क्या है सिम बाइंडिंग की व्यवस्था?
सिम बाइंडिंग का सामान्य अर्थ है किसी सेवा को उपयोगकर्ता के रजिस्टर्ड सिम से लगातार जोड़े रखना। दूरसंचार विभाग के मूल निर्देश के अनुसार, संबंधित संचार एप की सेवा उस डिवाइस में मौजूद विशिष्ट सक्रिय सिम से जुड़ी होनी चाहिए, जिसका मोबाइल नंबर उपयोगकर्ता की पहचान या सेवा उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल हुआ है।
इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं। किसी व्यक्ति ने एक मोबाइल नंबर पर वॉट्सऐप अकाउंट बनाया और बाद में उस नंबर का सिम दूसरे फोन में लगा दिया। सिम बाइंडिंग लागू होने पर पहले फोन में केवल पुराने सत्यापन के आधार पर सेवा जारी रखने में बाधा आ सकती है। नई व्यवस्था में अकाउंट और संबंधित सिम का संबंध बनाए रखना आवश्यक होगा।
किन एप्स के लिए जारी हुए थे निर्देश?
दूरसंचार विभाग ने 28 नवंबर, 2025 को प्रमुख एप आधारित संचार सेवाओं को निर्देश जारी किए थे। सरकार की एक दिसंबर, 2025 की जानकारी में वॉट्सऐप, टेलीग्राम, स्नैपचैट, अरट्टई, शेयरचैट, जोश, जियोचैट और सिग्नल का उल्लेख था। ये निर्देश भारतीय मोबाइल नंबर का उपयोग पहचान या सेवा देने के लिए करने वाले संबंधित प्लेटफॉर्मों से जुड़े हैं। शुरुआती निर्देशों में अनुपालन के लिए 90 दिनों का समय दिया गया था। बाद में इसकी समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2026 कर दी गई। इसलिए पुराने समाचारों में बताई गई समयसीमा और वर्तमान व्यवस्था में अंतर समझना जरूरी है। dot.gov.in
साइबर अपराध रोकना है सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि मोबाइल नंबर से एक बार अकाउंट सत्यापित करने के बाद संबंधित सिम के बिना भी सेवा चलने की सुविधा का दुरुपयोग हो रहा था। विशेष रूप से विदेश से संचालित साइबर अपराधों में भारतीय मोबाइल नंबरों से जुड़े अकाउंट इस्तेमाल किए जाने की समस्या सामने आई थी। सिम बाइंडिंग के जरिए ऐसे अकाउंट के इस्तेमाल पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश है। सरकारी जानकारी में फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट, पहचान की नकल और निवेश संबंधी धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संचार सेवा का इस्तेमाल संबंधित मोबाइल पहचान से लगातार जुड़ा रहे।
किन उपयोगकर्ताओं को बदलनी पड़ सकती है आदत?
इस व्यवस्था में उन लोगों को विशेष ध्यान देना होगा, जिनका मैसेजिंग अकाउंट एक फोन में है और उससे संबंधित सिम दूसरे फोन में लगा हुआ है। केवल वाई-फाई पर चलने वाले अतिरिक्त स्मार्टफोन में पुराने नंबर का अकाउंट इस्तेमाल करने वालों का अनुभव भी बदल सकता है। इसी तरह, फोन बदलते समय सिम और मैसेजिंग अकाउंट की व्यवस्था साथ में समझनी होगी। किसी भी सक्रिय सिम की मौजूदगी पर्याप्त मान लेना सही नहीं होगा, क्योंकि निर्देश संबंधित अकाउंट वाले मोबाइल नंबर के सिम से जुड़ा है। सिम हटाने, बदलने या निष्क्रिय होने की स्थिति में सेवा प्रभावित हो सकती है। दोबारा पहुंच बहाल करने की प्रक्रिया कंपनियों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
क्या हर छह घंटे में बंद होगा वॉट्सऐप वेब?
शुरुआती निर्देशों में वेब सेवाओं को अधिकतम छह घंटे के अंतराल पर लॉगआउट कराने और दोबारा लिंक करने की व्यवस्था शामिल थी। हालांकि, बाद की रिपोर्टों के अनुसार, इस शर्त को बदलकर जोखिम आधारित लॉगआउट की व्यवस्था किया गया है। इसलिए हर छह घंटे में सभी लोगों का वॉट्सऐप वेब अनिवार्य रूप से बंद होने का दावा वर्तमान जानकारी के अनुरूप नहीं है। ई-सिम, एक से अधिक डिवाइस और अलग-अलग फोन प्रणालियों में सत्यापन किस तरह होगा, इस बारे में संबंधित प्लेटफॉर्मों की स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होगी। केवल सिम बाइंडिंग की खबर के आधार पर नया फोन खरीदना या मौजूदा अकाउंट हटाना जरूरी नहीं समझना चाहिए।
यूजर्स अभी क्या ध्यान रखें?
अपने मैसेजिंग अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर की पहचान कर लें और देखें कि उसका सिम किस डिवाइस में इस्तेमाल हो रहा है। नंबर बदलने या फोन स्थानांतरित करने की योजना हो तो संबंधित एप में उपलब्ध आधिकारिक प्रक्रिया की जानकारी रखें। आने वाले समय में कंपनियों के नोटिफिकेशन से यह स्पष्ट होगा कि सत्यापन कैसे करना है और किन परिस्थितियों में सेवा प्रभावित होगी। फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि 31 दिसंबर अनुपालन की समयसीमा है और नए साल की व्यवस्था का केंद्र अकाउंट से जुड़े सक्रिय सिम की मौजूदगी होगी।