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ट्रंप के फैसले से इजरायल में सियासी भूचाल, अमेरिकी मदद बंद होने पर नेतन्याहू घिरे

Ratna Netam
3 Nov 2026 9:53 PM IST
ट्रंप के फैसले से इजरायल में सियासी भूचाल, अमेरिकी मदद बंद होने पर नेतन्याहू घिरे
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वॉशिंगटन : 3 नवंबर 2026। अमेरिका और इजरायल के संबंधों को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा की कि अमेरिका इस साल के अंत तक इजरायल को दी जाने वाली लगभग 4 अरब डॉलर की वार्षिक सहायता बंद कर देगा। ट्रंप ने कहा कि इजरायल अब आर्थिक रूप से सक्षम देश है और उसे अमेरिकी सहायता की पहले जैसी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ पहले ही सहमति बन चुकी है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सहायता बंद करने का निर्णय किस तरह लागू किया जाएगा, क्योंकि अमेरिका और इजरायल के बीच मौजूदा सैन्य सहायता समझौता 2028 तक प्रभावी है।राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी समाचार चैनल फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम 'फॉक्स एंड फ्रेंड्स' में बातचीत के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से इजरायल को हर साल लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता प्रदान करता रहा है, लेकिन अब इसे समाप्त करने का समय आ गया है।ट्रंप ने कहा कि इजरायल एक समृद्ध देश बन चुका है और अपनी रक्षा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सहायता बंद होने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका भविष्य में इजरायल की मदद नहीं करेगा। जरूरत पड़ने पर अमेरिका अपने सहयोगी देश की सहायता जारी रख सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि इजरायल अपनी आवश्यकता के अनुसार अमेरिकी हथियार खरीद सकता है। उन्होंने अमेरिका की रक्षा उत्पादन क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिकी हथियार दुनिया में सबसे उन्नत हैं और सहयोगी देश इन्हें खरीद सकते हैं।ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के लिए मतदान हो रहा है। इजरायल को दी जाने वालीअमेरिकी सहायता पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी राजनीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है।विशेष रूप से गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका के भीतर इजरायल को दी जाने वाली सैन्य सहायता को लेकर आलोचना बढ़ी है। डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ नेताओं और मतदाताओं ने इस सहायता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी के कुछ समर्थकों के बीच भी विदेशों को दी जाने वाली आर्थिक मदद को लेकर बहस जारी है।ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि इजरायल को मिलने वाली अरबों डॉलर की सहायता का इस्तेमाल उनके राजनीतिक विरोधी रिपब्लिकन पार्टी की आलोचना करने के लिए करते हैं।
उन्होंने मिशिगन के डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद का उल्लेख करते हुए कहा कि इजरायल को सहायता देने का मुद्दा अमेरिकी चुनावी राजनीति में विवाद का कारण बन रहा है।ट्रंप ने संकेत दिया कि आर्थिक रूप से सक्षम देशों को लगातार अमेरिकी सहायता देने की नीति पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।इस घोषणा के बाद इजरायल की घरेलू राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। इजरायल की विपक्षी डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व सैन्य अधिकारी याइर गोलान ने अमेरिकी सहायता समाप्त करने के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की।गोलान ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को निशाने पर लेते हुए कहा कि यह फैसला इजरायल की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे समय में अमेरिकी सहायता समाप्त होने की बात सामने आई है, जब इजरायल का रक्षा खर्च काफी बढ़ चुका है। लंबे समय से जारी संघर्षों के कारण देश को अपने हथियारों के भंडार को फिर से मजबूत करने की जरूरत है।गोलान ने दावा किया कि लगातार सैन्य अभियानों के कारण इजरायल की वायु रक्षा क्षमताओं पर भी दबाव बढ़ा है। ऐसे में अमेरिकी आर्थिक सहायता समाप्त होने से रक्षा जरूरतों का वित्तीय बोझ देश के नागरिकों पर पड़ सकता है।
याइर गोलान ने नेतन्याहू की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों में प्रधानमंत्री को अमेरिकी सहायता बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए था।गोलान ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू की नीतियां इजरायल के सुरक्षा और आर्थिक संकट को और गंभीर बना सकती हैं। हालांकि, यह विपक्षी नेता की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और सहायता समाप्त होने के वास्तविक प्रभाव उसके अंतिम स्वरूप पर निर्भर करेंगे।अमेरिका और इजरायल के बीच सैन्य सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। दोनों देशों के बीच वर्ष 2016 में दस वर्षों के लिए 38 अरब डॉलर की सैन्य सहायता का समझौता हुआ था।इस व्यवस्था के तहत इजरायल को प्रतिवर्ष लगभग 3.8 अरब डॉलर की सहायता देने का प्रावधान है। इसमें 3.3 अरब डॉलर की सैन्य सहायता और करीब 50 करोड़ डॉलर मिसाइल रक्षा कार्यक्रमों के लिए निर्धारित हैं।मौजूदा समझौते की अवधि 2028 में समाप्त होनी है। इसलिए ट्रंप की ओर से 2026 के अंत तक सहायता बंद करने की घोषणा ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सहायता व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव के लिए प्रशासनिक और विधायी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी। अमेरिका में वार्षिक सहायता राशि उपलब्ध कराने में कांग्रेस की भी भूमिका होती है।
इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले भी इजरायल की अमेरिकी सैन्य सहायता पर निर्भरता कम करने की इच्छा व्यक्त कर चुके हैं।नेतन्याहू ने कहा था कि भविष्य में इजरायल को अमेरिकी सहायता प्राप्त करने वाले देश के बजाय अमेरिका के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।हालांकि, उन्होंने सहायता समाप्त करने के लिए लंबी अवधि की योजना का संकेत दिया था। ट्रंप ने अब वर्ष 2026 के अंत तक इसे बंद करने की बात कही है, जो पहले सामने आए संभावित कार्यक्रम की तुलना में काफी जल्दी है।ट्रंप की ताजा घोषणा पर नेतन्याहू कार्यालय की तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। इसलिए दोनों देशों के बीच कथित सहमति की विस्तृत शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं।इस फैसले का प्रभाव केवल इजरायल तक सीमित नहीं रह सकता। अमेरिकी सैन्य सहायता का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी रक्षा कंपनियों से हथियार और उपकरण खरीदने में इस्तेमाल होता है।ऐसे में सहायता बंद होने से भविष्य में दोनों देशों के बीच रक्षा खरीद की व्यवस्था में बदलाव संभव है। हालांकि, यदि इजरायल अपने संसाधनों से अमेरिकी हथियारों की खरीद जारी रखता है, तो रक्षा व्यापार पर पड़ने वाला प्रभाव अलग हो सकता है।पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के बीच यह घोषणा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इजरायल के लिए अमेरिकी सैन्य सहयोग उसकी रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा रहा है। वहीं अमेरिका के लिए भी इजरायल पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन मौजूदा समझौते की अवधि समाप्त होने से पहले सहायता रोकने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करेगा या इस घोषणा के बाद दोनों देश किसी नई रक्षा साझेदारी व्यवस्था पर बातचीत करेंगे।ट्रंप के बयान से यह साफ हो गया है कि अमेरिका इजरायल के साथ अपने आर्थिक और सैन्य संबंधों की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर विचार कर रहा है। हालांकि, 4 अरब डॉलर की सहायता वास्तव में कब और किस प्रक्रिया के तहत बंद होगी, इसकी आधिकारिक स्पष्टता अभी बाकी है।
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