नई दिल्ली: फारस की खाड़ी में मार्शल द्वीप समूह के ध्वज वाले एलएनजी वाहक जहाज एमटी अल मायदा पर हमला हुआ है। राहत की बात यह है कि जहाज पर मौजूद छह भारतीय नाविकों सहित चालक दल के सभी 25 सदस्य सुरक्षित हैं। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने शनिवार, 31 अक्टूबर को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और नाविकों की सुरक्षा तथा कुशलक्षेम सुनिश्चित करने के लिए जहाज का प्रबंधन करने वाली कंपनी के संपर्क में है।
सोनोवाल की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, जहाज को शुक्रवार, 30 अक्टूबर को प्रोजेक्टाइल हमले में निशाना बनाया गया। प्रोजेक्टाइल का अर्थ दागे गए किसी हथियार या प्रक्षेप्य से है। उपलब्ध आधिकारिक बयान में इस्तेमाल किए गए हथियार का विस्तृत तकनीकी विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में इसे किसी निश्चित प्रकार की मिसाइल या ड्रोन का हमला बताना अभी उचित नहीं होगा। मंत्री के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा चालक दल की सुरक्षा की पुष्टि है। जहाज पर छह भारतीय कुल 25 सदस्यीय दल का हिस्सा थे।
केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि सभी भारतीय नागरिक और अन्य चालक दल सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की निगरानी जारी है। जहाज प्रबंधन कंपनी से संपर्क बनाए रखने का उद्देश्य नाविकों की आगे की सुरक्षा और उनकी स्थिति की जानकारी प्राप्त करना है। फिलहाल उपलब्ध बयान में भारतीय नाविकों के नाम, उनके गृह राज्यों या उन्हें जहाज से उतारे जाने की किसी योजना का विवरण नहीं दिया गया है। इस संबंध में आगे की जानकारी संबंधित अधिकारियों की ओर से आने पर स्थिति स्पष्ट होगी। हमला किसने किया और जहाज को कितना नुकसान पहुंचा, इसे लेकर पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है। समुद्री घटनाओं पर जानकारी देने वाले पोत निगरानी मंच वेसलट्रैकर ने भी हमलावरों की पहचान तथा नुकसान के पूरे आकलन की पुष्टि नहीं होने की बात कही है। इसलिए चालक दल के सुरक्षित होने की सूचना को जहाज को कोई क्षति नहीं पहुंचने के दावे से अलग समझना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में किसी देश या संगठन को इस विशेष हमले के लिए जिम्मेदार ठहराने का पर्याप्त आधार नहीं दिया गया है।
अल मायदा की घटना खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए अन्य हमलों के बीच सामने आई है। इससे पहले 29 अक्टूबर को लाइबेरिया के ध्वज वाले तेल टैंकर एमटी अरजानाह को होर्मुज जलडमरूमध्य में निशाना बनाया गया था। उस जहाज पर दो भारतीय नागरिक मौजूद थे। इसके अगले दिन पनामा के ध्वज वाले कच्चे तेल के टैंकर एमटी लुईस-1 पर भी हमला हुआ, जिसमें 27 भारतीय नाविक सवार थे। सरकार के अनुसार, इन दोनों जहाजों पर मौजूद सभी 29 भारतीय सुरक्षित रहे और उन्हें चोट नहीं आई। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी नागरिक जहाजों और नाविकों पर बार-बार हो रहे हमलों का मुद्दा उठाया है। जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक से संबंधित उनके संदेश के अनुसार, ऐसे हमलों का असर वैश्विक दक्षिण के देशों पर अधिक पड़ रहा है। उन्होंने ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की उपलब्धता तथा लागत पर पड़ने वाले खतरे की ओर ध्यान दिलाया। सुरक्षित नौवहन का मुद्दा इस व्यापक आर्थिक चिंता से भी जुड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन यानी आईएमओ ने होर्मुज क्षेत्र की स्थिति से प्रभावित नाविकों की सुरक्षा और कल्याण को गंभीर चिंता का विषय बताया है। संगठन के अनुसार, समुद्री तनाव का प्रभाव जहाजों पर काम करने वालों के साथ बंदरगाह कर्मचारियों और समुद्र में स्थित प्रतिष्ठानों के कर्मियों पर भी पड़ता है। आईएमओ फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में वाणिज्यिक पोतों पर हमलों के आंकड़े जुटाता है। इसके लिए संबंधित ध्वज वाले देशों, तटीय देशों और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी का सत्यापन किया जाता है।
भारतीय अधिकारियों ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर पहले भी निगरानी और घटना रिपोर्टिंग की व्यवस्थाएं स्थापित की हैं। सरकार की ओर से पूर्व में दी गई जानकारी के अनुसार, ई-नाविक पोर्टल पर समुद्री दुर्घटनाओं, संकट की परिस्थितियों और नाविकों की शिकायतों की डिजिटल रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इसके जरिए संबंधित विभागों तक सूचना पहुंचाने और कार्रवाई की स्थिति पर नजर रखने का प्रावधान है। यह पहले से मौजूद व्यवस्था है। अल मायदा पर हमले के बाद इसके तहत किसी विशेष अभियान की घोषणा उपलब्ध बयान में नहीं की गई है। संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले जहाजों का विवरण ऑनलाइन शिप रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से जुटाने की व्यवस्था भी है। सरकार के अनुसार, इससे पोतों की पहचान, निगरानी और आपात स्थिति में समन्वय में सहायता मिलती है। अल मायदा के मामले में फिलहाल सरकार ने जहाज प्रबंधन कंपनी से संपर्क और लगातार निगरानी की पुष्टि की है। आगे जहाज की परिचालन स्थिति, संभावित नुकसान और यात्रा से संबंधित जानकारी महत्वपूर्ण होगी। अभी तक सामने आई सूचना के अनुसार, इस घटना में छह भारतीयों सहित पूरे चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित है।