Business बिजनेस : अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर दिया है और अब मानकर चल रहे हैं कि आपका काम पूरा हो गया है, तो एक बार जरूर जांच कर लें कि आपने अपने रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) किया है या नहीं। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार केवल ITR भर देना ही पर्याप्त नहीं होता है। रिटर्न को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए उसका सत्यापन करना भी जरूरी होता है।
कई टैक्सपेयर्स रिटर्न फाइल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करना भूल जाते हैं। ऐसे में उनका दाखिल किया गया ITR अधूरा माना जा सकता है। अगर रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों के भीतर उसका सत्यापन नहीं किया जाता है, तो आयकर विभाग उसे अमान्य (Invalid) मान सकता है। इसका सीधा असर टैक्स रिफंड पर भी पड़ सकता है और रिटर्न की प्रोसेसिंग रुक सकती है।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई नजदीक आ रही है। ऐसे में जिन लोगों ने अपना ITR भर दिया है, लेकिन अभी तक ई-वेरिफिकेशन नहीं किया है, उन्हें जल्द से जल्द यह काम पूरा कर लेना चाहिए। समय पर वेरिफिकेशन न होने से बाद में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पहले आयकर विभाग की ओर से ITR के सत्यापन के लिए 120 दिनों का समय दिया जाता था। लेकिन 1 अगस्त 2022 से नियमों में बदलाव करते हुए इस अवधि को घटाकर केवल 30 दिन कर दिया गया। अब टैक्सपेयर्स को रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के अंदर ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
ई-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया काफी आसान है और इसे ऑनलाइन पूरा किया जा सकता है। इसके लिए टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अपने अकाउंट में लॉगिन करना होता है। इसके बाद ‘ई-वेरिफाई रिटर्न’ विकल्प चुनकर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
ITR वेरिफिकेशन के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। टैक्सपेयर्स आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी के जरिए अपने रिटर्न को वेरिफाई कर सकते हैं। इसके अलावा नेट बैंकिंग, बैंक अकाउंट, डीमैट अकाउंट या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) की मदद से भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्सपेयर्स को ITR फाइल करने के बाद तुरंत ई-वेरिफिकेशन कर लेना चाहिए, ताकि किसी तरह की तकनीकी समस्या या समय सीमा खत्म होने की स्थिति से बचा जा सके। कई बार लोग रिटर्न भरने के बाद वेरिफिकेशन को नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि उनका रिटर्न प्रोसेस ही नहीं हुआ।
अगर किसी कारण से 30 दिनों के अंदर ई-वेरिफिकेशन नहीं हो पाता है, तो टैक्सपेयर्स को आयकर विभाग के नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। इसलिए समय रहते इस जरूरी काम को पूरा करना बेहतर होता है।
ITR भरने वाले सभी लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपने ई-मेल, मोबाइल नंबर और आयकर पोर्टल पर लॉगिन करके रिटर्न की स्थिति जरूर जांच लें। सही समय पर फाइलिंग और वेरिफिकेशन करने से टैक्स रिफंड मिलने में देरी नहीं होती और भविष्य में किसी तरह की परेशानी से भी बचा जा सकता है।