E20 पेट्रोल पर सरकार का स्पष्टीकरण, बोली- माइलेज में थोड़ी कमी संभव लेकिन मिलेंगे कई फायदे

Update: 2026-07-11 09:42 GMT

नई दिल्ली : देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर बढ़ती चर्चाओं और लोगों की चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया कि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिले पेट्रोल का इस्तेमाल करने से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता यानी फ्यूल इकॉनमी में 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, लेकिन इसके कई अन्य फायदे भी हैं।

मंत्रालय ने E20 फ्यूल को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQs) का एक दस्तावेज जारी किया। इसमें सरकार ने दावा किया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल एक स्वच्छ और बेहतर ईंधन विकल्प है, जो पर्यावरण के साथ-साथ इंजन के प्रदर्शन में भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

कुछ वाहनों में माइलेज पर असर

सरकार ने माना कि E20 पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने के कारण कुछ पुराने या ऐसे वाहन जो इसके लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं, उनमें ईंधन दक्षता प्रभावित हो सकती है।

मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा घनत्व कम होता है, जिसके कारण कुछ वाहनों में माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, आधुनिक वाहन जो E20 के अनुरूप बनाए गए हैं, उनमें इसका प्रभाव काफी कम हो सकता है।

बेहतर पिकअप और स्मूद एक्सेलरेशन का दावा

सरकार ने कहा कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से केवल माइलेज ही नहीं, बल्कि वाहन के प्रदर्शन में भी सुधार हो सकता है। मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल में ऑक्टेन संख्या अधिक होती है, जिससे इंजन में बेहतर दहन प्रक्रिया संभव होती है।

इसके कारण वाहन को बेहतर पिकअप, स्मूद एक्सेलरेशन और इंजन के अधिक प्रभावी संचालन में मदद मिल सकती है। सरकार का कहना है कि उच्च गुणवत्ता वाला ईंधन इंजन की कार्यक्षमता को बेहतर बना सकता है।

प्रदूषण कम करने में मदद

केंद्र सरकार ने E20 कार्यक्रम को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा है। मंत्रालय के अनुसार, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलती है।

इथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि इसके इस्तेमाल से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

किसानों को भी फायदा मिलने का दावा

सरकार ने बताया कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना भी है। इथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है।

मंत्रालय ने कहा कि यह योजना कृषि क्षेत्र, ऊर्जा क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण तीनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

E20 को लेकर क्यों उठे सवाल

हाल के दिनों में E20 पेट्रोल को लेकर कई उपभोक्ताओं ने चिंता जताई थी। कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने और पुराने वाहनों पर इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाए थे।

लोगों की इन्हीं चिंताओं को देखते हुए सरकार ने FAQs जारी कर E20 के फायदे और संभावित प्रभावों के बारे में जानकारी दी है।

पुराने और नए वाहनों पर असर

मंत्रालय ने बताया कि नए वाहन E20 ईंधन के अनुरूप बनाए जा रहे हैं। वाहन निर्माता कंपनियों को भी E20 अनुकूल इंजन और तकनीक विकसित करने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, पुराने वाहनों में E20 के उपयोग को लेकर अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं। ऐसे वाहनों में माइलेज या इंजन प्रदर्शन में बदलाव महसूस किया जा सकता है।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

सरकार का कहना है कि E20 कार्यक्रम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में इथेनॉल मिश्रण से विदेशी मुद्रा की बचत और आयात निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकार ने उपभोक्ताओं को दी जानकारी

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि E20 को लेकर सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस ईंधन का उद्देश्य केवल पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना नहीं, बल्कि एक बेहतर, स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा विकल्प तैयार करना है।

मंत्रालय ने कहा कि शुरुआती दौर में कुछ चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन लंबे समय में E20 कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा।

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