नई दिल्ली। भारत में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। 11वें आयुर्वेद दिवस समारोह के दौरान जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच देश में आयुष से जुड़े कुल 4,077 पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए, जबकि इस अवधि में 711 पेटेंट मंजूर किए गए। यह आंकड़ा आयुर्वेद सहित विभिन्न पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों से जुड़े आविष्कारों और नई तकनीकों के विकास में बढ़ती रुचि को दर्शाता है।'भारत में आयुष से जुड़े आविष्कारों पर स्थिति रिपोर्ट (2014-2026)' में पिछले लगभग 12 वर्षों के दौरान आयुष क्षेत्र में पेटेंट और बौद्धिक संपदा गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) से संबद्ध पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक कार्यालय (CGPDTM) ने प्रकाशित किया है।
12 वर्षों में 4,077 पेटेंट आवेदन दाखिल
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 तक आयुष से संबंधित कुल 4,077 पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए। इसी अवधि में 711 पेटेंट को मंजूरी मिली।पेटेंट आवेदन और स्वीकृति के ये आंकड़े पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े नए उत्पादों, तकनीकों और अनुसंधान गतिविधियों में बढ़ती दिलचस्पी को सामने लाते हैं।पेटेंट किसी नए और पेटेंट योग्य आविष्कार को निर्धारित कानूनी अवधि के लिए संरक्षण प्रदान करता है। इससे आविष्कारकों को अपने नवाचार से संबंधित विशेष अधिकार प्राप्त हो सकते हैं।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़ने पर जोर
आयुष मंत्रालय का उद्देश्य भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास से जोड़ना है।आयुष में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रणालियां शामिल हैं।इन क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से नए उत्पादों, प्रक्रियाओं तथा तकनीकों को विकसित करने की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। साथ ही पारंपरिक ज्ञान के उचित संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पेटेंट आवेदनों में आठ गुना से अधिक वृद्धि
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2014-15 में आयुष से जुड़े केवल 63 पेटेंट आवेदन दाखिल हुए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में इनकी संख्या बढ़कर 590 हो गई। इस दौरान वार्षिक आवेदनों में आठ गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।वित्त वर्ष 2022-23 में सर्वाधिक 606 पेटेंट आवेदन दाखिल हुए थे। वहीं, 2020-21 से 2025-26 के बीच कुल 2,854 आवेदन दाखिल किए गए, जो पूरी अवधि के लगभग 70 प्रतिशत हैं।
महाराष्ट्र पेटेंट आवेदनों में सबसे आगे
राज्यवार आंकड़ों में महाराष्ट्र ने आयुष से जुड़े पेटेंट आवेदनों में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य से कुल 744 आवेदन दाखिल किए गए और 142 पेटेंट मंजूर हुए।इसके अलावा तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और कर्नाटक भी प्रमुख राज्यों में शामिल रहे। इन पांच राज्यों का कुल पेटेंट आवेदनों में लगभग 57.3 प्रतिशत योगदान रहा।
प्रतापराव जाधव ने बताया बड़ी उपलब्धि
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि आयुष से जुड़े पेटेंट आवेदनों और मंजूरियों में उल्लेखनीय वृद्धि इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा संरक्षण पर बढ़ते ध्यान को दर्शाती है।उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा अनुकूल वातावरण विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक मिलकर नए उत्पादों और समाधानों के विकास में योगदान दे सकें।जाधव ने भारत की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को उचित कानूनी संरक्षण देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
शोधकर्ताओं और संस्थानों की बढ़ रही भागीदारी
रिपोर्ट के अनुसार, पेटेंट आवेदन दाखिल करने वालों में व्यक्तिगत आविष्कारकों की हिस्सेदारी 51.9 प्रतिशत रही, जबकि शैक्षणिक संस्थानों की हिस्सेदारी 24.4 प्रतिशत दर्ज की गई।इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि आयुष क्षेत्र में व्यक्तिगत शोधकर्ताओं के साथ शिक्षण संस्थानों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
आयुष अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
रिपोर्ट में दर्ज उपलब्धियां भारत में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों से जुड़े अनुसंधान और तकनीकी विकास के विस्तार को दर्शाती हैं। हालांकि, पेटेंट प्राप्त होना किसी उपचार की चिकित्सकीय प्रभावशीलता का प्रमाण नहीं है। इसके लिए अलग वैज्ञानिक और नैदानिक परीक्षण आवश्यक होते हैं।
सरकार का जोर नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। आने वाले वर्षों में अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों और उद्यमियों की भागीदारी से आयुष क्षेत्र में नई तकनीकों तथा उत्पादों के विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
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