नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों के कारण व्यापार प्रभावित होने का दावा करते हुए प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शनों और मार्च के आह्वान से बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही कम हुई, जिससे दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। त्योहारी सीजन के बीच कारोबार प्रभावित होने से व्यापारिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है।दिल्ली के प्रमुख व्यापार संघों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर व्यावसायिक क्षेत्रों में विरोध-प्रदर्शनों और मार्च पर रोक लगाने की अपील की है। इनमें फेडरेशन लाजपत नगर ट्रेडर्स एसोसिएशन, ऑटोमोटिव पार्ट्स मर्चेंट्स एसोसिएशन (APMA) और सरोजिनी मार्केट शॉप-कीपर्स एसोसिएशन (SMSA) शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
व्यापारिक संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में कहा है कि हाल के विरोध-प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के प्रमुख बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। संगठनों के मुताबिक, इसका सीधा असर दुकानदारों की आमदनी और उनके कारोबार पर पड़ा है।व्यापारियों ने केंद्र सरकार से इस समस्या को गंभीरता से लेने और व्यावसायिक इलाकों में सामान्य गतिविधियां बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।उनका कहना है कि व्यापारिक क्षेत्रों में बार-बार विरोध-प्रदर्शनों का आयोजन होने से दुकानदारों के सामने आर्थिक अनिश्चितता पैदा हो रही है।
चार से पांच दिनों तक बाजारों से दूर रहे ग्राहक
व्यापारिक संगठनों के अनुसार, 10 अक्टूबर के आसपास विरोध-प्रदर्शनों के आह्वान के बाद दिल्ली के कई प्रमुख बाजारों में अफरा-तफरी और घबराहट का माहौल बन गया था।व्यापारियों का दावा है कि विरोध-प्रदर्शनों से पहले और बाद में करीब चार से पांच दिनों तक ग्राहकों ने बाजारों में आने से परहेज किया। इसके चलते दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम रही और व्यापारिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ा।संगठनों ने कहा कि ग्राहकों की आवाजाही में कमी से छोटे और मध्यम स्तर के दुकानदार विशेष रूप से परेशान हैं। हालांकि, व्यापारियों की ओर से हुए कुल आर्थिक नुकसान का कोई निश्चित आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
त्योहारी सीजन में कारोबार प्रभावित होने से बढ़ी चिंता
व्यापारियों ने अपने पत्र में अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के दौरान होने वाली त्योहारी खरीदारी का विशेष उल्लेख किया है। उनका कहना है कि नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों के आसपास बाजारों में खरीदारी बढ़ती है। ऐसे समय में विरोध-प्रदर्शनों और यातायात प्रतिबंधों के कारण ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पाते तो व्यापारियों की आय प्रभावित होती है।व्यापारिक संगठनों का कहना है कि कई दुकानदार सालभर त्योहारी सीजन का इंतजार करते हैं। इस दौरान होने वाली बिक्री से दुकान का किराया, कर्मचारियों का वेतन और अन्य व्यावसायिक खर्च पूरे किए जाते हैं।
व्यावसायिक क्षेत्रों में मार्च पर रोक लगाने की अपील
व्यापारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्र सरकार और न्यायपालिका से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अपील की है कि दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में विरोध-प्रदर्शनों और मार्च पर तत्काल रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।व्यापारिक संगठनों का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके आयोजन के दौरान आम नागरिकों, ग्राहकों और दुकानदारों की परेशानियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कारोबार और विरोध के अधिकार पर अदालत में भी चर्चा
दिल्ली के व्यापारियों की चिंताओं का मामला अदालतों तक भी पहुंचा है। 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान व्यापारियों की आजीविका पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई। अदालत ने संकेत दिया कि यदि गैरकानूनी गतिविधियों से व्यापारियों को नुकसान पहुंचने की बात साबित होती है, तो मुआवजे के सवाल पर विचार किया जा सकता है।
सरकार से बाजारों में सामान्य स्थिति बनाए रखने की मांग
व्यापारिक संगठनों ने सरकार से अपील की है कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित न हों। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था के साथ व्यापारियों की आजीविका की रक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।इस बीच, प्रदर्शन आयोजकों की ओर से शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार का मुद्दा भी उठाया गया है। ऐसे में प्रशासन के सामने सार्वजनिक व्यवस्था, विरोध के अधिकार और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।फिलहाल, व्यापारिक संगठनों ने प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अब व्यापारियों की नजर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर है।
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