NEET स्कोर विवाद पर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

Update: 2026-07-29 13:44 GMT

नीट-यूजी 2026: परिणाम को लेकर एक अभ्यर्थी ने गंभीर सवाल उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभ्यर्थी ने आरोप लगाया है कि परिणाम जारी होने के बाद महज 24 घंटे के भीतर उसके अंक तीन बार बदल दिए गए। उसने अदालत से अपनी मूल ओएमआर उत्तर पुस्तिका और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के साथ ही जांच के लिए पेश करने का निर्देश देने की मांग की है।

अभ्यर्थी का कहना है कि वह अपने उत्तरों का दोबारा मूल्यांकन कराने की मांग नहीं कर रहा है, बल्कि वह केवल यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसकी उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन की प्रक्रिया सही, पारदर्शी और नियमों के अनुसार हुई है या नहीं। याचिका में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

याचिका के अनुसार, अभ्यर्थी ने आधिकारिक उत्तर कुंजी के आधार पर अपने प्रदर्शन का अनुमान लगाया था। उसके अनुसार उसे करीब 620 से 640 अंक मिलने की उम्मीद थी। जब 16 जुलाई को नीट-यूजी 2026 का परिणाम घोषित किया गया तो एनटीए की वेबसाइट पर लॉगिन करने के बाद शुरुआत में उसके 650 अंक दिखाई दिए। हालांकि कुछ समय बाद जब उसने दोबारा पोर्टल पर जाकर अपना परिणाम देखा तो अंक घटकर 500 रह गए।

अभ्यर्थी का आरोप है कि अगले ही दिन वेबसाइट पर उसके अंक और कम होकर केवल 135 दिखाए गए। लगातार बदलते अंकों को देखकर वह हैरान रह गया और उसने इस मामले में एनटीए से संपर्क किया। उसका कहना है कि इतने बड़े बदलाव से परीक्षा परिणाम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

अभ्यर्थी ने बताया कि उसने इस संबंध में एनटीए को ई-मेल भेजकर जानकारी मांगी और सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से भी जवाब हासिल करने की कोशिश की। लेकिन उसके अनुसार उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद वह खुद एनटीए कार्यालय पहुंचा और अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी मांगी।

याचिका में दावा किया गया है कि एनटीए कार्यालय में अधिकारियों ने उसे कंप्यूटर स्क्रीन पर एक ओएमआर शीट दिखाई। अभ्यर्थी का कहना है कि दिखाई गई ओएमआर शीट उसकी वास्तविक उत्तर पुस्तिका नहीं थी। उसने तत्काल इस पर आपत्ति जताई, लेकिन अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा कि उनके रिकॉर्ड में यही ओएमआर शीट मौजूद है और अदालत में भी इसी को प्रस्तुत किया जाएगा।

अभ्यर्थी ने अपनी याचिका में कहा है कि नीट-यूजी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं और उनका भविष्य परीक्षा परिणाम पर निर्भर करता है। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की जिम्मेदारी है कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह हो।

याचिका में अदालत से मांग की गई है कि एनटीए को अभ्यर्थी की मूल भौतिक ओएमआर शीट, स्कैन कॉपी, डिजिटल रिकॉर्ड और मूल्यांकन से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए। साथ ही इन रिकॉर्ड का स्वतंत्र सत्यापन कराने की भी मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अंक बदलने के पीछे तकनीकी गलती थी या कोई अन्य कारण।

इस मामले ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में डिजिटल मूल्यांकन और परिणामों की पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। छात्रों और अभिभावकों के बीच परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ रही है। अब सभी की नजर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई पर है कि अदालत इस मामले में क्या दिशा-निर्देश जारी करती है।

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