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रूस से अमेरिका रवाना होगा पहला टैंकर
मॉस्को: रूस से डीजल लेकर एक टैंकर गुरुवार, 22 अक्टूबर को अमेरिका के लिए रवाना होने वाला है। रूसी उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। उनके अनुसार, पहली खेप में लगभग 40 हजार टन डीजल भेजा जाएगा और इसके बाद अन्य खेप भी रवाना की जाएंगी। यह तैयारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच ईंधन आपूर्ति को लेकर बनी सहमति के बाद हो रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में टैंकर के वास्तव में रवाना हो जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस सौदे के संदर्भ में प्रतिबंधों की स्थिति महत्वपूर्ण है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी मूल के डीजल से जुड़े कुछ लेनदेन के लिए अस्थायी अनुमति जारी की है। इसलिए आपूर्ति को प्रतिबंधों का अवैध उल्लंघन बताने के बजाय, अमेरिकी प्रशासन द्वारा दी गई छूट के तहत होने वाला व्यापार कहना अधिक सटीक है। यह अनुमति रूसी डीजल की बिक्री, डिलीवरी, जहाज से उतारने और अमेरिका सहित अन्य बाजारों में आयात से संबंधित है।
अनुबंध अंतिम चरण में, आगे भी भेजी जाएंगी खेप
नोवाक ने सेंट पीटर्सबर्ग में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि डीजल आपूर्ति संबंधी अनुबंधों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने 22 अक्टूबर को पहले टैंकर की रवानगी की योजना बताई। उनके मुताबिक, रूस अपनी उपलब्ध उत्पादन क्षमता के अनुसार अमेरिकी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निर्यात तुरंत पूरी क्षमता पर बहाल नहीं हो रहा है। आगे की आपूर्ति रिफाइनरियों की स्थिति और उनकी उपलब्ध क्षमता के अनुरूप बढ़ाई जाएगी।
टैंकर के नाम, अमेरिका में उसके पहुंचने की निश्चित तारीख और माल उतारने वाले बंदरगाह की विस्तृत जानकारी शुरुआती घोषणा में सामने नहीं आई। ऊर्जा क्षेत्र की रिपोर्ट के अनुसार, खेप रूस के बाल्टिक तट से भेजे जाने की तैयारी है। यह जनवरी 2022 के बाद अमेरिका के लिए इस प्रकार की पहली रूसी डीजल खेप होगी। हालांकि, घोषित रवानगी कार्यक्रम और वास्तविक समुद्री यात्रा अलग चरण हैं; अंतिम स्थिति जहाज के प्रस्थान और आगे की पुष्टि से स्पष्ट होगी।
नौ अक्टूबर की बातचीत के बाद खुला रास्ता
पुतिन और ट्रंप ने नौ अक्टूबर को फोन पर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के बारे में चर्चा की थी। रूसी पक्ष के अनुसार, मॉस्को ने अमेरिका और वैश्विक बाजारों के लिए ईंधन उपलब्ध कराने की तैयारी जताई थी। इसके बाद रूस ने अपने डीजल निर्यात पर लगाई गई रोक हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। यह रोक घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगाई गई थी, क्योंकि रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों से उत्पादन प्रभावित हुआ था। ट्रंप ने समझौते की घोषणा करते हुए शुरुआती चरण में तीन लाख टन डीजल उपलब्ध कराने की बात कही थी। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और आगे दस लाख टन की आपूर्ति का उल्लेख किया गया। ये व्यापक आपूर्ति लक्ष्य हैं, जबकि घोषित पहला टैंकर लगभग 40 हजार टन की खेप से जुड़ा है। इसलिए पहली खेप को पूरे समझौते की तत्काल आपूर्ति के बराबर नहीं माना जा सकता। आगे के लक्ष्य उत्पादन, अनुबंध और परिवहन की व्यवस्था पर निर्भर होंगे।
अमेरिका ने विशेष लाइसेंस से दी अनुमति
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने नौ अक्टूबर को रूस से संबंधित जनरल लाइसेंस संख्या 135 जारी किया। इसके तहत निर्धारित रूस-संबंधी प्रतिबंध नियमों में निषिद्ध रूसी डीजल की बिक्री, आपूर्ति, अनलोडिंग और आयात से जुड़े लेनदेन को सात अप्रैल 2027 की निर्धारित समयसीमा तक अनुमति दी गई है। दस्तावेज में अमेरिका में आयात का भी स्पष्ट उल्लेख है। इससे इस व्यापार के लिए अस्थायी नियामकीय रास्ता उपलब्ध हुआ है। लाइसेंस सभी रूसी वित्तीय गतिविधियों को खुली अनुमति नहीं देता। इसमें रूसी केंद्रीय बैंक, राष्ट्रीय संपदा कोष और वित्त मंत्रालय के अमेरिकी वित्तीय संस्थानों में दर्ज खातों से रकम काटने की अनुमति शामिल नहीं है। इस कारण डीजल व्यापार की छूट को रूस पर लगे सभी प्रतिबंधों की समाप्ति समझना गलत होगा। अनुमति का दायरा ईंधन से संबंधित निर्दिष्ट लेनदेन तक है और उसमें वित्तीय सीमाएं भी मौजूद हैं।
महंगी ऊर्जा के बीच राहत का दावा
अमेरिकी प्रशासन इस समझौते को वैश्विक डीजल आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश बता रहा है। अमेरिका में सितंबर से खुदरा डीजल कीमतें छह डॉलर प्रति गैलन से ऊपर रहने की रिपोर्ट है। महंगे ईंधन का मुद्दा तीन नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बन गया है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का कहना है कि घोषित रूसी आपूर्ति वैश्विक कमी की तुलना में सीमित हो सकती है और इससे कीमतों में बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं मिलती। डीजल की उपलब्धता केवल निर्यात की अनुमति से तय नहीं होती। रूस की रिफाइनरियों की क्षमता, जहाजों की उपलब्धता और ऊंची माल ढुलाई लागत भी समय पर आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। ऊर्जा बाजार की रिपोर्ट के अनुसार, रूस फिलहाल अपने पुराने निर्यात स्तर की ओर लौटने का प्रयास कर रहा है। अक्टूबर में उसकी खेप मिस्र, मोरक्को, तुर्किये और ब्राजील जैसे बाजारों में भी गई हैं। इससे स्पष्ट है कि रूसी निर्यात की बहाली अमेरिका तक सीमित प्रक्रिया नहीं है।
समझौते पर अमेरिका में राजनीतिक सवाल
ट्रंप के फैसले की अमेरिका में दोनों प्रमुख दलों के कुछ सांसदों ने आलोचना की है। उनका तर्क है कि रूसी ऊर्जा व्यापार को राहत देने से मॉस्को को अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है और यूक्रेन युद्ध को लेकर बनाया गया आर्थिक दबाव कमजोर पड़ सकता है। वहीं, प्रशासन का पक्ष है कि अधिक डीजल उपलब्ध होने से अमेरिकी और वैश्विक उपभोक्ताओं को लाभ होगा। इस तरह समझौते पर बहस ईंधन की कीमतों और रूस के खिलाफ विदेश नीति, दोनों से जुड़ी है। बुधवार को अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात में पुतिन ने भी डीजल समझौते का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों में पांच से छह प्रतिशत गिरावट आई। पुतिन ने कई टैंकर तैयार किए जाने और पहली खेप दो से तीन दिनों में निकलने की बात कही, जबकि नोवाक ने गुरुवार की तारीख बताई थी। फिलहाल पहली खेप की वास्तविक रवानगी, उसके भुगतान और आगे की नियमित आपूर्ति पर नजर बनी हुई है।
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