नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन कार्यकर्ता शुक्रवार, 23 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट के सामने पेश हुए। इनमें आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे शामिल हैं। अदालत में उनकी जमानत से संबंधित जमानतदारों का सत्यापन किया गया। कार्यकर्ताओं के अनुसार, सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो गई है और मामले की अगली सुनवाई नवंबर के तीसरे सप्ताह में निर्धारित की गई है।यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब तीनों कार्यकर्ता दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के समन के बावजूद 22 अक्टूबर को पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए थे। पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामलों की जांच में शामिल होने के लिए बुलाया था।
कोर्ट में जमानतदारों का हुआ सत्यापन
शुक्रवार को अदालत में पेशी के बाद आशुतोष रांका ने बताया कि जमानतदारों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उनके मुताबिक, इस दौरान किसी तरह की परेशानी सामने नहीं आई।रांका ने कहा, "हमारी जमानत के सत्यापन की प्रक्रिया हुई। सब कुछ ठीक रहा और हमें नवंबर के तीसरे सप्ताह की कोई तारीख दी गई है।"हालांकि, अगली सुनवाई की सटीक तारीख की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे अदालत की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करेंगे।
क्राइम ब्रांच के समन पर नहीं हुए थे पेश
इससे पहले दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को 22 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पूछताछ के लिए बुलाया था। तीनों को पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।हालांकि, तीनों कार्यकर्ता निर्धारित समय पर जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। उन्होंने पुलिस से जांच में शामिल होने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। इसके बाद पुलिस की ओर से नए नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई।
13 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद
पूरा मामला 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में आयोजित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में प्रदर्शन किया था।पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की। इसके बाद संबंधित पुलिस थानों में मामले दर्ज किए गए और जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।वहीं, कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किया गया था।
अदालत ने शर्तों के साथ दी थी रिहाई
इससे पहले SEM कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया था। अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत और जमानती बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया थाइसके साथ ही दोनों कार्यकर्ताओं से लिखित आश्वासन लिया गया था कि वे शांति व्यवस्था बनाए रखेंगे और कानून का पालन करेंगे।अदालत ने उन्हें प्रत्येक निर्धारित सुनवाई में उपस्थित रहने तथा जमानत की शर्तों का पालन करने का निर्देश भी दिया था। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि रिहाई के बावजूद मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
पुलिस जांच और अदालती प्रक्रिया जारी
क्राइम ब्रांच की जांच और SEM कोर्ट की कार्यवाही अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। ऐसे में अदालत के सामने पेश होने के बावजूद कार्यकर्ताओं को पुलिस जांच में सहयोग करना पड़ सकता है।जांच एजेंसी प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और दर्ज मामलों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है। दूसरी ओर, कार्यकर्ता अपने पक्ष को कानूनी माध्यमों से रखने की बात कह रहे हैं।फिलहाल जमानतदारों के सत्यापन के बाद इस मामले में अगली सुनवाई नवंबर के तीसरे सप्ताह में होने की जानकारी सामने आई है। आगामी सुनवाई में अदालत की आगे की कार्यवाही और जांच की स्थिति पर नजर रहेगी।