नई दिल्ली : 29 अक्टूबर 2026। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देशभर के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 'विशेष अभियान 6' की प्रगति की समीक्षा की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के नेतृत्व वाले मंत्रालय की इस पहल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) सहित देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को शामिल किया गया है। अभियान का मुख्य उद्देश्य अस्पतालों में साफ-सफाई की व्यवस्था मजबूत करना, लंबित प्रशासनिक कार्यों का निपटारा करना, पुराने दस्तावेजों का व्यवस्थित प्रबंधन करना और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। हालांकि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में जेपी नड्डा द्वारा एम्स में व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने की पुष्टि नहीं हुई है। 26 अक्टूबर को आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने की थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, विशेष अभियान 6 का आयोजन 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य संस्थानों और संबंधित कार्यालयों में स्वच्छता तथा प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्वच्छता केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अस्पतालों की व्यवस्था में स्थायी बदलाव दिखाई देना चाहिए।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में देशभर के 336 केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें एम्स गुवाहाटी, एम्स ऋषिकेश, एम्स भुवनेश्वर, निमहांस बेंगलुरु, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, सफदरजंग अस्पताल और क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान इंफाल सहित कई प्रमुख संस्थान शामिल रहे। बैठक में स्वास्थ्य संस्थानों के प्रतिनिधियों ने स्वच्छता अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों की जानकारी साझा की।
समीक्षा बैठक के दौरान अस्पतालों में स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण, जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन और परिसर की देखरेख से संबंधित गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन आते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर को साफ-सुथरा रखना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों में स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 27 अक्टूबर को विशेष कायाकल्प गतिविधियों का आयोजन निर्धारित किया था। इसके अंतर्गत अस्पताल परिसरों की गहन सफाई, पुराने और अनुपयोगी सामान का निपटारा, हरित क्षेत्रों का विकास तथा कचरा प्रबंधन जैसी गतिविधियों पर जोर दिया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां मरीजों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और आगंतुकों को स्वच्छ तथा व्यवस्थित सुविधाएं मिल सकें।
अभियान के दौरान सरकारी कार्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में लंबे समय से लंबित शिकायतों तथा प्रशासनिक मामलों के निपटारे को भी प्राथमिकता दी गई है। मंत्रालय के अनुसार, 26 अक्टूबर तक चिन्हित स्वच्छता स्थलों पर सफाई का लक्ष्य पूरा किया जा चुका था। इसके अलावा जन शिकायतों से संबंधित लगभग सभी लंबित अपीलों का निपटारा करने की जानकारी भी बैठक में दी गई। पुराने सामान की नीलामी और अन्य निपटान गतिविधियों से लगभग 50 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होने की बात सामने आई।
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी मध्यावधि प्रगति विवरण के अनुसार, अभियान के तहत 988 स्वच्छता स्थलों पर गतिविधियां संचालित की गई थीं। इनमें पौधरोपण और कार्यालय परिसरों के सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्य भी शामिल थे। इसके साथ ही 3,993 जन शिकायतों और 454 अपीलों का निपटारा किया गया। प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 40,123 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई, जिनमें से 6,890 अनुपयोगी फाइलों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हटाया गया।
इसी अवधि में 7,034 इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की समीक्षा की गई और 6,875 ई-फाइलों को बंद किया गया। इसके अलावा 800 ई-कचरा वस्तुओं का निपटारा भी किया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य कार्यालयों में अनावश्यक सामग्री का बोझ कम करना, उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग करना और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाना है।
बैठक में स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा अपनाए गए नवाचारों की भी चर्चा हुई। कुछ संस्थानों ने पुराने और अनुपयोगी सामान को उपयोगी वस्तुओं में बदलने की पहल की है। इनमें बेकार सामग्री से पौधों के स्टैंड और भंडारण रैक तैयार करना तथा पुराने फर्नीचर की मरम्मत कर उसका दोबारा इस्तेमाल करना शामिल है। इसके अतिरिक्त कई स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सा दस्तावेजों के डिजिटलीकरण, पौधरोपण और हरित परिसर विकसित करने जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
मरीजों और उनके परिजनों की समस्याओं का जल्द समाधान करने के लिए डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली को भी महत्वपूर्ण माना गया है। कुछ संस्थानों ने क्यूआर कोड आधारित फीडबैक व्यवस्था शुरू की है। इसके माध्यम से मरीज और आगंतुक अस्पताल की सुविधाओं के बारे में अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। मंत्रालय का मानना है कि ऐसी व्यवस्थाओं से अस्पताल प्रबंधन को कमियों की पहचान करने और सेवाओं में सुधार करने में सहायता मिल सकती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में स्वच्छता अभियान की सफलता का मूल्यांकन केवल सफाई गतिविधियों की संख्या के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसके वास्तविक परिणाम मरीजों, कर्मचारियों और आगंतुकों के अनुभवों में दिखाई देने चाहिए। इसी कारण स्वास्थ्य संस्थानों को अपनी गतिविधियों का दस्तावेजीकरण करने और उपलब्धियों को निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
विशेष अभियान 6 के अंतर्गत ई-कचरे के सुरक्षित निपटान को भी प्राथमिकता दी गई है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में समय के साथ बड़ी संख्या में पुराने कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य अनुपयोगी सामग्री जमा हो जाती है। इनका वैज्ञानिक तरीके से निपटान पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक माना जाता है। अभियान के माध्यम से ऐसी सामग्री को निर्धारित नियमों के अनुसार हटाने पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता को नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना है, ताकि अभियान समाप्त होने के बाद भी साफ-सफाई और बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था बनी रहे। विशेष अभियान 6 की अवधि 31 अक्टूबर को समाप्त होगी। इसके बाद अभियान की उपलब्धियों के आधार पर यह आकलन किया जा सकेगा कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छता तथा प्रशासनिक दक्षता को बेहतर बनाने की दिशा में कितनी प्रगति हुई है।
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