नई दिल्ली। देश में निष्क्रिय एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड खातों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच ऐसे खातों की संख्या में करीब 84 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने राज्यसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि नौकरी छोड़ने के बाद कर्मचारियों द्वारा अपनी भविष्य निधि की राशि निकालने या दूसरे खाते में स्थानांतरित करने के लिए दावा नहीं करना इसका प्रमुख कारण है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में निष्क्रिय EPF खातों की संख्या 11,72,923 थी। वित्त वर्ष 2021-22 में यह बढ़कर 13,41,848 और 2022-23 में 17,44,518 हो गई। वित्त वर्ष 2023-24 तक इन खातों की संख्या 21,55,387 पहुंच गई। इस तरह चार वित्तीय वर्षों में करीब 9.82 लाख निष्क्रिय खाते बढ़े।
इन खातों में जमा राशि में भी बड़ी वृद्धि हुई है। वर्ष 2020-21 में निष्क्रिय खातों में 3,930.85 करोड़ रुपये जमा थे, जो 2021-22 में बढ़कर 4,962.70 करोड़ रुपये हो गए। वर्ष 2022-23 में यह राशि 6,804.88 करोड़ रुपये और 2023-24 में 8,505.23 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। चार वर्षों में इन खातों में पड़ी राशि करीब 116 प्रतिशत बढ़ी है।
प्रति निष्क्रिय खाते में जमा औसत राशि भी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2020-21 में प्रत्येक ऐसे खाते में औसतन 33,513 रुपये जमा थे। वित्त वर्ष 2023-24 में यह रकम बढ़कर 39,460 रुपये हो गई। चार साल में औसत रकम में लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि खातों से सेटल की गई कुल रकम 2020-21 के 1,855.55 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 2,632.29 करोड़ रुपये हुई, लेकिन कुल उपलब्ध बैलेंस की तुलना में सेटलमेंट का अनुपात घटा है। वर्ष 2020-21 में उपलब्ध राशि का करीब 47 प्रतिशत सेटल हुआ था, जबकि 2023-24 में यह अनुपात लगभग 31 प्रतिशत रह गया। वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में 2023-24 में सेटल की गई रकम में भी मामूली गिरावट आई है।
राज्यसभा सांसद नीरज डांगी ने सरकार से वित्त वर्ष 2020-21 से निष्क्रिय EPF खातों की संख्या, उनमें जमा रकम और सेटल किए गए दावों की जानकारी मांगी थी। उन्होंने इन खातों की संख्या में वृद्धि के कारणों और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में भी सवाल किया था।
मंत्री ने बताया कि नौकरी छोड़ने के बाद कई कर्मचारी न तो अपनी EPF राशि निकालते हैं और न ही उसे नए नियोक्ता से जुड़े खाते में स्थानांतरित कराते हैं। इसके कारण पुराना खाता निष्क्रिय श्रेणी में चला जाता है। इसके अलावा KYC अपडेट और आधार सीडिंग अभियान के दौरान कई ऐसे खातों की पहचान हुई, जिन्हें सदस्य की जन्मतिथि जैसी जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले निष्क्रिय श्रेणी में नहीं रखा गया था।
सरकार ने KYC विवरण और उसकी वर्तमान स्थिति के आधार पर बिना दावा वाली रकम से जुड़े निष्क्रिय खातों की पहचान तथा वर्गीकरण शुरू किया है। संशोधित EPF योजना 2026 में पात्र दावों को स्वतः शुरू करने का प्रावधान शामिल किया गया है। इसके माध्यम से जमा रकम को सदस्य के आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे भेजने की प्रक्रिया आसान बनाने का लक्ष्य है।