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सुपरमार्केट बने हैकर्स का निशाना, फ्रिज-फ्रीजर सिस्टम हैक कर करोड़ों का नुकसान!
Ratna Netam
2 Nov 2026 9:45 PM IST

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ब्रुसेल्स : यूरोप में साइबर अपराधियों ने अब एक ऐसे क्षेत्र को निशाना बनाया है, जिसका सीधा संबंध आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खाद्य सुरक्षा से है। सात यूरोपीय देशों में सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन और फ्रीजर सिस्टम को निशाना बनाकर साइबर हमले किए जाने की खबरें सामने आई हैं। इन हमलों के कारण कई दुकानों में फ्रिज और फ्रीजर का तापमान अचानक बढ़ गया, जिससे दूध, मांस, मछली, जमे हुए खाद्य पदार्थ और अन्य खराब होने वाली वस्तुओं को नुकसान पहुंचा। कुछ सुपरमार्केट को प्रभावित खाद्य सामग्री बिक्री से हटानी पड़ी, जबकि कई दुकानों में बड़ी मात्रा में सामान फेंकना पड़ा है।रिपोर्टों के मुताबिक, स्वीडन, बेल्जियम, एस्टोनिया, फिनलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड और आयरलैंड में इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने इंटरनेट से जुड़े रेफ्रिजरेशन कंट्रोल सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाकर उनके तापमान और संचालन से संबंधित सेटिंग्स में बदलाव किया। इन घटनाओं ने यूरोप की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था और सुपरमार्केट की डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फ्रिज का तापमान 50 डिग्री तक पहुंचा
इन घटनाओं में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम का तापमान सामान्य ठंडक बनाए रखने के बजाय लगभग 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। स्वीडन के आईसीए सुपरमार्केट की एक शाखा में कर्मचारियों को सुबह पहुंचने पर फ्रीजर में रखा सामान खराब हालत में मिला। स्टोर के मुताबिक, फ्रिज और फ्रीजर की सेटिंग में बदलाव किया गया था, जिसके कारण ठंडक की जगह गर्म हवा निकलने लगी।स्वीडन की आईसीए और कूप (Coop) सुपरमार्केट चेन के कई स्टोर प्रभावित हुए। कूप ने अपने छह स्टोर में रेफ्रिजरेशन संबंधी समस्याओं की पुष्टि की। वहीं आईसीए ने कहा कि उसके सीमित संख्या में स्टोर इस घटना से प्रभावित हुए हैं। कंपनी ने प्रभावित दुकानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने और मामले की जांच शुरू करने की जानकारी दी है।कुछ दुकानों में खाद्य सामग्री को बचाने की कोशिश की गई, लेकिन तापमान में अचानक बढ़ोतरी के कारण कई उत्पादों को फेंकना पड़ा।
बेल्जियम और लक्जमबर्ग में भी प्रभावित हुए स्टोर
बेल्जियम और लक्जमबर्ग में भी कई सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम में गड़बड़ी सामने आई है। डेलहाइज (Delhaize) सुपरमार्केट चेन ने अपने कई दर्जन स्टोर में रेफ्रिजरेशन सिस्टम प्रभावित होने की पुष्टि की। कंपनी के मुताबिक, घटना के कारण प्रभावित दुकानों में ताजा और जमे हुए खाद्य उत्पादों की उपलब्धता अस्थायी रूप से सीमित हो गई।वहीं बेल्जियम में कैरेफोर (Carrefour) ने बताया कि उसके 700 से अधिक स्टोर में से 15 स्टोर इस घटना से प्रभावित हुए हैं। कंपनी ने कहा कि रेफ्रिजरेशन उपकरणों को निशाना बनाया गया, लेकिन कुल मिलाकर प्रभाव सीमित रहा।बेल्जियम की रेफ्रिजरेशन इंस्टॉलेशन कंपनी सबकोबेल के प्रमुख स्टीफन मोएलांस के मुताबिक, कंपनी को अपने प्रबंधन वाले रेफ्रिजरेशन उपकरणों में से करीब 20 यूनिट प्रभावित होने की जानकारी मिली। उन्होंने बताया कि हमलावरों ने उपकरणों को डिफ्रॉस्ट मोड में डाल दिया था। इसके कारण फ्रीजर में ठंडक बनाए रखने की प्रक्रिया बाधित हुई और तापमान बढ़ने लगा।कुछ प्रभावित दुकानों को खाद्य सामग्री हटानी पड़ी। बेल्जियम के एक स्टोर प्रबंधक ने नुकसान का अनुमान लगभग 60 हजार यूरो बताया है। हालांकि, यह किसी एक दुकान का बताया गया अनुमान है, पूरे यूरोप का कुल नुकसान नहीं।
आयरलैंड में 13 सुपरवैलू स्टोर प्रभावित
आयरलैंड में भी इस साइबर घटना का असर देखने को मिला है। देश की प्रमुख सुपरमार्केट चेन सुपरवैलू (SuperValu) के 223 स्टोर में से 13 स्टोर के रेफ्रिजरेशन सिस्टम प्रभावित हुए हैं। कंपनी की मालिक मुसग्रेव (Musgrave) ने साइबर घटना की पुष्टि की है।कंपनी के अनुसार, रेफ्रिजरेशन उपकरणों के एक विशेष मॉडल को निशाना बनाया गया। निगरानी प्रणाली के जरिए समस्या का पता चलते ही तत्काल कदम उठाए गए। प्रभावित दुकानों में रखे ठंडे और जमे हुए खाद्य उत्पादों को एहतियात के तौर पर बिक्री से हटा दिया गया।कंपनी ने कहा कि प्रभावित स्टोर में खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। इस घटना ने यह भी दिखाया है कि सुपरमार्केट में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी उपकरणों की सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
फ्रांस में पहले भी हो चुका है बड़ा साइबर हमला
यूरोप में रेफ्रिजरेशन सिस्टम को निशाना बनाने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 12 अक्टूबर को फ्रांस में इसी तरह का बड़ा साइबर हमला सामने आया था। उस दौरान हमलावरों ने सैकड़ों सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन कंट्रोल सिस्टम को निशाना बनाया था।फ्रांस के वित्त मंत्री रोलां लेस्क्योर ने संसद में बताया था कि देश के लगभग 10 हजार सुपरमार्केट में से करीब 700 इस हमले से प्रभावित हुए थे। इनमें कैरेफोर, इंटरमार्शे, मोनोप्रिक्स और कोऑपरेटिव यू जैसी प्रमुख सुपरमार्केट चेन शामिल थीं।हमले के दौरान कुछ दुकानों के रेफ्रिजरेशन सिस्टम का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इससे बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री खराब हुई। कुछ स्थानों पर उपकरणों के अत्यधिक गर्म होने के कारण आग लगने की घटनाएं भी सामने आई थीं।पेरिस अभियोजन कार्यालय ने इस मामले की जांच के लिए साइबर अपराध इकाई को जिम्मेदारी सौंपी थी। फ्रांस की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी एएनएसएसआई (ANSSI) ने भी रेफ्रिजरेशन सिस्टम के रिमोट कंट्रोल मॉड्यूल में अनधिकृत पहुंच से जुड़े मामलों पर ध्यान दिया था।
पुराने सॉफ्टवेयर और इंटरनेट कनेक्शन बने बड़ी कमजोरी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सुपरमार्केट में रेफ्रिजरेशन सिस्टम को दूर से नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट से जुड़े कंट्रोलर और डिजिटल उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं। इनके जरिए कर्मचारी और तकनीकी विशेषज्ञ तापमान की निगरानी कर सकते हैं तथा जरूरत पड़ने पर सेटिंग में बदलाव कर सकते हैं।लेकिन यदि इन उपकरणों में पुराने सॉफ्टवेयर, कमजोर पासवर्ड या सुरक्षा संबंधी खामियां मौजूद हों, तो साइबर अपराधी उनका फायदा उठा सकते हैं। अक्टूबर में फ्रांस में हुए हमले के बाद सामने आया था कि कुछ रेफ्रिजरेशन कंट्रोलर पुराने थे और उन्हें नियमित सुरक्षा अपडेट नहीं मिल रहे थे।साइबर सुरक्षा कंपनी क्लैरोटी ने भी पहले कुछ रेफ्रिजरेशन कंट्रोल प्लेटफॉर्म में ऐसी कमजोरियों की पहचान की थी, जिनके कारण इंटरनेट से जुड़े उपकरण अनधिकृत पहुंच के जोखिम में आ सकते थे।
अभी तक हमलावरों की पहचान नहीं
इन घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन साइबर हमलों के पीछे कौन है और उनका उद्देश्य क्या है। फिलहाल किसी हैकर समूह ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। साथ ही संबंधित देशों की जांच एजेंसियों की ओर से भी हमलावरों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।यह भी स्पष्ट नहीं है कि नवंबर में सामने आई घटनाएं फ्रांस में अक्टूबर के दौरान हुए साइबर हमले से जुड़ी हैं या इनके पीछे अलग-अलग समूह काम कर रहे हैं।फिलहाल प्रभावित सुपरमार्केट कंपनियां अपने तकनीकी सिस्टम की जांच कर रही हैं और रेफ्रिजरेशन उपकरणों को सुरक्षित बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन घटनाओं ने यूरोप के सामने यह चुनौती खड़ी कर दी है कि डिजिटल तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के दौर में खाद्य आपूर्ति जैसी आवश्यक सेवाओं को साइबर हमलों से कैसे सुरक्षित रखा जाए।
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