नई दिल्ली :  केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आयोग का औपचारिक गठन किया था और इसे अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस हिसाब से आयोग को मई 2027 तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। आयोग के गठन के करीब नौ महीने पूरे हो चुके हैं और अब उसके पास लगभग नौ महीने का समय शेष है। ऐसे में कर्मचारियों के बीच सवाल उठ रहा है कि यदि आयोग निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं दे पाया तो वेतन और पेंशन संशोधन का क्या होगा।
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 8वां वेतन आयोग अस्थायी निकाय है। इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। प्रोफेसर पुलक घोष को अंशकालिक सदस्य और पंकज जैन को सदस्य सचिव बनाया गया है। आयोग को केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे भत्तों पेंशन और सेवा से जुड़े दूसरे वित्तीय पहलुओं की समीक्षा करनी है। उसे देश की आर्थिक स्थिति सरकारी संसाधनों और कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें तैयार करनी हैं।
निर्धारित समय में रिपोर्ट नहीं आने की स्थिति में आयोग की सिफारिशें स्वतः समाप्त नहीं होंगी। केंद्र सरकार आवश्यकता पड़ने पर आयोग का कार्यकाल बढ़ा सकती है। इससे पहले भी विभिन्न सरकारी आयोगों और समितियों को रिपोर्ट तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाता रहा है। सरकार आयोग को किसी विशेष विषय पर अंतरिम रिपोर्ट सौंपने के लिए भी कह सकती है। आयोग की संदर्भ शर्तों में स्पष्ट है कि वह जरूरी समझे जाने पर अंतिम रिपोर्ट से पहले विभिन्न विषयों पर अंतरिम सिफारिशें दे सकता है। 
अगर रिपोर्ट में देरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों को मौजूदा सातवें वेतन आयोग के अनुसार ही वेतन और भत्ते मिलते रहेंगे। पेंशनभोगियों की पेंशन भी वर्तमान व्यवस्था के तहत जारी रहेगी। महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संशोधन होता रहेगा। रिपोर्ट आने तक कर्मचारियों का वेतन रुकने या मौजूदा लाभ समाप्त होने जैसी कोई स्थिति नहीं होगी।
वेतन आयोग की रिपोर्ट जमा होने के बाद भी नया वेतन ढांचा तत्काल लागू नहीं होता। रिपोर्ट का संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा अध्ययन किया जाता है। इसके वित्तीय प्रभाव का आकलन करने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल अंतिम निर्णय लेता है। सरकार आयोग की सभी सिफारिशों को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं होती। वह किसी प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार संशोधित या अस्वीकार कर सकती है।
रिपोर्ट देर से आने पर सरकार नई वेतन व्यवस्था को पिछली प्रभावी तारीख से लागू करने का फैसला भी कर सकती है। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया राशि मिल सकती है। हालांकि एरियर मिलेगा या नहीं और संशोधित वेतन किस तारीख से प्रभावी होगा इसका फैसला सरकार करेगी। इस संबंध में अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
8वें वेतन आयोग में सबसे अधिक चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 और सातवें वेतन आयोग में 2.57 रखा गया था। कुछ कर्मचारी संगठनों ने इस बार 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो 18000 रुपये का न्यूनतम मूल वेतन करीब 69000 रुपये हो सकता है। लेकिन यह केवल कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है और इसे आयोग या केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिली है।
आयोग विभिन्न राज्यों में कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठनों से बातचीत कर उनके सुझाव ले रहा है। वेतन पेंशन महंगाई भत्ता आवास किराया भत्ता चिकित्सा सुविधा और सेवा शर्तों से जुड़ी मांगों पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने संसद में कहा है कि आयोग निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट सौंपेगा। फिलहाल रिपोर्ट जल्दी आने या आयोग का कार्यकाल बढ़ाने के संबंध में कोई आधिकारिक फैसला नहीं किया गया है।
Tags: