नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस की राज्यसभा सांसद जेबी माथर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले युवाओं को अराजकता फैलाने वाली ताकतों के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्ष की मांग को दोहराया।
अमित शाह के बयान पर जेबी माथर ने उठाए सवाल
विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की जीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संगठन के कार्यकर्ताओं को बधाई दी थी। इसी संदर्भ में विरोध करने वाले छात्र संगठनों को लेकर की गई टिप्पणियों पर कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने आपत्ति जताई।माथर ने सवाल उठाया कि यदि कुछ छात्र संगठन सरकार या चुनाव आयोग के फैसलों का विरोध कर रहे हैं, तो उन्हें झूठ और अराजकता फैलाने वाली ताकतों के रूप में क्यों देखा जा रहा है।उन्होंने कहा कि देश के युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी मांगों को सुनने के बजाय उनके इरादों पर सवाल उठाना चिंताजनक है।
तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्र देशद्रोही कैसे?
कांग्रेस सांसद ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का बचाव करते हुए सवाल किया कि हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर सड़कों पर उतरने वाले युवाओं को किस आधार पर अराजक बताया जा सकता है।जेबी माथर ने कहा, "क्या गृह मंत्री यह कहना चाहते हैं कि वे सभी युवा छात्र, जो अपने मन और दिल में देशभक्ति की भावना लिए भारतीय तिरंगा थामे हुए आए थे, वे देशद्रोही हैं या अराजकता फैला रहे हैं? यह छात्रों के मौलिक अधिकारों पर हमला है।"उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना नागरिकों का अधिकार है। किसी सरकारी निर्णय या संवैधानिक संस्था के कामकाज पर सवाल उठाने मात्र से किसी व्यक्ति की देशभक्ति पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई
जेबी माथर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों में संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों पर छात्र संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन किए हैं।वहीं चुनाव आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण में राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कई छात्र हिरासत में
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस क्षेत्र में आयोजित प्रदर्शन के दौरान निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने मामले दर्ज किए।प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की, जबकि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और लागू प्रतिबंधों का हवाला दिया।
ABVP ने भी विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब
दूसरी ओर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकारें चुनाव और जनता के जनादेश से बदलती हैं।संगठन ने 16 अक्टूबर को विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक असहमति स्वीकार्य है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को कमजोर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
छात्र आंदोलनों को लेकर बढ़ा राजनीतिक टकराव
छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच मतभेद अब व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए हैं। कांग्रेस प्रदर्शनकारियों के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा और उसके समर्थक संगठन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।जेबी माथर के बयान के बाद यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आने वाले दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग, मतदाता सूची पुनरीक्षण और छात्र संगठनों के प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
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