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भारत में बनेगा राफेल, डसॉल्ट का प्रस्ताव

Kavita2
7 Aug 2026 10:25 AM IST
भारत में बनेगा राफेल, डसॉल्ट का प्रस्ताव
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नई दिल्ली। फ्रांस की प्रमुख विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारत को राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद और निर्माण को लेकर अपना तकनीकी एवं वाणिज्यिक प्रस्ताव सौंप दिया है। इस प्रस्ताव में भारत में स्थानीय स्तर पर राफेल विमानों के उत्पादन की संभावनाओं के साथ-साथ बड़े पैमाने पर तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) का प्रावधान शामिल किया गया है। यह कदम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में यह प्रस्ताव अहम है। भारत अपनी वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना पर काम कर रहा है। इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए भारत ने इस वर्ष मई में फ्रांस को एक औपचारिक लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) भेजा था।

लेटर ऑफ रिक्वेस्ट सरकारों के बीच होने वाला एक औपचारिक संवाद होता है, जिसके माध्यम से रक्षा खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। इसका उपयोग अंतर-सरकारी समझौते (Inter-Governmental Agreement) के तहत किसी रक्षा सौदे की शुरुआत के लिए किया जाता है। भारत और फ्रांस के बीच पहले भी राफेल विमानों की खरीद को लेकर इसी तरह की सरकारी प्रक्रिया अपनाई गई थी।

डसॉल्ट एविएशन के प्रस्ताव में भारत में उत्पादन क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत राफेल विमानों के निर्माण, रखरखाव और उससे जुड़ी तकनीकी क्षमताओं को भारत में विकसित करने की बात कही गई है। इससे देश में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलने और स्थानीय उद्योगों को जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए भारत सरकार लगातार घरेलू उत्पादन और विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी को प्रोत्साहित कर रही है। राफेल परियोजना के तहत मिलने वाला संभावित टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भारतीय रक्षा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकता है। इससे देश में एयरोस्पेस क्षेत्र से जुड़े कौशल, अनुसंधान और उत्पादन क्षमता को मजबूती मिलने की संभावना है।

राफेल एक अत्याधुनिक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसे हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने, निगरानी और रणनीतिक अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। भारतीय वायुसेना पहले से ही राफेल विमानों का संचालन कर रही है। इन विमानों को चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के संदर्भ में भारत की हवाई क्षमता को मजबूत करने वाला माना जाता है।

भारत ने वर्ष 2016 में फ्रांस के साथ एक अंतर-सरकारी समझौते के तहत 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा किया था। इन विमानों की आपूर्ति पूरी हो चुकी है और भारतीय वायुसेना में इन्हें शामिल किया जा चुका है। अब अतिरिक्त 114 विमानों की खरीद की योजना भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है।

नए प्रस्ताव में केवल विमानों की खरीद ही नहीं, बल्कि उत्पादन और औद्योगिक सहयोग पर भी जोर दिया गया है। इससे भारत में रक्षा निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ निजी कंपनियों और छोटे उद्योगों के लिए भी अवसर पैदा हो सकते हैं। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत ऐसे समझौतों को काफी महत्व दिया जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद के साथ तकनीकी क्षमता विकसित करना भी उतना ही जरूरी है। यदि भारत में उत्पादन और रखरखाव की सुविधाएं विकसित होती हैं, तो भविष्य में रक्षा उपकरणों के लिए विदेशी निर्भरता कम हो सकती है।

हालांकि, इस प्रस्ताव के बाद आगे की प्रक्रिया में तकनीकी मूल्यांकन, कीमतों पर बातचीत और अन्य रक्षा खरीद संबंधी औपचारिकताओं को पूरा किया जाएगा। अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों देशों की सरकारों और संबंधित एजेंसियों के बीच कई दौर की बातचीत हो सकती है।

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंध पिछले कई दशकों से मजबूत रहे हैं। दोनों देशों के बीच लड़ाकू विमान, पनडुब्बी, अंतरिक्ष और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग जारी है। राफेल सौदा भी इसी रक्षा साझेदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डसॉल्ट एविएशन के नए प्रस्ताव को भारत के लिए एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की उपलब्धता के साथ-साथ घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने की संभावना भी शामिल है। यदि यह सौदा आगे बढ़ता है, तो यह भारत के सैन्य आधुनिकीकरण और रक्षा उत्पादन क्षमता के विस्तार में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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