी ज्ञान की विशेष सराहना की।उन्होंने कहा कि शुभांशु अपने काम में बेहद कुशल हैं और उन्होंने मिशन के दौरान कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।पोलिश अंतरिक्ष यात्री के मुताबिक, उन्होंने शुभांशु से अंतरिक्ष मिशन के व्यावहारिक पहलुओं के बारे में काफी कुछ सीखा।उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि एक इंजीनियर के रूप में वह अपने वैज्ञानिक और तकनीकी अनुभव शुभांशु के साथ साझा करने में सफल रहे होंगे।उनके अनुसार, इस तरह के अंतरराष्ट्रीय मिशन विभिन्न देशों के अंतरिक्ष यात्रियों को एक-दूसरे से सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।
अंतरिक्ष में परिवार जैसी बन गई थी टीम
पोलिश अंतरिक्ष यात्री ने बताया कि मिशन से पहले सभी सदस्यों ने लंबे समय तक एक साथ प्रशिक्षण लिया था।प्रशिक्षण के दौरान उन्हें तकनीकी तैयारियों, सुरक्षा प्रक्रियाओं और अंतरिक्ष में संभावित चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया गया।उन्होंने कहा कि लंबे प्रशिक्षण और अंतरिक्ष स्टेशन पर साथ काम करने से टीम के सदस्यों के बीच मजबूत विश्वास विकसित हुआ।उज्नांस्की-विस्निव्स्की ने बताया कि मिशन के दौरान सभी अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी सर्वोत्तम क्षमताओं का प्रदर्शन करने का प्रयास किया और निर्धारित राष्ट्रीय तथा वैज्ञानिक उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
जून 2025 में शुरू हुआ था ऐतिहासिक मिशन
एक्सिओम मिशन-4 का प्रक्षेपण 25 जून 2025 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से किया गया था।स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट की सहायता से चार अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना किया गया।इस मिशन में भारत के शुभांशु शुक्ला पायलट की भूमिका में थे, जबकि अमेरिका की पैगी व्हिटसन मिशन कमांडर थीं।पोलैंड के स्लावोस उज्नांस्की-विस्निव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू मिशन विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए थे।चारों अंतरिक्ष यात्री 26 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचे थे।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण मिशन
एक्सिओम-4 मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा।शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने। इससे पहले वर्ष 1984 में राकेश शर्मा अंतरिक्ष यात्रा करने वाले पहले भारतीय बने थे।मिशन के दौरान शुभांशु ने वैज्ञानिक प्रयोगों, अंतरिक्ष में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण से संबंधित अनुसंधान गतिविधियों में हिस्सा लिया।इन अनुभवों को भारत के भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
भारत-यूरोप के बीच अंतरिक्ष सहयोग की संभावनाएं
पोलिश अंतरिक्ष यात्री ने भविष्य में भारत और यूरोपीय देशों के बीच अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष स्टेशन की आपूर्ति से जुड़े भविष्य के मिशनों, वैज्ञानिक अनुसंधान और रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में साझेदारी के व्यापक अवसर मौजूद हैं।अंतरिक्ष अभियानों में अलग-अलग देशों की विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग करके नई तकनीकों का विकास किया जा सकता है।उनके अनुसार, एक्सिओम-4 जैसे अंतरराष्ट्रीय मिशन वैज्ञानिक सहयोग के साथ देशों के बीच विश्वास और मित्रता को भी मजबूत करते हैं।
वैज्ञानिक सहयोग के साथ मजबूत हुई दोस्ती
शुभांशु शुक्ला और स्लावोस उज्नांस्की-विस्निव्स्की की मित्रता अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग का उदाहरण बनकर सामने आई है।दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए एक साझा वैज्ञानिक मिशन में योगदान दिया।पोलिश अंतरिक्ष यात्री के बयान ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष अभियानों की सफलता केवल आधुनिक तकनीक पर निर्भर नहीं होती, बल्कि टीमवर्क, आपसी विश्वास और अनुभवों के आदान-प्रदान की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
Next Story