JP Associates की कंपनी बिकी, 87 साल पुरानी फर्म ने जीती बोली

Update: 2026-07-28 14:32 GMT

नई दिल्ली। कर्ज के संकट से जूझ रहे जेपी ग्रुप की एक और कंपनी दिवालिया प्रक्रिया के तहत बिकने जा रही है। इस बार जेपी ग्रुप की भिलाई जेपी सीमेंट लिमिटेड (BJCL) को खरीदने की बोली 87 साल पुराने डालमिया ग्रुप ने जीती है। डालमिया भारत लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड (DCBL) को भिलाई जेपी सीमेंट के अधिग्रहण के लिए सफल समाधान आवेदक चुना गया है। कंपनी के रेजोल्यूशन प्लान को कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने मंजूरी दे दी है।

यह अधिग्रहण इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत चल रही कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के माध्यम से किया जा रहा है। रेजोल्यूशन प्रोफेशनल की ओर से 28 जुलाई 2026 को डालमिया सीमेंट को लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) भी जारी कर दिया गया है। हालांकि, सौदे को अंतिम रूप देने के लिए अभी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), कटक और अन्य नियामक संस्थाओं की मंजूरी मिलना बाकी है।

जेपी ग्रुप की भिलाई जेपी सीमेंट के अधिग्रहण से डालमिया भारत की सीमेंट सेक्टर में पकड़ और मजबूत होगी। कंपनी पहले ही देश के कई हिस्सों में अपना कारोबार बढ़ा रही है। इस सौदे के बाद मध्य और पूर्वी भारत के बाजारों में उसकी उत्पादन क्षमता और पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

भिलाई जेपी सीमेंट लिमिटेड के पास छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में महत्वपूर्ण उत्पादन इकाइयां हैं। कंपनी के पास छत्तीसगढ़ के भिलाई में 2.2 मिलियन टन प्रति वर्ष (MnTPA) क्षमता वाला ग्राइंडिंग यूनिट है। वहीं मध्य प्रदेश के बाबूपुर में 1.1 मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाला क्लिंकर यूनिट मौजूद है। इन दोनों इकाइयों के शामिल होने से डालमिया भारत की कुल उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।

जेपी ग्रुप की मुश्किलों का सिलसिला पिछले कुछ वर्षों से जारी है। जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड भी दिवाला प्रक्रिया से गुजरने के बाद पिछले साल अदाणी ग्रुप के हाथों गई थी। जेपी ग्रुप की कई कंपनियां भारी कर्ज और वित्तीय दबाव के कारण संकट में फंसी हुई हैं। अब भिलाई जेपी सीमेंट का अधिग्रहण भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

गौरतलब है कि भिलाई जेपी सीमेंट वही कंपनी है जिसने पहले अदाणी ग्रुप से जेपी एसोसिएट्स के मध्य प्रदेश स्थित रीवा और उत्तर प्रदेश के चुर्क व चुनार सीमेंट प्लांट खरीदे थे। अब यही कंपनी खुद दिवाला प्रक्रिया के तहत डालमिया ग्रुप के हाथों जाने वाली है।

डालमिया भारत ने भारतीय सीमेंट उद्योग में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार विस्तार की रणनीति अपनाई है। कंपनी का मानना है कि भिलाई जेपी सीमेंट के जुड़ने से उसे नए बाजारों में पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। खासकर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों में कंपनी की मौजूदगी बढ़ेगी।

सीमेंट सेक्टर में बढ़ती मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के विस्तार को देखते हुए कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। डालमिया भारत का यह अधिग्रहण भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

वहीं, दिवाला प्रक्रिया के तहत कंपनियों की बिक्री से बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी राहत मिलने की उम्मीद रहती है। कर्जदाताओं की मंजूरी के बाद अब अंतिम निर्णय एनसीएलटी और संबंधित नियामक संस्थाओं की मंजूरी पर निर्भर करेगा।

भिलाई जेपी सीमेंट के अधिग्रहण से जहां डालमिया भारत को कारोबार विस्तार का मौका मिलेगा, वहीं जेपी ग्रुप की एक और कंपनी का स्वामित्व बदल जाएगा। भारतीय कॉरपोरेट जगत में यह सौदा एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

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