नई दिल्ली: बाजार विशेषज्ञों ने रविवार को कहा कि आने वाले सप्ताह में निफ्टी के तेजी के रुख (bullish momentum) को बनाए रखने की संभावना है। इसमें 25,350-25,800 के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस (रुकावट) है, जबकि बैंक निफ्टी 60,200 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि बीच-बीच में प्रॉफिट बुकिंग (मुनाफा वसूली) की संभावना के बावजूद, भारतीय शेयरों के लिए तकनीकी दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है।
5 नवंबर तक लगातार छह दिनों की तेजी के बाद, अब निवेशक रविवार को होने वाले विशेष 'मुहूर्त ट्रेडिंग' सत्र पर नजर रखेंगे, जो हिंदू वित्तीय वर्ष 'संवत 2083' की शुरुआत का प्रतीक है। दिवाली के जश्न के हिस्से के रूप में दोपहर में होने वाले इस एक घंटे के ट्रेडिंग सत्र को पारंपरिक रूप से नए निवेश के लिए शुभ माना जाता है।
विश्लेषकों ने कहा, "तकनीकी मोर्चे पर, निफ्टी को 24,000-24,400 के दायरे में तत्काल सपोर्ट (सहारा) मिल रहा है। मौजूदा ब्रेकआउट स्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए यह स्तर बहुत महत्वपूर्ण होगा।"
बाजार विशेषज्ञों ने बताया, "अगर निफ्टी 25,350-25,800 के रेजिस्टेंस दायरे के ऊपर टिका रहता है, तो मौजूदा तेजी और आगे बढ़ सकती है और सूचकांक ऊंचे स्तरों तक जा सकता है।"
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सूचकांक ब्रेकआउट स्तरों के ऊपर बना रहता है, तो सपोर्ट जोन की ओर आने वाली किसी भी गिरावट (करेक्शन) पर खरीदारी का मौका बन सकता है। ट्रेडर्स को सलाह दी गई है कि वे सकारात्मक रुख रखें, लेकिन साथ ही शेयरों के चुनाव में सावधानी बरतें। हाल ही में आई तेज तेजी के बाद, बीच-बीच में प्रॉफिट बुकिंग होने की संभावना पर भी नजर रखें।
बैंक निफ्टी ने भी एक मजबूत ब्रेकआउट और शानदार साप्ताहिक क्लोजिंग के बाद अपना तेजी का रुख बरकरार रखा है। हालांकि, हालिया तेज उछाल के बाद बीच-बीच में कुछ प्रॉफिट बुकिंग से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों ने कहा, "सकारात्मक मोमेंटम बनाए रखने के लिए 57,500-58,300 के सपोर्ट जोन के ऊपर टिके रहना जरूरी होगा। वहीं, आने वाले ट्रेडिंग सत्रों में सूचकांक 59,700-60,200 के रेजिस्टेंस दायरे की ओर बढ़ सकता है।"
आगे देखते हुए, उम्मीद है कि बाजार के प्रतिभागी शेयरों के चुनाव में सावधानी बरतेंगे। वे फंडामेंटल रूप से मजबूत कंपनियों को प्राथमिकता देंगे और बाजार में आने वाली गिरावट (करेक्शन) का इस्तेमाल लंबी अवधि के आकर्षक निवेश के मौके तलाशने के लिए करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि संवत 2083 में बाजार की दिशा तय करने वाले मुख्य कारकों में घरेलू कंपनियों की कमाई में वृद्धि, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, बुनियादी ढांचे पर खर्च, ब्याज दरों में बदलाव और मुद्रा के उतार-चढ़ाव शामिल होंगे।
हाल ही में बाजार में आई तेजी के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से भारी खरीदारी देखने को मिली है, लेकिन निवेशकों के लिए यह एक अहम सवाल बना हुआ है कि क्या निवेश का यह प्रवाह आगे भी जारी रहेगा।
ऊर्जा से जुड़ी महंगाई, सप्लाई चेन में रुकावटें और कुल मिलाकर बढ़ती महंगाई का असर खपत की मांग और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 (FY27) में कंपनियों की कमाई में मजबूत तेजी की उम्मीद है, जो इन चुनौतियों के असर को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकती है।