दिल्ली का वायु प्रदूषण पिछले 288 दिनों के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गया। शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़कर 377 हो गया, जबकि 59 निगरानी केंद्रों में से 22 केंद्रों पर गंभीर प्रदूषण दर्ज किया गया। इससे पहले ऐसी स्थिति 20 जनवरी को देखी गई थी, जब AQI 378 था। IIT-दिल्ली में सबसे अधिक 458 AQI दर्ज किया गया। इसके बाद जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में 448-448, और मुंडका में 439 AQI दर्ज किया गया। बाकी निगरानी केंद्रों में से 32 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' और 5 केंद्रों पर 'खराब' रही। यानी, कोई भी केंद्र इन तीन श्रेणियों से बाहर नहीं था।
IITM-पुणे के 'डिसीजन सपोर्ट सिस्टम' के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान पराली जलाने का रहा, जो कुल प्रदूषण का 20.2% है। 15.5% योगदान के साथ परिवहन (ट्रांसपोर्ट) दूसरे स्थान पर रहा। आवासीय स्रोतों का योगदान 3.8%, उद्योगों का 2.9% और निर्माण कार्यों का 2.2% रहा। दिल्ली से सटे NCR जिलों ने भी प्रदूषण बढ़ाने में योगदान दिया; इनमें गाजियाबाद का हिस्सा 7%, रोहतक का 3.8% और गुरुग्राम का 2.7% रहा। बुधवार को प्रदूषण का मुख्य कारक भी बदल गया। लगातार तीन दिनों तक PM2.5 के प्रमुख प्रदूषक रहने के बाद, अब PM10 सबसे बड़ा प्रदूषक बन गया है। अधिकतम तापमान 29.8°C दर्ज किया गया।
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