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अवैध कारोबार पर उठे सवाल
अररिया: बिहार के अररिया जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में अवैध आरा मिलों के संचालन का मामला सामने आया है। वन विभाग ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए सिकटी प्रखंड के बरदाहा थाना क्षेत्र में दो स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान बिना वैध लाइसेंस संचालित दो आरा मशीनें और दो जनरेटर जब्त किए गए। इस अभियान के बाद इलाके में अवैध रूप से लकड़ी चीरने का कारोबार करने वालों के बीच हड़कंप की स्थिति है।
जानकारी के अनुसार, वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों को बरदाहा थाना क्षेत्र में बिना अनुमति आरा मशीनें संचालित होने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर संयुक्त टीम गठित की गई। इसके बाद बरदाहा बाजार और कॉलेज चौक के आसपास छापेमारी अभियान चलाया गया। अधिकारियों ने मौके पर मशीनों के संचालन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की, लेकिन संचालक वैध लाइसेंस या जरूरी अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सके।
कार्रवाई के दौरान बरदाहा बाजार से 36 इंच की आरा मशीन और एक जनरेटर जब्त किया गया। वहीं कॉलेज रोड चौराहा क्षेत्र से 42 इंच की दूसरी आरा मशीन और एक जनरेटर बरामद किया गया। इस प्रकार कुल दो आरा मशीनों और दो जनरेटरों को जब्त कर वन विभाग के सुपुर्द किया गया। इस अभियान का नेतृत्व एसएसबी की 52वीं वाहिनी सिकटी कंपनी के सहायक कमांडेंट कृष्ण कुमार मीणा, बरदाहा थानाध्यक्ष इम्तियाज खान और वन विभाग के अधिकारी दिनेश प्रसाद यादव ने संयुक्त रूप से किया। कार्रवाई में वन विभाग, पुलिस और एसएसबी के अन्य अधिकारी एवं जवान भी शामिल रहे।
अधिकारियों के मुताबिक, सीमावर्ती इलाके में अवैध रूप से संचालित आरा मशीनों के संबंध में सूचना मिलने के बाद संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया। इसके बाद विशेष अभियान चलाकर मशीनों और अन्य उपकरणों को जब्त किया गया। वन विभाग अब संबंधित संचालकों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।
नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में अवैध लकड़ी कारोबार की आशंका को देखते हुए निगरानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बिना अनुमति संचालित आरा मशीनों के जरिए लकड़ी की खरीद-बिक्री और प्रसंस्करण होने से वन संपदा को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसे में यह जांच करना जरूरी है कि आरा मिलों तक पहुंचने वाली लकड़ी कहां से लाई जा रही थी और उसके परिवहन से जुड़े दस्तावेज वैध थे या नहीं।
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि यदि किसी आरा मिल को पहले सील किया जा चुका है, तो क्या वहां दोबारा मशीनें संचालित की जा रही थीं। हालांकि हालिया छापेमारी की उपलब्ध रिपोर्ट में जब्त की गई दोनों मशीनों के पहले सील होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसी तरह हरे पेड़ों की अवैध कटाई के आरोपों की भी अलग से जांच आवश्यक है। वन विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी दिनेश प्रसाद यादव के अनुसार, आरा मिलों के संचालन की जांच की जा रही है। बिना वैध अनुमति मशीनें संचालित पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभाग की निगरानी आगे भी जारी रहेगी।
वन संरक्षण के लिहाज से यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पेड़ों की अवैध कटाई से पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए अवैध लकड़ी कारोबार की रोकथाम के साथ लकड़ी के स्रोत की जांच भी जरूरी है। फिलहाल जब्त उपकरण वन विभाग के कब्जे में हैं। अधिकारियों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए वन विभाग, पुलिस और एसएसबी के बीच समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
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