RBI ने जताई वित्तीय स्थिरता और डिजिटल संपत्तियों के जोखिमों पर चिंता

Update: 2026-07-08 12:30 GMT

नई दिल्ली: भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार और केंद्रीय बैंक का रुख एक बार फिर चर्चा में है। रॉयटर्स द्वारा समीक्षा किए गए सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने निजी तौर पर जारी डिजिटल संपत्तियों से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जताते हुए ऐसी नीति का समर्थन किया है, जो क्रिप्टोकरेंसी पर सख्त नियंत्रण या प्रतिबंध की दिशा में जाती है।

दस्तावेजों के आधार पर सामने आई जानकारी के अनुसार, केंद्रीय बैंक का मानना है कि व्यापक स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी को अपनाने से वित्तीय स्थिरता, मौद्रिक नीति और देश की आर्थिक संप्रभुता पर असर पड़ सकता है।

क्रिप्टो पर RBI की चिंताएं

RBI लंबे समय से निजी डिजिटल मुद्राओं को लेकर सावधानी बरतता रहा है। केंद्रीय बैंक का तर्क है कि बिटकॉइन, ईथर जैसी निजी क्रिप्टोकरेंसी किसी केंद्रीय संस्था द्वारा नियंत्रित नहीं होती हैं और इनके मूल्य में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

RBI का मानना है कि यदि इन डिजिटल संपत्तियों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर बढ़ता है तो यह पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था और मौद्रिक नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है।

केंद्रीय बैंक ने पहले भी कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे जोखिमों को बढ़ा सकता है।

भारत में अभी स्पष्ट कानून नहीं

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अभी तक कोई अंतिम नीति या व्यापक कानूनी ढांचा लागू नहीं किया गया है। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के लिए टैक्स व्यवस्था तो लागू की गई है, लेकिन इनके नियमन या प्रतिबंध को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है।

इस कारण भारत में क्रिप्टो उद्योग लंबे समय से एक नियामक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।

सरकार और विभिन्न एजेंसियां इस क्षेत्र पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों के आधार पर नीति तैयार करने की कोशिश कर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी पहुंच

भारत में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कारोबार को उस समय राहत मिली थी जब Supreme Court of India ने वर्ष 2018 में RBI के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें बैंकों को क्रिप्टो से जुड़े कारोबार और सेवाओं से दूरी बनाने के लिए कहा गया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत में क्रिप्टो एक्सचेंज और डिजिटल एसेट ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म दोबारा सक्रिय हुए।

हालांकि, इसके बाद भी RBI ने निजी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी चिंताएं लगातार व्यक्त की हैं।

सरकार एजेंसियां भी सतर्क

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी एजेंसियां भी क्रिप्टोकरेंसी को व्यापक रूप से स्वीकार करने को लेकर सतर्क हैं।

अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल संपत्तियों को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले वित्तीय प्रणाली पर इसके प्रभाव, निवेशकों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता जैसे पहलुओं का ध्यान रखना जरूरी है।

भारत सरकार ने अभी तक क्रिप्टोकरेंसी को पूरी तरह कानूनी मुद्रा का दर्जा नहीं दिया है। वहीं, डिजिटल रुपया जैसे केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को बढ़ावा दिया जा रहा है।

डिजिटल रुपये पर RBI का फोकस

निजी क्रिप्टोकरेंसी के विपरीत RBI द्वारा जारी डिजिटल रुपया एक आधिकारिक डिजिटल मुद्रा है, जिसे केंद्रीय बैंक नियंत्रित करता है।

RBI का मानना है कि डिजिटल रुपया सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत कर सकता है।

केंद्रीय बैंक निजी क्रिप्टोकरेंसी की तुलना में CBDC को ज्यादा भरोसेमंद विकल्प के रूप में देखता है।

क्रिप्टो उद्योग की अलग राय

वहीं, क्रिप्टो उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय स्पष्ट नियम और निगरानी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

उद्योग का तर्क है कि उचित नियमन के जरिए निवेशकों को सुरक्षा दी जा सकती है और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है।

क्रिप्टो समर्थकों का कहना है कि दुनिया के कई देश डिजिटल संपत्तियों के लिए नियम बना रहे हैं, इसलिए भारत को भी संतुलित नीति अपनानी चाहिए।

आगे की नीति पर नजर

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है। RBI की चिंताओं और सरकारी एजेंसियों की सतर्कता को देखते हुए आने वाले समय में इस क्षेत्र के लिए सख्त नियमों की संभावना बनी हुई है।

फिलहाल सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह वित्तीय सुरक्षा, निवेशकों के हित और डिजिटल नवाचार के बीच संतुलन बनाते हुए नीति तैयार करे। क्रिप्टोकरेंसी पर भारत का अंतिम रुख आने वाले महीनों में स्पष्ट हो सकता है।

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