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फ्रांस में हिंसा के बाद सरकार पर दबाव, मैक्रों ने शांति और कार्रवाई का दिया संदेश

nidhi
19 Oct 2026 8:17 AM IST
फ्रांस में हिंसा के बाद सरकार पर दबाव, मैक्रों ने शांति और कार्रवाई का दिया संदेश
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पेरिस से लिमोज तक उपद्रव
पेरिस: फ्रांस में महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति के खिलाफ हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा, आगजनी और लूट की घटनाओं पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि संपत्ति नष्ट करने और लूटपाट में शामिल लोगों की जवाबदेही तय होगी। अधिकारियों के अनुसार, अशांति के सिलसिले में देशभर में करीब 2400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में मैक्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मांगों और उपद्रव के बीच अंतर करने पर जोर दिया।
तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का संदेश
मैक्रों ने कहा कि जिन लोगों ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, उन्हें उसकी कीमत चुकानी होगी और लूट करने वालों को नुकसान की भरपाई करनी होगी। उन्होंने गणतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की बात भी कही। राष्ट्रपति ने घटनाओं को लेकर नाराजगी जताई और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने हिंसा के लिए कट्टर वामपंथी समूहों के कुछ तत्वों और अपराधियों को जिम्मेदार बताया। यह सरकार का आकलन है; प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति की भूमिका जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से तय होगी। मैक्रों ने यह भी स्वीकार किया कि शांतिपूर्वक अपनी समस्याएं उठा रहे नागरिकों की चिंताओं को सुना जाना चाहिए।
कई शहरों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान
शनिवार के प्रदर्शनों के दौरान पेरिस, मार्सेय, लियोन और अन्य शहरों में हिंसक घटनाएं हुईं। नकाबपोश समूहों द्वारा दुकानों, सार्वजनिक इमारतों और पुलिस को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। कुछ जगहों पर आगजनी हुई और कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा। मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में ऐतिहासिक नगर भवन में लगी आग ने व्यापक ध्यान खींचा। इमारत को भारी क्षति पहुंची और उसके एक हिस्से के ढहने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित हुईं। स्थानीय प्रतिनिधियों ने इस नुकसान की निंदा की। घटनाओं के बाद प्रभावित इलाकों में सफाई और नुकसान का आकलन शुरू हुआ।
पेरिस में बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां
देशभर में करीब 2400 गिरफ्तारियों के बीच पेरिस पुलिस ने राजधानी में 855 लोगों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी। अभियोजकों के अनुसार, एक चरण पर 517 लोग हिरासत में थे, जिनमें 171 नाबालिग शामिल थे। ये आंकड़े शुरुआती थे और आगे की कार्रवाई के साथ बदल सकते हैं। राजधानी में कई गिरफ्तारियां चोरी का सामान रखने के संदेह, हिंसा के उद्देश्य से बने समूह में शामिल होने और तोड़फोड़ से जुड़ी थीं। गिरफ्तारी और हिरासत के आंकड़े अलग-अलग प्रक्रिया दर्शाते हैं। किसी व्यक्ति का पकड़ा जाना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है। संबंधित मामलों में जांच और न्यायिक कार्रवाई के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
सुरक्षाकर्मी घायल, पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल
फ्रांस के गृह मंत्रालय के हवाले से करीब एक हजार सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई है। कई शहरों में पुलिस ने भीड़ नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस, लाठियों और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं। भीड़ नियंत्रण के हथियारों से कुछ युवाओं को गंभीर चोट लगने की घटनाओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। मैक्रों ने सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया के संबंध में पारदर्शिता का आश्वासन दिया। इस तरह जांच का विषय हिंसक समूहों की भूमिका के साथ सुरक्षा प्रबंधन और बल प्रयोग की परिस्थितियां भी हैं।
महंगाई और शिक्षा संबंधी मांगों पर जुटे लोग
प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में ईंधन की कीमतें, जीवनयापन का बढ़ता खर्च और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर असंतोष था। स्कूल तथा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने पढ़ाई की बेहतर परिस्थितियों की मांग भी उठाई। छात्र आंदोलन के साथ व्यापक सामाजिक नाराजगी जुड़ने से प्रदर्शन कई शहरों तक फैले। गृह मंत्रालय ने देशभर में करीब साढ़े पांच लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान दिया, जबकि एक प्रमुख श्रमिक संगठन का आकलन इससे अधिक था। भागीदारी के इन अलग-अलग अनुमानों के बावजूद स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में नागरिक अपनी आर्थिक और सामाजिक मांगों के साथ सड़कों पर आए थे।
स्थानीय स्तर पर प्रतिबंध लगाने का विकल्प
मैक्रों ने अधिकारियों को सार्वजनिक इमारतों और व्यवसायों की सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ काम करने को कहा है। जरूरत पड़ने पर कुछ प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने का विकल्प भी रखा गया है। हालांकि, उनके संबोधन में देशव्यापी आपातकाल की घोषणा नहीं की गई। हिंसा के बाद विपक्ष ने सरकार की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने उपद्रव की निंदा करते हुए सरकार से प्रदर्शनकारियों की समस्याओं का राजनीतिक समाधान तलाशने की मांग की है। कारोबारियों के नुकसान, घायल लोगों की स्थिति और गिरफ्तार व्यक्तियों के मामलों पर आगे की कार्रवाई जारी है। सरकार के सामने व्यवस्था बहाल करने के साथ शांतिपूर्ण नागरिकों की शिकायतों का जवाब देने की चुनौती बनी हुई है।
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