TRAI का बड़ा फैसला यूटिलिटी कूरियर और लॉजिस्टिक्स कॉल के लिए शुरू हुई 1601 नंबर सीरीज
अब यूटिलिटी और कूरियर कंपनियों की कॉल आएगी 1601 नंबर से TRAI ने शुरू की नई सीरीज
नई दिल्ली: टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने यूटिलिटी, कूरियर और लॉजिस्टिक्स जैसी सेवाओं से जुड़ी ट्रांजैक्शनल और सर्विस कॉल्स के लिए 1601 नंबर सीरीज़ शुरू की है। इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों के लिए सेवा से जुड़ी वास्तविक कॉल्स की पहचान आसान बनाना और अनचाही या संदिग्ध कॉल्स से अलग करना है।
1601 सीरीज़ क्यों शुरू की गई?
मोबाइल यूजर्स को अक्सर बैंकिंग, डिलीवरी, बिल भुगतान, बुकिंग और दूसरी सेवाओं से संबंधित कॉल्स आती हैं। ऐसे में सामान्य मोबाइल नंबर और सेवा से जुड़ी कॉल के बीच अंतर करना कई बार मुश्किल हो जाता है।
1601 नंबर सीरीज़ के जरिए अलग-अलग सेवा प्रदाताओं की महत्वपूर्ण सर्विस कॉल्स को एक अलग पहचान देने की कोशिश की गई है।
किन क्षेत्रों में होगा इस्तेमाल?
नई नंबर सीरीज़ का इस्तेमाल मुख्य रूप से यूटिलिटी, कूरियर और लॉजिस्टिक्स जैसी सेवाओं से जुड़ी कॉल्स के लिए किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर इनमें बिजली-पानी जैसी यूटिलिटी सेवाओं से संबंधित कॉल, पार्सल या डिलीवरी की जानकारी और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी ग्राहक सेवा कॉल शामिल हो सकती हैं।
ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
नई सीरीज़ का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि ग्राहक सेवा से जुड़ी वैध कॉल्स को पहचानना आसान होगा।
इससे उपभोक्ताओं को किसी अनजान सामान्य मोबाइल नंबर से आने वाली कॉल और सेवा प्रदाता की आधिकारिक सर्विस कॉल के बीच अंतर करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, किसी भी नंबर सीरीज़ को देखकर व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।
स्पैम और फ्रॉड कॉल्स पर भी नजर
TRAI लंबे समय से स्पैम कॉल्स और अनचाहे कमर्शियल कम्युनिकेशन को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाता रहा है। अलग-अलग तरह की कॉल्स के लिए विशिष्ट नंबर सीरीज़ निर्धारित करना इसी दिशा में एक कदम माना जा सकता है।
ग्राहकों को फिर भी OTP, PIN, पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या अन्य संवेदनशील विवरण फोन पर साझा नहीं करने चाहिए।
1601 सीरीज़ से जुड़े नियम
1601 नंबर सीरीज़ का इस्तेमाल सेवा और लेनदेन से संबंधित संचार के लिए निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य ग्राहकों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने वाले संचार को एक अलग पहचान देना है। यह व्यवस्था टेलीकॉम ऑपरेटरों और सेवा प्रदाताओं के लिए भी कॉलिंग सिस्टम को व्यवस्थित करने में मदद कर सकती है।