नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती तूफान विकसित होने के दावों ने तटीय राज्यों में चिंता बढ़ा दी है। चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहे राज्यों के सामने अब 'मुरासु' नामक नए तूफान का खतरा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस संभावित तूफान का असर ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित चार राज्यों पर पड़ सकता है। हालांकि, मुरासु के गठन, उसकी वर्तमान स्थिति, तीव्रता और संभावित मार्ग की भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) से आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। ऐसे में तूफान के संबंध में सामने आ रहे दावों को फिलहाल सावधानी के साथ देखना जरूरी है।
बंगाल की खाड़ी भारत के पूर्वी तट पर बनने वाले चक्रवाती तूफानों का एक प्रमुख क्षेत्र है। यहां समुद्र की सतह का तापमान, वातावरण में नमी और हवाओं की अनुकूल परिस्थितियां बनने पर निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है। अनुकूल मौसम मिलने पर यह प्रणाली धीरे-धीरे अवदाब, गहन अवदाब और चक्रवाती तूफान का रूप ले सकती है। हालांकि, हर निम्न दबाव का क्षेत्र चक्रवात में परिवर्तित नहीं होता।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के 1 नवंबर के बुलेटिन के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में बना गहन अवदाब चक्रवाती तूफान 'मुरासु' में बदल गया। इसके बाद तूफान की तीव्रता बढ़ी और मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश तथा उससे सटे उत्तरी तमिलनाडु के तटीय इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया। मौसम विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा सूचना के अनुसार, यह प्रणाली गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले चुकी है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मुरासु के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और 2 नवंबर की मध्यरात्रि से 3 नवंबर की सुबह के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की आशंका जताई गई है। नेल्लोर और नरसापुर के बीच संभावित लैंडफॉल के दौरान हवाओं की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों के साथ गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने का अनुमान है। हालांकि, चक्रवाती तूफानों की दिशा और तीव्रता में बदलाव संभव है।
आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। तेज हवाओं के कारण पेड़ों के गिरने, बिजली आपूर्ति बाधित होने, कमजोर ढांचों को नुकसान पहुंचने और निचले इलाकों में जलभराव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। समुद्र में ऊंची लहरें उठने और खराब मौसम के कारण मछुआरों के लिए भी जोखिम बढ़ सकता है।
मौसम विभाग ने तटीय आंध्र प्रदेश के लिए अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और तेलंगाना के लिए बहुत भारी बारिश की नारंगी चेतावनी दी गई है। छत्तीसगढ़, केरल, माहे, ओडिशा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इस प्रकार तूफान का प्रभाव केवल चार राज्यों तक सीमित नहीं रह सकता, हालांकि सबसे गंभीर खतरा आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में बताया गया है।
ओडिशा के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। राज्य के दक्षिणी हिस्सों में चक्रवात अर्नब और उसके बाद हुई बारिश तथा बाढ़ से प्रभावित परिवार अभी सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में दोबारा भारी बारिश होने से राहत और पुनर्वास कार्यों में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं। एहतियात के तौर पर बालिमेला जलाशय के द्वार भी खोले गए हैं।
आंध्र प्रदेश सरकार ने संभावित खतरे को देखते हुए तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने संबंधित विभागों के साथ तैयारियों की समीक्षा की है। रिपोर्ट के अनुसार, छह एनडीआरएफ और सात एसडीआरएफ टीमों को तैनात किया गया है। नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं और असुरक्षित इलाकों से लोगों को निकालने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने आपात स्थिति में 112 और 1070 नंबरों पर संपर्क करने की सलाह दी है।
मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में 2 नवंबर तक और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 4 नवंबर की सुबह तक मछली पकड़ने से बचने की सलाह दी है। समुद्र में मौजूद नौकाओं और मछली पकड़ने वाले समुदायों के लिए आधिकारिक चेतावनियों का पालन करना बेहद आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चक्रवात के दौरान केवल तेज हवाएं ही खतरा नहीं होतीं, बल्कि लगातार बारिश से नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने, सड़क संपर्क बाधित होने और कमजोर मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी रहती है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मौसम विभाग तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
एक सप्ताह के भीतर बंगाल की खाड़ी में दूसरे चक्रवाती तूफान के सक्रिय होने से आपदा प्रबंधन एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। जिन इलाकों में पहले से जलभराव या बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, वहां दोबारा बारिश होने से समस्याएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में समय पर चेतावनी, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की व्यवस्था और राहत सामग्री की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल मौसम विभाग तूफान की दिशा और तीव्रता की निगरानी कर रहा है। आने वाले घंटों में इसके संभावित मार्ग और प्रभावित क्षेत्रों के बारे में जारी होने वाले नए बुलेटिन महत्वपूर्ण होंगे। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर भरोसा करने की अपील की है।