नई दिल्ली। अगर आप अपना खुद का कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की एक योजना आपके लिए अच्छा अवसर साबित हो सकती है। बीआईएस ने देश में नए गोल्ड असेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर खोलने के लिए इच्छुक उद्यमियों, निजी कंपनियों और सरकारी संस्थाओं से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस योजना के तहत पात्र आवेदकों को मशीनरी और उपकरणों की लागत पर 30 प्रतिशत से लेकर 75 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 18 नवंबर 2026 बताई गई है।
बीआईएस ने गोल्ड असेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर स्थापित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इसका उद्देश्य उन जिलों में सोने की शुद्धता जांचने और हॉलमार्किंग की सुविधाएं बढ़ाना है, जहां फिलहाल ऐसे केंद्र उपलब्ध नहीं हैं। इससे ज्वैलरी कारोबारियों को भी सुविधा मिलेगी और उपभोक्ताओं को सोने की शुद्धता की विश्वसनीय जांच कराने में मदद मिलेगी।
क्या है गोल्ड हॉलमार्किंग सेंटर का कारोबार?
गोल्ड हॉलमार्किंग सेंटर एक विशेष जांच केंद्र होता है, जहां सोने के आभूषणों और अन्य निर्धारित वस्तुओं की शुद्धता की जांच की जाती है।
इन केंद्रों को असेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर यानी एएचसी कहा जाता है।
इनका प्रमुख काम आभूषणों की शुद्धता निर्धारित करना और भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों के अनुसार उपयुक्त आभूषणों पर हॉलमार्क लगाना है।
हॉलमार्किंग के जरिए ग्राहकों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि उन्होंने जो सोना खरीदा है, वह घोषित शुद्धता के अनुरूप है।
देश में हॉलमार्किंग की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बीआईएस नए केंद्रों की स्थापना को प्रोत्साहित कर रहा है।
सरकार देगी 75 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता वित्तीय सहायता है। हालांकि, सभी आवेदकों को 75 प्रतिशत सहायता नहीं मिलेगी।
बीआईएस ने आवेदक की श्रेणी और केंद्र की लोकेशन के आधार पर अलग-अलग सहायता दरें निर्धारित की हैं।
आवेदक की श्रेणी सामान्य क्षेत्र पूर्वोत्तर, विशेष श्रेणी और ग्रामीण क्षेत्र
निजी उद्यमी या निजी संस्था 30% 50%
सरकारी संस्था या सार्वजनिक उपक्रम 50% 75%
यह सहायता मशीनरी और उपकरणों की पात्र लागत के आधार पर दी जाएगी। जमीन, भवन और अन्य सभी खर्चों पर समान प्रतिशत सहायता मिलने का प्रावधान नहीं है।
इसलिए आवेदन करने से पहले उद्यमियों को परियोजना की कुल लागत और पात्र खर्चों का अलग-अलग आकलन करना चाहिए।
कौन खोल सकता है हॉलमार्किंग सेंटर?
बीआईएस की योजना के तहत कई श्रेणियों के आवेदक हिस्सा ले सकते हैं।
इनमें केंद्र सरकार और राज्य सरकार की संस्थाएं, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, प्रतिष्ठित सरकारी तथा निजी प्रयोगशालाएं, निजी कंपनियां और पात्र उद्यमी शामिल हैं।
हालांकि, आवेदन करने वाले केंद्र या उसके प्रमोटरों का आभूषण व्यापार अथवा आभूषण निर्माण से हितों का टकराव नहीं होना चाहिए।
इस शर्त का उद्देश्य हॉलमार्किंग जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना है।
आवेदकों को बीआईएस के निर्धारित नियमों और तकनीकी मानकों का पालन करना भी जरूरी होगा।
केवल इन जिलों में मिलेगी सहायता
बीआईएस की वित्तीय सहायता योजना का लाभ देश के सभी जिलों में नए केंद्र खोलने के लिए नहीं मिलेगा।
योजना के अनुसार, वित्तीय सहायता के लिए ऐसे जिले का चुनाव करना होगा, जहां पहले से कोई मान्यता प्राप्त असेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर मौजूद नहीं है।
इसमें बिना सरकारी सहायता से स्थापित केंद्र भी शामिल हैं।
यदि किसी जिले में पहले से हॉलमार्किंग सेंटर मौजूद है, तो वहां नया केंद्र खोलने पर इस विशेष योजना के तहत वित्तीय सहायता नहीं मिल सकती।
आवेदकों को पहले बीआईएस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध केंद्रों की सूची जांच लेनी चाहिए।
आवेदन करने के लिए कितनी फीस लगेगी?
गोल्ड हॉलमार्किंग सेंटर की वित्तीय सहायता योजना में आवेदन करने के लिए 1,000 रुपये की प्रोसेसिंग फीस निर्धारित की गई है।
इसके अलावा लागू जीएसटी का भुगतान करना होगा।
आवेदन के लिए निर्धारित फॉर्म भरना आवश्यक है। इसके साथ पात्रता, प्रस्तावित स्थान और परियोजना से संबंधित जरूरी विवरण उपलब्ध कराने होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, आवेदन फॉर्म सीलबंद लिफाफे में बीआईएस के हॉलमार्किंग विभाग को भेजना होगा।
आवेदन की अंतिम तारीख 18 नवंबर 2026 बताई गई है। इच्छुक आवेदक समयसीमा और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी बीआईएस की आधिकारिक वेबसाइट bis.gov.in पर देख सकते हैं।
सेंटर खोलने में कितना खर्च आएगा?
हॉलमार्किंग सेंटर स्थापित करने के लिए विशेष मशीनों, प्रयोगशाला उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है।इन केंद्रों में सोने की शुद्धता जांचने के लिए एक्सआरएफ मशीन, परीक्षण उपकरण और अन्य प्रयोगशाला सुविधाएं इस्तेमाल की जाती हैं।इसके अलावा सुरक्षित परिसर, बिजली की व्यवस्था, रिकॉर्ड प्रबंधन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली भी जरूरी होती है।कुल निवेश केंद्र के आकार, स्थान, उपकरणों की क्षमता और प्रयोगशाला की सुविधाओं पर निर्भर करेगा।
उदाहरण के लिए, यदि पात्र मशीनरी और उपकरणों की लागत 40 लाख रुपये है और निजी आवेदक को 50 प्रतिशत सहायता मिलती है, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार अधिकतम 20 लाख रुपये की सहायता बन सकती है।हालांकि, यह केवल गणना का उदाहरण है। वास्तविक सहायता बीआईएस की स्वीकृति और योजना की शर्तों पर निर्भर करेगी।
हॉलमार्किंग सेंटर से कितनी कमाई होगी?
हॉलमार्किंग सेंटर की कमाई मुख्य रूप से जांच और हॉलमार्किंग सेवाओं से प्राप्त शुल्क पर निर्भर करती है।सितंबर 2026 में जारी संशोधित नियमों के अनुसार, सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग का शुल्क 75 रुपये प्रति वस्तु निर्धारित किया गया है। एक खेप पर न्यूनतम 200 रुपये का शुल्क लागू है।इसके अलावा केंद्र द्वारा बीआईएस को देय निर्धारित शुल्क और लागू करों का भी ध्यान रखना होगा।
यदि किसी सेंटर पर रोजाना 200 सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग होती है, तो 75 रुपये प्रति वस्तु के आधार पर एक दिन की सकल बिलिंग 15,000 रुपये होगी।महीने में 25 कार्यदिवस मानने पर यह राशि लगभग 3.75 लाख रुपये हो सकती है।हालांकि, यह लाभ नहीं बल्कि संभावित सकल राजस्व का उदाहरण है। इसमें कर्मचारियों का वेतन, बिजली, किराया, उपकरणों का रखरखाव, परीक्षण खर्च, कर और अन्य खर्च घटाने होंगे।
बीआईएस से मान्यता लेना होगा जरूरी
सेंटर खोलने के लिए केवल मशीनरी खरीदना पर्याप्त नहीं होगा। केंद्र को भारतीय मानक IS 15820 के अनुसार आवश्यक ढांचा और गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली तैयार करनी होगी।इसके बाद बीआईएस से मान्यता प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।बीआईएस द्वारा निर्धारित निरीक्षण और तकनीकी जांच के बाद पात्र केंद्र को मान्यता दी जाती है।केंद्र में प्रशिक्षित कर्मचारियों तथा विश्वसनीय जांच उपकरणों की उपलब्धता आवश्यक है।
कारोबार शुरू करने से पहले करें पूरी तैयारी
हॉलमार्किंग सेंटर खोलने के इच्छुक उद्यमियों को संबंधित जिले में आभूषण कारोबारियों की संख्या और जांच सेवाओं की मांग का आकलन करना चाहिए।इसके अलावा मशीनरी की लागत, संचालन खर्च, कर्मचारियों की उपलब्धता और प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखकर विस्तृत कारोबारी योजना तैयार करना बेहतर होगा।