दिल्ली : फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2379 में 4 अगस्त 2026 को हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना को लेकर लगातार नए और चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरबस A320 विमान में उड़ान के दौरान अचानक करीब 300 फीट की गिरावट दर्ज की गई थी। इस घटना में 20 यात्रियों और चार केबिन क्रू सदस्यों समेत कुल 24 लोग घायल हुए थे। अब इस मामले में कॉकपिट के अंदर की परिस्थितियों, पायलट के कथित व्यवहार और उनके डोप टेस्ट से जुड़ी जानकारी ने विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना से पहले के करीब 24 घंटे के दौरान पायलट-इन-कमांड और केबिन क्रू के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी। बताया गया कि फुकेट जाते समय पायलट के वॉशरूम जाने पर विमान संचालन से जुड़े नियमों के तहत एक केबिन अटेंडेंट को कुछ समय के लिए कॉकपिट में पायलट की सीट पर बैठने के लिए कहा गया था। सीट को एडजस्ट करने में परेशानी होने पर पायलट ने कथित तौर पर केबिन अटेंडेंट को फटकार लगाई।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि फुकेट में करीब 24 घंटे से कम के लेओवर के दौरान पायलट ने अपने व्यवहार को लेकर क्रू के साथ पार्टी की। हालांकि, वापसी की उड़ान के दौरान वही केबिन अटेंडेंट कथित तौर पर असहज महसूस कर रही थीं। उन्होंने क्रू-इन-चार्ज से अनुरोध किया कि उन्हें विमान के पिछले हिस्से में ड्यूटी दी जाए, ताकि उन्हें कॉकपिट से दूर रखा जा सके। इस घटनाक्रम को लेकर जांच एजेंसियां अब पूरे मामले की परिस्थितियों को समझने में जुटी हैं।
4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली लौट रही फ्लाइट में उड़ान के लगभग ढाई घंटे बाद ओडिशा के ऊपर करीब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान में करीब 300 फीट का अचानक ड्रॉप हुआ। इस दौरान विमान के भीतर मौजूद यात्रियों और क्रू सदस्यों को तेज झटका लगा। जिन यात्रियों ने सीट बेल्ट नहीं लगा रखी थी, वे विमान के केबिन में उछल गए और कुछ लोगों के छत से टकराने की बात सामने आई।
घटना के दौरान कॉकपिट में पायलट की स्थिति को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पायलट-इन-कमांड उस समय अपनी निर्धारित सीट पर बैठे होने के बजाय को-पायलट की सीट के पीछे खड़े होकर आगे की ओर झुके हुए थे। अचानक विमान के नीचे की ओर जाने से कॉकपिट में मौजूद पायलट और कुछ ढीला सामान भी प्रभावित हुआ।
घटना के बाद पायलट के कथित व्यवहार को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि टर्बुलेंस के बाद पायलट फर्श पर बैठे नजर आए और कथित तौर पर उन्होंने उड़ान के दौरान धूम्रपान करने की कोशिश की। इसके बाद केबिन क्रू ने उन्हें संभाला और सीट पर बैठाया। वहीं, को-पायलट ने विमान का मैनुअल कंट्रोल संभाला और फ्लाइट को स्थिर करते हुए दिल्ली में सुरक्षित लैंड कराया।
मामले को और गंभीर बनाने वाली जानकारी पायलट के डोप टेस्ट से जुड़ी बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पायलट के गांजे के लिए किए गए डोप टेस्ट में पॉजिटिव परिणाम आया। यदि जांच में यह तथ्य आधिकारिक रूप से स्थापित होता है, तो यह विमान संचालन के दौरान सुरक्षा, पायलट फिटनेस और नियामकीय नियमों के पालन से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
फिलहाल घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि विमान में अचानक टर्बुलेंस और 300 फीट की गिरावट के साथ बड़ी संख्या में यात्रियों के घायल होने की घटना सामान्य विमान संचालन से अलग गंभीर परिस्थिति को दर्शाती है। पायलट और क्रू के बीच कथित तनाव, उड़ान के दौरान पायलट की स्थिति तथा डोप टेस्ट से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटना ने एक बार फिर विमान में सीट बेल्ट के महत्व को सामने ला दिया है। टर्बुलेंस की स्थिति अचानक पैदा हो सकती है और ऐसे में सीट बेल्ट लगाए रखना यात्रियों को गंभीर चोटों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एयरलाइन संचालन में पायलट और केबिन क्रू के बीच बेहतर समन्वय, नियमों का पालन और उड़ान के दौरान सुरक्षा प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन बेहद जरूरी माना जाता है।