जयपुर। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में शामिल नहीं होना राजस्थान युवा कांग्रेस के कई नेताओं को भारी पड़ गया है। भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने संगठनात्मक अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए राजस्थान के 31 प्रदेश पदाधिकारियों और 12 जिलाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस तरह प्रदेश में कुल 43 पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। संगठन के इस फैसले के बाद राजस्थान कांग्रेस के राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई एक नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्षी गठबंधन की महारैली से अनुपस्थित रहने के कारण की गई है। संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व ने सभी प्रदेश और जिला पदाधिकारियों को कार्यक्रम में शामिल होने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कई पदाधिकारी रैली में नहीं पहुंचे। युवा कांग्रेस ने इसे निर्देशों की अवहेलना और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही माना है।पांच नवंबर को जारी निलंबन आदेशों पर राजस्थान युवा कांग्रेस के प्रभारी एवं भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव विकास चिकारा तथा सह प्रभारी ज्ञानेश शुक्ला के हस्ताक्षर हैं। आदेश के अनुसार, संबंधित पदाधिकारियों का निलंबन अगले निर्देश तक प्रभावी रहेगा।
प्रदेश स्तर पर जिन 31 पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है, उनमें एक प्रदेश उपाध्यक्ष, 10 महासचिव और 20 प्रदेश सचिव शामिल हैं। निलंबित प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश चंद मीणा हैं। वहीं महासचिवों में सद्दाम हुसैन मेव, फैजान हसन कुरैशी, जाफर हुसैन मीर, सलमा पिनारा, रामफूल धाकड़, गणेश देवासी, ठाकुर बिश्नोई, मंजुला देसाई, अर्जुन सिंह बोचावत और दीपक मेघवाल के नाम शामिल हैं।इसके अलावा जिला स्तर पर भी संगठन ने सख्त रुख अपनाया है। निलंबित 12 जिलाध्यक्षों में राजसमंद के चिराग पालीवाल, जालोर के विकास मंजू, बीकानेर के राजेश गोदारा, बारां के रामेश्वर बैरवा, बांसवाड़ा के पृथ्वीराज मालवीय और डूंगरपुर के अरविंद यादव शामिल हैं। इसी तरह बीकानेर शहर के रामदयाल बेनीवाल, प्रतापगढ़ के मोहम्मद शकील, बालोतरा के सुरेश माली, डीग के हसन खान, चूरू के आसिफ खान और ब्यावर के प्रवीण सिखवाल पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।राजस्थान में हुई इस कार्रवाई को युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे अनुशासन अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। दिल्ली की रैली में अनुपस्थित रहने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ संगठन कई राज्यों में कदम उठा रहा है। मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय इकाई में भी पदाधिकारियों को निलंबित किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
राजस्थान की ताजा कार्रवाई से पहले विभिन्न राज्यों में 215 पदाधिकारियों के निलंबन की जानकारी सामने आई थी। इनमें मध्य प्रदेश के 60, गुजरात के 49, झारखंड के 32, पश्चिम बंगाल के 26, तेलंगाना के 14, हिमाचल प्रदेश के 13, उत्तर प्रदेश मध्य क्षेत्र के 11 और हरियाणा के 10 पदाधिकारी शामिल बताए गए थे। राजस्थान के आदेश बाद में सामने आए हैं।दरअसल, एक नवंबर को आयोजित महारैली का उद्देश्य मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंताओं को उठाना था। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। हालांकि, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी के आरोप विपक्ष के दावे हैं।रैली से पहले कांग्रेस और युवा कांग्रेस ने बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने की तैयारी की थी। संगठन ने पदाधिकारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए डिजिटल व्यवस्था भी लागू की थी। दिल्ली के मिंटो रोड स्थित एकत्रीकरण स्थल पर बारकोड स्कैनर लगाए गए थे। कार्यकर्ताओं को युवा कांग्रेस के आधिकारिक ‘With IYC’ ऐप पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे।
युवा कांग्रेस के अनुसार, रैली से पहले मिंटो रोड पर लगभग 15 हजार कार्यकर्ता एकत्र हुए थे। हालांकि, ऐप पर केवल 2,831 लोगों का पंजीकरण दर्ज हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी जानकारी की कमी के कारण भी कुछ लोगों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी। इसके बाद संगठन ने उपस्थिति संबंधी आंकड़ों और पदाधिकारियों की भागीदारी की समीक्षा शुरू की।भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि रैली सफल रही, लेकिन संगठन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ पदाधिकारियों ने अपेक्षित अनुशासन नहीं दिखाया। उन्होंने संगठन में सक्रिय और जिम्मेदार कार्यकर्ताओं को आगे लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके मुताबिक, भविष्य में बड़े आंदोलनों के लिए मजबूत और सक्रिय संगठन तैयार करना जरूरी है।राजनीतिक दृष्टि से राजस्थान युवा कांग्रेस की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश में एक साथ 43 पदाधिकारियों का निलंबन दर्शाता है कि राष्ट्रीय नेतृत्व बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों में संगठन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना चाहता है। जिला अध्यक्षों से लेकर प्रदेश महासचिवों और सचिवों तक कार्रवाई होने से यह संदेश भी गया है कि वरिष्ठ पदों पर रहने वाले नेताओं की जवाबदेही तय की जा रही है।हालांकि, इस फैसले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन पदाधिकारियों की अनुपस्थिति के पीछे व्यक्तिगत, स्वास्थ्य संबंधी या अन्य अपरिहार्य कारण रहे होंगे, उन्हें अपना पक्ष रखने का कितना अवसर मिलेगा। फिलहाल सभी निलंबन अगले आदेश तक प्रभावी बताए गए हैं। संबंधित नेताओं की संभावित बहाली को लेकर संगठन की ओर से कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है।इस पूरे घटनाक्रम ने युवा कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक अनुशासन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और राजनीतिक आंदोलनों में भागीदारी को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। राजस्थान में 31 प्रदेश पदाधिकारियों और 12 जिलाध्यक्षों पर हुई कार्रवाई से स्पष्ट है कि युवा कांग्रेस नेतृत्व आगामी कार्यक्रमों में पदाधिकारियों की उपस्थिति और जिम्मेदारी को गंभीरता से ले रहा है।