ज़ेटवर्क की लिस्टिंग में बढ़त, एनएसई पर ₹159.25 से कारोबार शुरू
ज़ेटवर्क की शेयर बाजार में एंट्री
मुंबई: ज़ेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के शेयरों ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को शेयर बाजार में सकारात्मक शुरुआत की। कंपनी के शेयर 151 रुपये प्रति शेयर के IPO इश्यू प्राइस के मुकाबले 5 प्रतिशत से अधिक के प्रीमियम पर लिस्ट हुए।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर 159.25 रुपये पर खुले, जो 5.46 प्रतिशत का प्रीमियम दर्शाता है। BSE पर शेयर 159 रुपये पर लिस्ट हुए, जिसमें 5.30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
लिस्टिंग ने ग्रे मार्केट की उम्मीदों को पीछे छोड़ा
ज़ेटवर्क की लिस्टिंग ग्रे मार्केट की उम्मीदों से बेहतर रही। 'इन्वेस्टरगेन' (InvestorGain) के अनुसार, 22 अक्टूबर को कंपनी के शेयरों का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) केवल 1 रुपये था।
इससे 152 रुपये की संभावित लिस्टिंग कीमत का संकेत मिल रहा था, जो 0.66 प्रतिशत का मामूली प्रीमियम होता। हालांकि, असल लिस्टिंग में कहीं बेहतर मुनाफा देखने को मिला।
ग्रे मार्केट प्रीमियम अनौपचारिक संकेत होते हैं और ये लिस्टिंग के प्रदर्शन की कोई गारंटी नहीं देते हैं।
IPO 3.06 गुना सब्सक्राइब हुआ
ज़ेटवर्क का 5,012 करोड़ रुपये का IPO 19 अक्टूबर को बंद हुआ, जिसे कुल मिलाकर 3.06 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।
इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) की मांग सबसे अधिक रही, जिन्होंने अपने हिस्से का 4.73 गुना सब्सक्रिप्शन लिया। नॉन-इन्स्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) ने 1.40 गुना सब्सक्रिप्शन लिया, जबकि रिटेल निवेशकों की भागीदारी 0.73 गुना रही।
इस पब्लिक इश्यू में 2,830 करोड़ रुपये के नए शेयर (फ्रेश इश्यू) और 2,182 करोड़ रुपये के 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) शामिल थे।
IPO के लिए प्राइस बैंड 143–151 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। रिटेल निवेशकों को 99 शेयरों के एक लॉट के लिए कम से कम 14,949 रुपये का निवेश करना था।
ज़ेटवर्क IPO से मिली रकम का इस्तेमाल कैसे करेगी?
कंपनी नए शेयरों (फ्रेश इश्यू) से मिलने वाली रकम में से 2,160 करोड़ रुपये का उपयोग कर्ज चुकाने के लिए करेगी। बाकी बची रकम का इस्तेमाल अधिग्रहण (एक्विजिशन), विस्तार के मौकों और सामान्य कॉर्पोरेट कार्यों के लिए किया जाएगा। ज़ेटवर्क एक टेक्नोलॉजी-आधारित मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म चलाता है, जो 26 देशों में लगभग 7,000 सप्लायर्स को जोड़ता है।
रेवेन्यू बढ़ा, नुकसान भी बढ़ा
ज़ेटवर्क ने FY26 में 15,913 करोड़ रुपये का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि FY25 में यह 11,332 करोड़ रुपये था।
हालांकि, कंपनी का नेट लॉस 210 करोड़ रुपये से बढ़कर 991 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 2.5 प्रतिशत से घटकर 2.1 प्रतिशत रह गया।
SBI सिक्योरिटीज ने ग्रोथ की संभावनाओं और कर्ज कम होने से मिलने वाले संभावित फायदों का हवाला देते हुए, लंबे समय के लिए इसमें सब्सक्राइब करने की सलाह दी है।