नई दिल्ली :  केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) ने शहरी गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। योजना के तहत अब तक देशभर में 1.25 करोड़ से अधिक मकानों को मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि एक करोड़ से अधिक पक्के मकानों का निर्माण पूरा कर उन्हें लाभार्थियों को सौंपा जा चुका है। सरकार ने योजना की इस प्रगति को बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसके दूसरे चरण पीएमएवाई-यू 2.0 के क्रियान्वयन को भी तेज कर दिया है।
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, पीएमएवाई-यू 2.0 की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (सीएसएमसी) की आठवीं बैठक संकल्प भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मंत्रालय के सचिव सतेंद्र सिंह ने की। इसमें देश के 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 2.09 लाख से अधिक नए आवासों को मंजूरी दी गई। जिन राज्यों को नई स्वीकृतियों का लाभ मिलेगा, उनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्य शामिल हैं।
सरकार के मुताबिक, इन नए आवासों के निर्माण से बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को लाभ मिलेगा, जिनके पास अभी तक अपना पक्का घर नहीं है। पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत शहरी क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। योजना का उद्देश्य केवल मकान उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को बेहतर और सुरक्षित जीवन का आधार देना भी है।
आठवीं सीएसएमसी बैठक में मंजूर किए गए 2.09 लाख से अधिक आवासों में लगभग 1.42 लाख मकान लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) घटक के तहत बनाए जाएंगे। इस व्यवस्था के तहत पात्र लाभार्थियों को अपनी जमीन पर पक्का मकान बनाने के लिए सरकार की ओर से 2.5 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इससे उन परिवारों को विशेष मदद मिलती है, जिनके पास जमीन तो है, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण वे अपना पक्का घर नहीं बना पा रहे हैं।
इसके अलावा 67,045 आवास किफायती आवास साझेदारी (एएचपी) घटक के तहत बनाए जाएंगे। इन मकानों का निर्माण सार्वजनिक और निजी एजेंसियों के सहयोग से किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस मॉडल से शहरी क्षेत्रों में किफायती आवासों की उपलब्धता बढ़ेगी और कम आय वाले परिवारों को बेहतर आवासीय सुविधा मिल सकेगी। नई स्वीकृतियों के साथ पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत मंजूर किए गए कुल मकानों की संख्या 18.38 लाख से अधिक हो गई है।
पीएमएवाई-यू 2.0 में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता को भी विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। आठवीं सीएसएमसी बैठक में स्वीकृत 2.09 लाख से अधिक आवासों में से करीब 2.03 लाख मकान महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में आवंटित किए गए हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति के स्वामित्व में अधिक भागीदारी देना और परिवार में उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति को मजबूत करना है।
सरकार के अनुसार, पूरी पीएमएवाई-यू योजना के तहत अब तक एक करोड़ से अधिक मकान महिलाओं के नाम पर पंजीकृत किए जा चुके हैं। योजना में वरिष्ठ नागरिकों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग समेत जरूरतमंद वर्गों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इससे योजना को सामाजिक समावेशन और समान अवसर के उद्देश्य से भी जोड़ा गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी की शुरुआत शहरी क्षेत्रों में आवास की समस्या से जूझ रहे परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। योजना के तहत निर्माण पूरा होने के साथ बड़ी संख्या में परिवारों को किराये या अस्थायी आवास की निर्भरता से राहत मिली है। पक्के मकान मिलने से लाभार्थियों को सुरक्षित रहने की जगह के साथ-साथ बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ने का बेहतर अवसर भी मिलता है।
पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत लगातार नई स्वीकृतियां मिलने से सरकार की आवास नीति को गति मिलने की उम्मीद है। 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 2.09 लाख से अधिक नए घरों को मंजूरी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि शहरी क्षेत्रों में आवास की जरूरत रखने वाले पात्र परिवारों तक योजना का लाभ तेजी से पहुंचाया जाए और निर्माण प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
इस प्रकार पीएमएवाई-यू की अब तक की प्रगति और पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत लगातार हो रही नई स्वीकृतियां यह संकेत देती हैं कि केंद्र सरकार शहरी गरीबों के लिए पक्के और किफायती आवास उपलब्ध कराने पर लगातार जोर दे रही है। महिलाओं के नाम पर बड़ी संख्या में आवास आवंटित किए जाने से योजना के सामाजिक और महिला सशक्तिकरण से जुड़े पहलू भी मजबूत हुए हैं।
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