मुंबई: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने जमकर बिकवाली की, जिससे भारतीय इक्विटी मार्केट भारी गिरावट के साथ बंद हुए।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से ईरान के साथ अंतरिम समझौते को खत्म करने के ऐलान के बाद बाजार में चिंता बढ़ गई। निवेशकों को आशंका है कि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ सकता है।
सेंसेक्स में 1,677 अंकों की गिरावट
बुधवार के कारोबारी सत्र में BSE Sensex में तेज गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,677.12 अंक यानी 2.15 प्रतिशत गिरकर 76,503.60 के स्तर पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 1,921.69 अंक तक नीचे चला गया था। हालांकि बाद में कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन बाजार गिरावट से उबर नहीं सका।
निफ्टी पर भी दबाव
सेंसेक्स की तरह Nifty 50 पर भी बिकवाली का दबाव रहा। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनाई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता ने घरेलू बाजार की धारणा कमजोर कर दी।
ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादन क्षेत्रों में शामिल है और किसी भी तरह की अस्थिरता का असर कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है।
खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां किसी भी तरह की बाधा से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों पर नजर
बाजार में आशंका है कि अगर तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए इसका सीधा असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।
इसी वजह से निवेशकों ने बुधवार को सतर्क रुख अपनाया और कई क्षेत्रों के शेयरों में बिकवाली की।
ज्यादातर सेक्टर में गिरावट
बुधवार के कारोबार में बैंकिंग, ऑटो, आईटी, मेटल और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में निवेशक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं।
वैश्विक बाजारों पर भी असर
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण केवल भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई वित्तीय बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
भू-राजनीतिक तनाव के समय आमतौर पर निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका असर शेयर बाजारों पर दबाव के रूप में दिखाई देता है।
निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और निवेश के फैसले कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन को ध्यान में रखकर लेने चाहिए।
उन्होंने कहा कि लंबे समय के निवेशकों के लिए बाजार की गिरावट अवसर भी दे सकती है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रखना जरूरी है।
आगे बाजार की दिशा पर रहेगी नजर
अब निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों में होने वाले अगले घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों की चाल पर रहेगी।
अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो बाजार में सुधार की संभावना बन सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने की स्थिति में शेयर बाजारों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।