मध्य-पूर्व तनाव से बढ़ी समुद्री लागत, भारत के क्रूड आयात पर दबाव

Update: 2026-07-23 15:33 GMT

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार पर दिखाई देने लगा है। खाड़ी क्षेत्र के शिपिंग मार्गों पर संचालित जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ उच्च जोखिम वाले समुद्री मार्गों पर बीमा प्रीमियम में पिछले कुछ महीनों में 200 से 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ मामलों में यह वृद्धि 1,000 प्रतिशत से भी अधिक पहुंच गई है।

इक्विरस रैगनॉल इंश्योरेंस ब्रोकिंग की ओर से जारी विश्लेषण में बताया गया कि पश्चिम एशिया में अस्थिर सुरक्षा हालात के कारण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ गया है। इसके चलते बीमा कंपनियों ने जहाजों के लिए युद्ध जोखिम कवर की दरों में बड़ा इजाफा किया है। खासतौर पर उन मार्गों पर, जहां संघर्ष या हमले का खतरा अधिक माना जा रहा है, वहां जहाज संचालकों को पहले की तुलना में कई गुना ज्यादा प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक जोखिम वाले समुद्री मार्गों के लिए बीमा प्रीमियम पहले जहाज के कुल मूल्य का लगभग 0.2 से 0.5 प्रतिशत तक होता था। अब यह बढ़कर 3 से 5 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर समुद्री परिवहन की लागत पर पड़ रहा है और इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है।

शिपिंग उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं का परिवहन किया जाता है। ऐसे में सुरक्षा जोखिम बढ़ने से जहाज कंपनियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।

बीमा प्रीमियम बढ़ने के साथ जहाज संचालकों के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्हें न केवल अधिक बीमा लागत का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था, मार्ग परिवर्तन और संचालन खर्च में भी वृद्धि हो रही है। कई कंपनियां जोखिम कम करने के लिए वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर विचार कर रही हैं, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर ऊर्जा बाजार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। समुद्री परिवहन की लागत बढ़ने से इसका असर विभिन्न देशों में आयात-निर्यात गतिविधियों और उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि बीमा बाजार भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति तेजी से प्रतिक्रिया करता है। जैसे-जैसे किसी क्षेत्र में सुरक्षा खतरा बढ़ता है, वैसे ही जहाजों और कार्गो के लिए जोखिम कवरेज महंगा हो जाता है।

फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में संचालित शिपिंग कंपनियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता आने वाले समय में वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।

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