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रूस से डीजल डील पर घिरे ट्रंप, बोले- अमेरिकी जनता के लिए सही फैसला

nidhi
13 Oct 2026 6:57 AM IST
रूस से डीजल डील पर घिरे ट्रंप, बोले- अमेरिकी जनता के लिए सही फैसला
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रूस से तेल खरीद पर यू-टर्न!
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ किए गए डीजल आपूर्ति समझौते का बचाव करते हुए कहा है कि उन्होंने अमेरिकी जनता के हित में सही फैसला लिया है। इस समझौते को लेकर अमेरिका में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने भी फैसले पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि रूस से ऊर्जा आयात की अनुमति देने का निर्णय यूक्रेन युद्ध के कारण लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों और कानूनों के खिलाफ है।
सोमवार, 12 अक्टूबर को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर समझौते का समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि यूरोपीय संघ रूस को ऊर्जा खरीद के बदले 250 अरब डॉलर का भुगतान कर चुका है, लेकिन मीडिया इस विषय पर चर्चा नहीं करना चाहता।
ट्रंप ने कहा, "मैंने अमेरिकी लोगों के लिए सही फैसला लिया है। हमेशा अमेरिका प्रथम।" हालांकि, उन्होंने यूरोपीय संघ से जुड़े 250 अरब डॉलर के आंकड़े की समयावधि स्पष्ट नहीं की।
रूस से कितने डीजल की आपूर्ति होगी?
ट्रंप ने 9 अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद डीजल आपूर्ति समझौते की घोषणा की थी। उनके मुताबिक, रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को तत्काल तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल उपलब्ध कराएगा। इसके बाद नवंबर में अतिरिक्त पांच लाख मीट्रिक टन और अगले चरण में दस लाख मीट्रिक टन डीजल उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, इस समझौते के वित्तीय विवरण और आपूर्ति की सभी शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
अमेरिकी सांसदों ने उठाए सवाल
रूस से डीजल खरीदने के फैसले को लेकर अमेरिका में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका ने रूसी ऊर्जा उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाए थे। सांसदों ने सवाल उठाया है कि ऐसे में रूस के साथ नया डीजल समझौता अमेरिकी कानून के अनुरूप कैसे हो सकता है। रिपब्लिकन सीनेटर जेरी मोरन सहित कई सांसदों ने इस फैसले की आलोचना की है। उनका तर्क है कि रूस से ऊर्जा खरीदने पर प्रतिबंधों का प्रभाव कमजोर हो सकता है और मॉस्को को आर्थिक लाभ पहुंच सकता है। छह अमेरिकी सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन से समझौते पर पुनर्विचार करने और अपना निर्णय वापस लेने की मांग भी की है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान अमेरिका
अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतें ट्रंप प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई हैं। ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डीजल महंगा होने से परिवहन, खेती और सामान की ढुलाई की लागत प्रभावित हो रही है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि रूस से डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति से कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि प्रस्तावित आपूर्ति अमेरिकी बाजार की कुल खपत के मुकाबले सीमित है। इसलिए इससे कीमतों में कितनी राहत मिलेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
यूक्रेन ने भी जताई नाराजगी
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रूस पर प्रतिबंधों में ढील देने के अमेरिकी फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि रूस को ऊर्जा निर्यात से होने वाली अतिरिक्त आय उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक सहायता दे सकती है। ट्रंप प्रशासन ने रूसी डीजल के व्यापार से संबंधित प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी है। अमेरिकी वित्त विभाग की ओर से जारी अनुमति अप्रैल 2027 तक प्रभावी रहने की जानकारी सामने आई है।
नवंबर में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव
अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। ऐसे समय में बढ़ती ईंधन कीमतें राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गई हैं। ट्रंप प्रशासन कीमतें कम करने की कोशिश कर रहा है, जबकि विरोधी दल रूस के साथ समझौते की कानूनी और कूटनीतिक वैधता पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल ट्रंप अपने फैसले पर कायम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों के आर्थिक हितों की रक्षा करना है। अब इस समझौते के वास्तविक आर्थिक प्रभाव और अमेरिकी संसद में उठ रहे विरोध पर नजर बनी हुई है।
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