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चीन ताइवान में बढ़ा तनाव, शी जिनपिंग की बढ़ती ताकत पर ताइपे की चेतावनी
Ratna Netam
1 Nov 2026 5:20 PM IST

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ताइपे। चीन और ताइवान के बीच लंबे समय से जारी राजनीतिक मतभेद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। ताइवान की मुख्यभूमि मामलों की परिषद (Mainland Affairs Council-MAC) ने चीन की राजनीतिक व्यवस्था और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाथों में सत्ता के बढ़ते केंद्रीकरण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। परिषद के उपमंत्री शेन यू-चुंग ने कहा कि ताइवान और चीन के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी राजनीतिक व्यवस्थाओं का है। उन्होंने दावा किया कि चीन में सत्ता लगातार एक व्यक्ति के नेतृत्व में केंद्रित होती जा रही है, जबकि ताइवान में लोकतांत्रिक चुनाव और खुली राजनीतिक बहस जारी है।शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को ताइपे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शेन यू-चुंग ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की हालिया बैठक और ताइवान में चल रही स्थानीय चुनावी गतिविधियों की तुलना की। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों के बीच भाषा, संस्कृति और ऐतिहासिक संबंध होने के बावजूद उनकी शासन व्यवस्थाओं में बुनियादी अंतर है।शेन के अनुसार, ताइवान में राजनीतिक दल खुलकर बहस करते हैं और जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है। इसके विपरीत चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उन्होंने ताइवान के नागरिकों से लोकतंत्र, स्वतंत्रता और अपनी राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा के लिए एकजुट रहने की अपील की।
कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक पर ताइवान की नजर
ताइवान के अधिकारी ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं केंद्रीय समिति के पांचवें पूर्ण अधिवेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बैठक में पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।शेन यू-चुंग ने दावा किया कि बैठक के फैसलों से शी जिनपिंग की स्थिति और मजबूत हुई है। उनके अनुसार, पार्टी के भीतर शी जिनपिंग की विचारधारा को केंद्रीय मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।उन्होंने कहा कि चीन में आंतरिक अनुशासन और निगरानी के नाम पर पार्टी नेतृत्व की शक्ति बढ़ाई जा रही है। ताइवान के अधिकारी के मुताबिक, इससे स्वतंत्र संस्थागत निगरानी और राजनीतिक असहमति की गुंजाइश सीमित होती है।यह ताइवान सरकार के अधिकारी का राजनीतिक आकलन है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपनी अनुशासन व्यवस्था को भ्रष्टाचार रोकने, प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने का माध्यम बताती है।
33 अधिकारियों को पार्टी से निकालने का मुद्दा उठाया
शेन यू-चुंग ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के 33 अधिकारियों को निष्कासित किए जाने का भी उल्लेख किया। इनमें पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी झांग यूशिया और लियू झेनली शामिल बताए गए हैं।ताइवान के अधिकारी ने आरोप लगाया कि चीन में नेतृत्व की नीतियों से असहमति रखने या पर्याप्त निष्ठा नहीं दिखाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाइयों से शी जिनपिंग के नेतृत्व के सामने मौजूद आंतरिक चुनौतियां कम हुई हैं।हालांकि, चीन में अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारणों और उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती रही हैं। इन सभी कार्रवाइयों को केवल राजनीतिक विरोध समाप्त करने की प्रक्रिया मानना स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं है।
चौथे कार्यकाल की संभावना पर भी टिप्पणी
ताइवान के उपमंत्री ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर हालिया बदलावों से शी जिनपिंग के अगले कार्यकाल का रास्ता आसान हो सकता है।उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 में होने वाली कम्युनिस्ट पार्टी की 21वीं राष्ट्रीय कांग्रेस से पहले शी जिनपिंग अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं।शेन ने यह भी कहा कि पार्टी की हालिया बैठक में अनुपस्थित केंद्रीय समिति के सदस्यों और वैकल्पिक सदस्यों की संख्या माओत्से तुंग के दौर के बाद सबसे अधिक रही।ताइवान के अधिकारी ने इसे चीन की आंतरिक राजनीति में बड़े बदलावों का संकेत बताया। हालांकि, शी जिनपिंग के अगले कार्यकाल के संबंध में कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं हुआ है।
ताइवान ने लोकतांत्रिक चुनावों का दिया उदाहरण
शेन यू-चुंग ने ताइपे और काऊशुंग में चल रही मेयर पद की चुनावी बहसों का उल्लेख करते हुए कहा कि ताइवान की राजनीतिक व्यवस्था में उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को सार्वजनिक रूप से अपनी नीतियों पर चर्चा करने का अवसर मिलता है।उन्होंने कहा कि ऐसी खुली चुनावी बहस चीन की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में संभव नहीं है।ताइवान में 28 नवंबर 2026 को स्थानीय चुनाव होने हैं। इन चुनावों में विभिन्न नगरपालिकाओं और स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों के प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा।शेन के अनुसार, चुनावी बहस और सत्ता के लिए राजनीतिक प्रतिस्पर्धा ताइवान की लोकतांत्रिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
चीन के हस्तक्षेप की आशंका जताई
ताइवान की मुख्यभूमि मामलों की परिषद ने आगामी चुनावों को देखते हुए चीन की गतिविधियों पर निगरानी बनाए रखने की बात कही है।शेन यू-चुंग ने आरोप लगाया कि बीजिंग सूचना अभियानों, राजनीतिक प्रभाव और अन्य तरीकों से ताइवान के समाज को प्रभावित करने का प्रयास करता है।उन्होंने कहा कि ताइवान सरकार कथित चुनावी हस्तक्षेप, भ्रामक सूचना और सामाजिक विभाजन पैदा करने वाली गतिविधियों का मुकाबला करती रहेगी।ताइवान के अधिकारियों ने चीन की ओर से सैन्य दबाव और समुद्री गतिविधियां बढ़ाए जाने पर भी चिंता जताई है।रॉयटर्स की 1 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के तटरक्षक बल ने चीन के जहाजों पर पूर्वी तट के पास समुद्री गतिविधियों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
ताइवान पर चीन का क्या रुख है?
चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और दोनों के एकीकरण को अपना दीर्घकालिक लक्ष्य बताता है। बीजिंग ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है।दूसरी ओर, ताइवान की वर्तमान सरकार का कहना है कि द्वीप का भविष्य वहां की जनता को तय करना चाहिए।ताइवान के विदेश मंत्रालय ने भी हाल के महीनों में दोहराया है कि ताइवान और चीन एक-दूसरे के अधीन नहीं हैं। उसने बीजिंग से ताइवान की लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता की इच्छा का सम्मान करने की मांग की है।
क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है विवाद
चीन और ताइवान के बीच राजनीतिक मतभेद केवल दोनों पक्षों तक सीमित नहीं हैं। ताइवान जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है।इसके अलावा ताइवान वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रमुख भूमिका निभाता है। इसलिए क्षेत्र में किसी भी बड़े तनाव का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और आपूर्ति शृंखलाओं पर पड़ सकता है।ताइवान के अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा के साथ क्षेत्रीय शांति बनाए रखना भी उनकी प्राथमिकता है।फिलहाल शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन की राजनीतिक दिशा और ताइवान की लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच अंतर को लेकर दोनों पक्षों के मतभेद बने हुए हैं। आगामी स्थानीय चुनावों और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की गतिविधियों के बीच ताइवान सरकार की नजर बीजिंग के अगले कदमों पर रहेगी।
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