मुंबई: शुक्रवार को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क लगातार चौथे सत्र में भी गिरावट के साथ बंद हुए। भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से निवेशकों का मनोबल प्रभावित हुआ और पूरे बाजार में जोखिम से बचने (रिस्क-ऑफ) का माहौल देखने को मिला।
सेंसेक्स 125.56 अंक (0.17%) गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 87.65 अंक (0.39%) की गिरावट के साथ 22,600.00 पर बंद हुआ।
निफ्टी के तकनीकी आउटलुक पर विशेषज्ञों का कहना है कि दिन के निचले स्तर से आई रिकवरी यह दर्शाती है कि 22,400–22,500 के स्तर के आसपास मांग मौजूद है, लेकिन 22,600 पर क्लोजिंग अभी भी कमजोर बनी हुई है।
विश्लेषकों ने कहा, "अगर निफ्टी 22,500 के स्तर को बनाए रखता है, तो इसमें 22,800–22,900 की ओर एक बाउंसबैक (सुधार) देखने को मिल सकता है। लेकिन अगर यह स्तर टूटता है, तो सूचकांक 22,300 और 22,200 तक गिर सकता है। केवल 22,900 के ऊपर लगातार क्लोजिंग मिलने पर ही यह माना जा सकता है कि मौजूदा गिरावट स्थिर होने लगी है।"
पूरे बाजार में बिकवाली का दबाव दिखा, जिसमें मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में मुख्य सूचकांकों की तुलना में कहीं अधिक गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 2.21% की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.94% गिर गया।
निफ्टी में शामिल शेयरों में श्रीराम फाइनेंस और जेएसडब्ल्यू स्टील सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयर रहे, जिन्होंने बेंचमार्क को नीचे खींचने का काम किया। मेटल और फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी ने भी बाजार के सुस्त प्रदर्शन में योगदान दिया।
सेक्टर के लिहाज से देखें तो मेटल, रियल्टी और पब्लिक सेक्टर बैंकिंग शेयरों पर बिकवाली की सबसे ज्यादा मार पड़ी। निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स दिन के सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सूचकांक रहे, क्योंकि निवेशकों ने आर्थिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से अपना निवेश कम कर दिया।
इसके विपरीत, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर ने अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई। निफ्टी IT इंडेक्स ने अन्य सेक्टरल इंडेक्स के मुकाबले सबसे कम नुकसान दर्ज किया, जिससे व्यापक बाजार को कुछ सहारा मिला।
जानकारों का कहना है कि पूरे सत्र के दौरान बाजार के प्रतिभागी सतर्क रहे। भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण जोखिम लेने की इच्छा कम हो गई, जिसका असर यह हुआ कि शेयरों से जुड़ी खास खबरों का महत्व दब गया और निवेशक बाजार से दूर रहे।
विश्लेषकों ने कहा, "आगे चलकर, महंगाई के रुझान और महंगाई तथा विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रमुख केंद्रीय बैंकों के कदम बाजार की दिशा तय करने में अहम होंगे। ऐसे माहौल में, हमें उम्मीद है कि शेयरों और सेक्टर से जुड़े मौकों का बोलबाला रहेगा, जहां कमाई की स्पष्टता और वैल्युएशन का सही स्तर मुख्य अंतर पैदा करने वाले कारक होंगे।"