बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस को नहीं मिली एक भी सीट, PM मोदी ने उठाए सवाल
नई दिल्ली : 28 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजों और रुझानों को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर तंज कसते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सवाल किया कि चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर बैलेट पेपर से चुनाव कराए गए, लेकिन कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं? दरअसल, इन चुनावों में कांग्रेस 12 सीटों पर मैदान में उतरी थी, लेकिन बुधवार तक सामने आए नतीजों और रुझानों में उसे एक भी जीत नहीं मिली। भाजपा ने इस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस के ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया संबंधी आरोपों पर भी सवाल उठाए हैं।
पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस पर कसा तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों का जिक्र किया।उन्होंने लिखा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक जैसे चार बड़े राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के लिए मतदान हुआ। उन्होंने विशेष रूप से यह बताया कि इन चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया था।इसके बाद प्रधानमंत्री ने सवाल किया, "अंदाजा लगाइए, कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?"प्रधानमंत्री के इस बयान को कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन और बैलेट पेपर की मांग को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस चुनाव में हार के बाद मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही है, जबकि मतपत्रों से हुए इन चुनावों में भी पार्टी को सफलता नहीं मिली।
चार राज्यों की 28 सीटों पर हुआ मतदान
विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 23 अक्टूबर को चार राज्यों में मतदान हुआ था। मतगणना 27 अक्टूबर से शुरू हुई।इन चुनावों में उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, महाराष्ट्र की 5 और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल थीं।कांग्रेस ने कुल 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इनमें कर्नाटक की चार, बिहार की पांच और महाराष्ट्र की तीन सीटें शामिल थीं।उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था।बुधवार को सामने आए नतीजों के अनुसार, पार्टी को किसी भी घोषित सीट पर जीत नहीं मिली। हालांकि, रिपोर्टिंग के समय कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना जारी थी।
कर्नाटक में कांग्रेस को बड़ा झटका, NDA ने जीतीं चारों सीटें
कर्नाटक में कांग्रेस को विशेष रूप से चुनावी झटका लगा। यहां सत्तारूढ़ कांग्रेस चारों विधान परिषद सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी।भाजपा और जनता दल सेक्युलर (JDS) गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की।भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें बरकरार रखीं।वहीं, जेडीएस ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट कांग्रेस से छीन ली।जेडीएस उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य पुट्टन्ना को 908 मतों से हराया।इस नतीजे के बाद भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने अपनी चुनावी रणनीति को सफल बताया, जबकि कांग्रेस के सामने संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा की चुनौती खड़ी हुई है।
उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला
उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों के चुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला।बुधवार दोपहर तक घोषित परिणामों में भाजपा ने चार सीटें जीत ली थीं, जबकि समाजवादी पार्टी को दो सीटों पर सफलता मिली थी।भाजपा ने बरेली-मुरादाबाद शिक्षक, लखनऊ शिक्षक, मेरठ शिक्षक और मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज की।वहीं, समाजवादी पार्टी ने वाराणसी शिक्षक और आगरा-अलीगढ़ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की।अन्य सीटों पर मतगणना जारी थी।गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने इन चुनावों में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था। इसलिए इस राज्य में कांग्रेस की शून्य सीटों को सीधे तौर पर उसके उम्मीदवारों की हार नहीं कहा जा सकता।
बिहार में प्रशांत किशोर की पार्टी ने खोला खाता
बिहार विधान परिषद चुनाव में भी दिलचस्प परिणाम सामने आए।प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जीत दर्ज कर पहली बार विधान परिषद में प्रवेश किया।पार्टी उम्मीदवार सुरेश राय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को हराया।वहीं, राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के अनुभवी नेता नवल किशोर यादव को पराजित किया।तिरहुत निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह को जीत मिली।बिहार के कुछ अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना जारी थी। इन परिणामों ने राज्य में शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच विभिन्न दलों की चुनावी स्थिति को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र में भी कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर
महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों के चुनाव में कांग्रेस ने तीन उम्मीदवार उतारे थे, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा।रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस को अपनी पहले से मौजूद दो सीटों पर भी नुकसान उठाना पड़ा।दूसरी ओर, एनसीपी (एसपी) ने अपनी दोनों चुनावी सीटों पर जीत दर्ज की।इन नतीजों ने महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के बीच चुनावी प्रदर्शन के अंतर को भी सामने रखा।हालांकि, बुधवार सुबह की कुछ रिपोर्टों में महाराष्ट्र की सीटों पर मतगणना जारी बताई गई थी। इसलिए अंतिम सीटवार आंकड़ों के लिए आधिकारिक परिणाम महत्वपूर्ण हैं।
बैलेट पेपर और EVM को लेकर फिर छिड़ी बहस
प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी का प्रमुख राजनीतिक संदर्भ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों और चुनावी पारदर्शिता को लेकर जारी बहस है।राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने पिछले कुछ समय से मतदाता सूचियों तथा चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं।भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है।भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस को ईवीएम और मतपत्र, दोनों तरह के मतदान में हार का सामना करना पड़ा है।हालांकि, विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं का दायरा सीमित होता है। इनके परिणाम लोकसभा या विधानसभा चुनावों के समान मतदाता समूह का प्रतिनिधित्व नहीं करते।इसके अलावा बैलेट पेपर से हुए चुनाव का परिणाम अपने आप ईवीएम की तकनीकी विश्वसनीयता से जुड़े सवालों का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
भाजपा ने राहुल गांधी की राजनीति पर उठाए सवाल
भाजपा नेताओं ने इन चुनावों के रुझानों को लेकर कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति की आलोचना की है।भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी चुनाव परिणामों का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा चुनावी प्रक्रिया पर लगाए गए आरोपों का विरोध किया।उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव नतीजों को स्वीकार करते हुए अपने राजनीतिक प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए।भाजपा का कहना है कि जनसमर्थन हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों को अपनी नीतियों और संगठनात्मक गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।वहीं, कांग्रेस लंबे समय से चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठा रही है।इन आरोपों और प्रतिक्रियाओं के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर दोनों दलों के राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले नतीजे महत्वपूर्ण
चार राज्यों के विधान परिषद चुनाव ऐसे समय हुए हैं, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की राजनीतिक तैयारियां शुरू हो रही हैं।ऐसे में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणामों को विभिन्न दलों के संगठनात्मक समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।हालांकि, इन चुनावों का मतदाता आधार सीमित होने के कारण इनके आधार पर भविष्य के विधानसभा चुनावों का परिणाम तय नहीं किया जा सकता।कर्नाटक में भाजपा-जेडीएस गठबंधन को चारों सीटों पर जीत मिली है, जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश में अन्य विपक्षी दलों ने भी सीटें जीती हैं।इससे स्पष्ट है कि चुनावी परिणाम राज्यों और निर्वाचन क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग रहे हैं।
पीएम मोदी के बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विधान परिषद चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं।कांग्रेस को बुधवार तक घोषित परिणामों में एक भी सीट नहीं मिलने पर भाजपा ने सवाल उठाए हैं।वहीं, चुनाव परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करते समय यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि कांग्रेस ने 28 में से केवल 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे।फिलहाल प्रधानमंत्री की टिप्पणी और भाजपा के अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाओं से कांग्रेस तथा भाजपा के बीच चुनावी पारदर्शिता और राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर बहस तेज हो गई है।