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बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिरों पर हमले
ढाका: बांग्लादेश में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच हिंदू मंदिरों पर हमलों, मूर्तियों को क्षतिग्रस्त करने और अन्य संबंधित हिंसा की 34 घटनाएं सामने आने की जानकारी दी गई है। बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद और महानगर सार्वजनिन पूजा समिति ने इन घटनाओं को लेकर चिंता जताई है। दोनों संगठनों ने प्रशासन से धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा आगे ऐसी घटनाएं रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। यह आंकड़ा संगठनों की ओर से प्रस्तुत किया गया है।
ढाका के ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर परिसर में गुरुवार, 15 अक्टूबर को आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में संगठनों ने अपनी चिंताएं रखीं। बांग्लादेश पूजा उद्यापन परिषद के महासचिव संतोष शर्मा ने बताया कि दुर्गा पूजा से पहले विभिन्न स्थानों से मंदिरों पर हमले, प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने और संबंधित घटनाओं की सूचनाएं मिली हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कई मामलों में कार्रवाई की है और कुल 34 घटनाओं में से 11 मामलों में गिरफ्तारियां हुई हैं। यह संख्या गिरफ्तार व्यक्तियों की नहीं, बल्कि उन मामलों की है जिनमें गिरफ्तारी हुई है।
कई जिलों से मिली घटनाओं की जानकारी
संगठनों के बयान के अनुसार, सिलहट, राजबाड़ी, पंचगढ़, नेत्रकोना और तंगेल समेत कई जिलों में पूजा की तैयारियों के दौरान घटनाएं सामने आई हैं। कहीं प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने की शिकायत मिली, तो कहीं मंदिरों को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई। बयान में फरीदपुर के एक ऐतिहासिक काली मंदिर में चोरी और सुनामगंज में हिंदू समुदाय के घरों, दुकानों तथा मंदिरों पर हमलों और लूटपाट का भी उल्लेख किया गया है। संगठनों ने इन मामलों में जवाबदेही तय करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने पर जोर दिया।
कुछ मामलों में सुरक्षा व्यवस्था की कमियां
संतोष शर्मा ने प्रशासन की कार्रवाई का उल्लेख करने के साथ कुछ पूजा समितियों की सुरक्षा व्यवस्था में कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया। नेत्रकोना की एक घटना का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि रातभर निगरानी रही, लेकिन सुबह करीब पांच बजे घटनास्थल पर कोई पहरेदार मौजूद नहीं था। मंदिर का सीसीटीवी कैमरा भी खराब था। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई की है और अन्य मामलों में भी कदम उठाए गए हैं। उनके अनुसार, सामने आई घटनाओं की गंभीरता एक जैसी नहीं थी।
पूजा के पांच दिन नहीं, पूरे साल सुरक्षा
दोनों संगठनों ने कहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा केवल त्योहार के कुछ दिनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मंदिरों, धार्मिक संपत्तियों और समुदाय के लोगों की सुरक्षा के लिए पूरे साल व्यवस्था जरूरी है। नेताओं ने पुराने हमलों में भी न्याय और जिम्मेदार लोगों को उदाहरण प्रस्तुत करने वाली सजा देने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि स्थायी सुरक्षा के लिए कानून लागू करने के साथ सामाजिक स्तर पर सांप्रदायिक हिंसा का विरोध और सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान भी आवश्यक है।
पूजा समितियों के लिए सुरक्षा निर्देश जारी
पूजा उद्यापन परिषद ने जिला और उपजिला स्तर की इकाइयों के लिए 22 सूत्रीय दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें चौबीसों घंटे स्वयंसेवकों की तैनाती, संभव होने पर सीसीटीवी कैमरे लगाने, पर्याप्त रोशनी और अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था जैसे उपाय शामिल हैं। किसी घटना की सूचना तत्काल अधिकारियों को देने पर भी जोर दिया गया है। परिषद के अनुसार, इस वर्ष देशभर में 33,851 पूजा आयोजन होंगे। इनमें ढाका शहर के 258 आयोजन शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में आयोजनों के बीच स्थानीय समितियों और प्रशासन के समन्वय को अहम माना गया है।
अल्पसंख्यकों के अधिकारों की मांग दोहराई
संगठनों ने अल्पसंख्यक संरक्षण कानून बनाने, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग गठित करने और अल्पसंख्यक मामलों के लिए अलग मंत्रालय स्थापित करने की मांग भी रखी। धार्मिक संस्थानों को समर्पित संपत्तियों की रक्षा तथा भेदभाव रोकने के लिए कानूनी उपायों पर जोर दिया गया। नेताओं ने उम्मीद जताई कि दुर्गा पूजा शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न होगी। उन्होंने सभी समुदायों से सद्भाव बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि त्योहार लोगों को जोड़ने का अवसर बनने चाहिए, जहां श्रद्धालु बिना भय के अपनी धार्मिक परंपराओं का पालन कर सकें।
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