
मॉस्को। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक फैक्ट्री दौरे के दौरान चीनी डिजाइन वाली रूसी कार VOLGA K50 चलाकर सबका ध्यान खींचा। कार की ड्राइविंग के बाद पुतिन ने इसकी जमकर तारीफ की और कहा कि यह कार “बहुत, बहुत स्मूथ” है। उन्होंने कार के कंट्रोल्स को भी बेहतर बताया।
पुतिन का यह कदम केवल एक सामान्य टेस्ट ड्राइव नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे रूस की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और चीन के साथ बढ़ते औद्योगिक सहयोग को दिखाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
फैक्ट्री दौरे के दौरान चलाई कार
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हाल ही में एक फैक्ट्री के दौरे पर पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने VOLGA K50 कार का निरीक्षण किया और खुद इसकी ड्राइविंग की।
ड्राइव शुरू करने से पहले पुतिन ने कार पर अपना ऑटोग्राफ भी दिया। इसके बाद उन्होंने कार को चलाकर इसके प्रदर्शन को परखा।
ड्राइव के बाद पुतिन ने कार की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसकी ड्राइविंग काफी आरामदायक है और इसके कंट्रोल्स भी अच्छी तरह काम कर रहे हैं।
चीन के साथ बढ़ते सहयोग का संकेत
VOLGA K50 को रूस में बनी चीनी डिजाइन वाली कार के रूप में पेश किया जा रहा है। पुतिन के इस कार को चलाने को रूस और चीन के बीच बढ़ते आर्थिक और औद्योगिक संबंधों के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
रूस पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद अपनी घरेलू इंडस्ट्री को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में चीन के साथ तकनीकी और औद्योगिक सहयोग रूस के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।
पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस का संदेश
यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों का असर कई क्षेत्रों पर पड़ा, जिसमें ऑटोमोबाइल सेक्टर भी शामिल है।
कई पश्चिमी कार कंपनियों ने रूस में अपना कारोबार सीमित किया या बंद कर दिया। इसके बाद रूस ने चीन समेत अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाना शुरू किया।
पुतिन द्वारा चीनी डिजाइन वाली कार चलाना इसी संदेश का हिस्सा माना जा रहा है कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस अपनी औद्योगिक क्षमता को आगे बढ़ाने में सक्षम है।
रूसी ऑटो इंडस्ट्री को नई दिशा देने की कोशिश
रूस लंबे समय से अपनी घरेलू कार इंडस्ट्री को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पहले कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां रूसी बाजार में सक्रिय थीं, लेकिन प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक बदलावों के बाद स्थिति बदल गई।
अब रूस चीनी कंपनियों के साथ साझेदारी के जरिए नई तकनीक और डिजाइन को अपनाने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की ऑटोमोबाइल तकनीक और रूस की उत्पादन क्षमता का संयोजन दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
VOLGA ब्रांड की वापसी
VOLGA नाम रूस के ऑटोमोबाइल इतिहास से जुड़ा हुआ है। सोवियत दौर में VOLGA कारें रूस में काफी लोकप्रिय थीं और इन्हें प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था।
अब इसी ब्रांड को नए रूप में बाजार में लाने की कोशिश की जा रही है। चीनी तकनीक और डिजाइन के सहयोग से तैयार कारों के जरिए रूस घरेलू बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।
पुतिन ने दिया घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने का संदेश
रूसी राष्ट्रपति का कार चलाना घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने के अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। इससे रूस की जनता को यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि देश तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।
पुतिन पहले भी कई मौकों पर रूस में बने उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कह चुके हैं।
चीन-रूस संबंधों पर नजर
पिछले कुछ वर्षों में रूस और चीन के बीच आर्थिक संबंध तेजी से बढ़े हैं। ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और उद्योग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग बढ़ा है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी चीन रूस के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है।
भविष्य में बढ़ सकती है साझेदारी
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस और चीन के बीच ऑटो सेक्टर में सहयोग आने वाले समय में और बढ़ सकता है। इससे रूस को नई तकनीक हासिल करने में मदद मिलेगी और चीन को एक बड़े बाजार तक पहुंच मिलेगी।
पुतिन की VOLGA K50 की ड्राइविंग को इसी बदलते औद्योगिक समीकरण का प्रतीक माना जा रहा है।
फिलहाल रूसी राष्ट्रपति का यह अंदाज घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां रूस इसे अपनी औद्योगिक मजबूती के संदेश के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दुनिया की नजर चीन और रूस के बढ़ते तकनीकी सहयोग पर बनी हुई है।





