नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। देश में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विपक्षी INDIA गठबंधन की ओर से 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित विशाल रैली को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवालों ने इस आंदोलन को नई चर्चा दी है। CJP का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली के कारण स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सार्वजनिक विश्वास कमजोर हुआ है।हालांकि, CJP के INDIA गठबंधन की 1 नवंबर की रैली को औपचारिक समर्थन देने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। संगठन के नेताओं ने चुनावी पारदर्शिता को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
1 नवंबर को दिल्ली में विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ, देश बचाओ' अभियान के तहत बड़ी रैली आयोजित करने की घोषणा की है। इस रैली का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता से जुड़े सवालों को जनता के सामने रखना है।कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के अनुसार, रैली में देशभर से लगभग 10 लाख लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी गठबंधन के सहयोगी दलों से कार्यक्रम में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज
CJP लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अपनाई गई प्रक्रियाओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके और अन्य पदाधिकारियों ने पहले भी चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है।संगठन ने SIR प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने, संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त करने जैसी मांगें भी उठाई हैं।
मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों पर विवाद
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में ऐसी खामियां हैं, जिनके कारण पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका पैदा हो रही है।कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए तथा प्रभावित नागरिकों को आपत्ति दर्ज कराने और अपील करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।वहीं, इन आरोपों को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
30 अक्टूबर को 'जन महाभियोग' कार्यक्रम
INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर की रैली से पहले 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक 'जन महाभियोग' कार्यक्रम आयोजित करने की भी घोषणा की है।विपक्षी नेताओं के अनुसार, इसका उद्देश्य चुनाव आयोग के कामकाज पर उठ रहे सवालों को सार्वजनिक मंच पर रखना और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग को मजबूत करना है।हालांकि, यह आयोजन संवैधानिक महाभियोग या मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की औपचारिक संसदीय प्रक्रिया नहीं होगा। यह विपक्ष द्वारा प्रस्तावित एक राजनीतिक विरोध कार्यक्रम है।
CJP के आंदोलन में युवाओं की भागीदारी
CJP के नेतृत्व में दिल्ली सहित कई शहरों में चुनावी पारदर्शिता को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। इन प्रदर्शनों में छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं की भागीदारी देखने को मिली है।दिल्ली में आयोजित कुछ प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद संगठन ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया।CJP नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि चुनावी व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को लेकर उसका अभियान जारी रहेगा।
कांग्रेस ने जनता से रैली में शामिल होने की अपील की
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, युवाओं और व्यापारियों सहित विभिन्न वर्गों के लोगों से 1 नवंबर के 'दिल्ली चलो' अभियान में भाग लेने की अपील की है।कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के मतदान अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़ा है।दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भाजपा से जुड़े नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अभियान बताया है। उनका कहना है कि विपक्ष को चुनाव आयोग के खिलाफ अपने दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर बढ़ी राजनीतिक बहस
भारत में चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसकी जिम्मेदारी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है। चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक माना जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार, मतदाता सूची में पारदर्शिता, शिकायतों का समयबद्ध समाधान और चुनावी फैसलों में निष्पक्षता जैसे पहलू चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।अब सभी की नजरें 30 अक्टूबर के विपक्षी कार्यक्रम और 1 नवंबर की दिल्ली रैली पर टिकी हैं। इन आयोजनों के जरिए INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी सुधारों की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी कर रहा है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे विवाद के बीच सरकार, विपक्ष और संवैधानिक संस्थाएं जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए आगे क्या कदम उठाती हैं।