नई दिल्ली। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र और चावल उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक खाद्य बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के जरिए निर्यात संबंधों को बढ़ावा देना होगा।नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026' (BIRC) के दौरान केंद्रीय मंत्री ने खाद्य सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारतीय चावल उद्योग की संभावनाओं पर अपने विचार रखे। यह सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के चावल निर्यातकों, आयातकों, कारोबारियों और नीति निर्माताओं की भागीदारी निर्धारित है।
विकसित भारत के लक्ष्य में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र अहम
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की बात करते हैं, तो इसमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और चावल क्षेत्र का महत्व काफी बढ़ जाता है।उन्होंने कहा कि भारत के पास कृषि उत्पादन के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं का बेहतर इस्तेमाल करके भारत अंतरराष्ट्रीय खाद्य बाजार में अपनी भागीदारी बढ़ा सकता है।पासवान ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय खाद्य उद्योग को वैश्विक आवश्यकताओं और बाजार की मांग के अनुरूप आगे बढ़ाने की जरूरत है।
मुक्त व्यापार समझौतों से मजबूत होंगे निर्यात संबंध
केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इन समझौतों का प्रमुख उद्देश्य भारत के निर्यात संबंधों को और मजबूत करना है।पासवान ने कहा कि भारत न केवल अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है, बल्कि दूसरे देशों की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता भी रखता है।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दूसरे देशों के साथ मजबूत आर्थिक संबंध स्थापित करना आवश्यक है। मुक्त व्यापार समझौते भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराने और व्यापारिक अवसर बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।
चावल उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर
चिराग पासवान ने कहा कि भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस जैसे आयोजन चावल उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों को एक साझा मंच प्रदान करते हैंयहां निर्यातक, आयातक, उद्योग प्रतिनिधि और नीति निर्माता अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इससे उद्योग की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान तलाशने में सहायता मिल सकती है।उन्होंने कहा कि वैश्विक खाद्य बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए इस तरह के मंचों की आवश्यकता है।
120 से अधिक देशों की भागीदारी का लक्ष्य
भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026 का आयोजन भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) की ओर से किया जा रहा है। सम्मेलन में 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों और लगभग 30 हजार प्रतिभागियों की भागीदारी की उम्मीद जताई गई है।आयोजन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना, कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है।
किसानों और कारोबारियों को मिल सकते हैं नए अवसर
चावल उद्योग में निर्यात के अवसर बढ़ने से किसानों, मिल संचालकों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और व्यापारियों को लाभ मिलने की संभावनाएं हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के साथ गुणवत्ता, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना भी आवश्यक है।भारत का चावल निर्यात 170 से अधिक देशों तक पहुंचता है। ऐसे में नए बाजारों की तलाश और व्यापारिक साझेदारी का विस्तार इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
खाद्य सुरक्षा के साथ वैश्विक व्यापार पर ध्यान
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत अपनी खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ अन्य देशों की जरूरतों को भी पूरा करने की क्षमता रखता है।उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण और चावल उद्योग को मजबूत बनाकर भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति कर सकता है।भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक तकनीक और व्यापारिक संभावनाओं पर होने वाली चर्चाओं से चावल उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
Tags: