केंद्र ने बदला ईंधन निर्यात का टैक्स, पेट्रोल पर बढ़ोतरी, डीजल पर राहत
पेट्रोल निर्यात पर ₹2.50, डीजल पर ₹8.50 टैक्स
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स की दरों में बदलाव किया है। पेट्रोल निर्यात पर कर बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल निर्यात पर इसे घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर किया गया है। गुरुवार, 15 अक्टूबर को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, संशोधित दरें शुक्रवार, 16 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हैं। यह बदलाव विदेश भेजे जाने वाले ईंधन पर लागू होगा।
पेट्रोल निर्यात पर पहले 50 पैसे प्रति लीटर की दर से कर लागू था। नई दर के बाद इसमें दो रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। दूसरी ओर, डीजल निर्यात पर कर 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर किया गया है। इस तरह डीजल के निर्यात पर प्रति लीटर 7.50 रुपये की कमी आई है। दोनों उत्पादों की दरों में एक ही समीक्षा के तहत अलग-अलग दिशा में बदलाव किया गया है। मार्केटसक्रीनर सरकार ने विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर लागू विंडफॉल टैक्स में बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड से संबंधित जानकारी के अनुसार, घरेलू खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा शुल्क दरें भी यथावत हैं। इसलिए निर्यात कर में इस संशोधन को पेट्रोल पंप पर ईंधन के दाम में उतनी ही बढ़ोतरी या कमी की घोषणा नहीं समझा जाना चाहिए।
विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य असाधारण परिस्थितियों में होने वाले अतिरिक्त मुनाफे के एक हिस्से पर कर लगाना होता है। पेट्रोलियम क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में बदलाव से निर्यात की लाभप्रदता प्रभावित होती है। ऐसे में सरकार समय-समय पर निर्यात संबंधी कर दरों की समीक्षा करती है। यह व्यवस्था कंपनियों की निर्यात आय और घरेलू ईंधन उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखने से भी जुड़ी है। नई दरों का सीधा संबंध ईंधन निर्यात करने वाली कंपनियों के कर भुगतान से है। पेट्रोल के मामले में प्रति लीटर कर बढ़ा है, जबकि डीजल में यह घटा है। इससे दोनों उत्पादों के निर्यात पर कर की गणना बदलेगी। हालांकि, केवल इस संशोधन के आधार पर कंपनियों के कुल मुनाफे या निर्यात की मात्रा में निश्चित बदलाव का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता; उन पर अंतरराष्ट्रीय बिक्री मूल्य और अन्य लागतों का भी असर पड़ता है।
दरअसल, विंडफॉल टैक्स की दरों की समीक्षा सामान्यतः प्रत्येक पखवाड़े की जाती है। इसमें पिछले दिनों की औसत अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन की दरें अलग-अलग रखी जा सकती हैं। इस बार पेट्रोल और डीजल की दरें बदली गई हैं, जबकि विमान ईंधन की दर बरकरार रखी गई है। उदाहरण के तौर पर, नई दर से एक हजार लीटर पेट्रोल के निर्यात पर इस कर की गणना 2,500 रुपये होगी। इतनी ही मात्रा के डीजल पर यह राशि 8,500 रुपये बनेगी। ये उदाहरण घोषित प्रति लीटर दर का हिसाब बताते हैं; इन्हें किसी निर्यात खेप पर लगने वाले सभी करों और खर्चों का कुल विवरण नहीं माना जाना चाहिए।